लोक निर्माण वित्तीय व लेखा नियमों में संशोधन, वित्त विभाग ने जारी किया संशोधन
व्यवस्था को लेकर अहम जानकारी सामने आई
इंजीनियरिंग विभागों में होने वाले डिपॉजिट लेन-देन को लेकर नियम और व्यवस्था को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। विभागीय प्रावधानों के अनुसार, इंजीनियरिंग विभागों में डिपॉजिट लेन-देन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।
जयपुर। इंजीनियरिंग विभागों में होने वाले डिपॉजिट लेन-देन को लेकर नियम और व्यवस्था को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। विभागीय प्रावधानों के अनुसार, इंजीनियरिंग विभागों में डिपॉजिट लेन-देन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।
पहला, पब्लिक वर्क्स डिपॉजिट, जो सीधे तौर पर संबंधित डिवीजन के नियमित खातों के माध्यम से संचालित किए जाते हैं। इन लेन-देन को ‘पब्लिक वर्क्स डिपॉजिट’ नामक अकाउंट हेड के तहत दर्ज किया जाता है। इस श्रेणी में कुल पाँच तरह के डिपॉजिट शामिल हैं-
अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा सुरक्षा के रूप में जमा की गई नकद राशि
ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा के तौर पर जमा नकद डिपॉजिट
ऐसे कार्यों के लिए जमा राशि, जो तकावी कार्यों के अतिरिक्त हों
बंद किए गए खातों में ठेकेदारों को देय शेष राशि और
अन्य विविध प्रकार के डिपॉजिट।
दूसरा, ब्याज धारक प्रतिभूतियाँ यानी इंटरेस्ट बेयरिंग सिक्योरिटीज। यह प्रतिभूतियाँ अधीनस्थ कर्मचारियों और ठेकेदारों द्वारा जमा की जाती हैं, लेकिन खास बात यह है कि ये डिपॉजिट डिवीजन के नियमित खातों से होकर नहीं गुजरते।
इसके अलावा नियमों में यह भी प्रावधान है कि जहां इस नियमावली और अनुबंध की शर्तों के तहत अनुमति हो, वहां ठेकेदार सिक्योरिटी डिपॉजिट के बदले राष्ट्रीयकृत या अनुसूचित बैंकों से बैंक गारंटी प्राप्त कर सकते हैं। यह बैंक गारंटी राजस्थान के राज्यपाल के पक्ष में होगी और इसे संबंधित डिवीजनल ऑफिसर के पास जमा कराना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कार्यों में वित्तीय सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों-दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।

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