संघर्ष से शौर्य तक : मां के बिना पले भीम-स्कंधी अब नाहरगढ़ टाइगर सफारी के सरताज
दोनों शावकों का नियोनिटेल केयर से टाइगर सफारी तक का आसान नहीं रहा सफर
जिंदगी की सबसे कठिन शुरुआत के बाद अब जीत की दहाड़ गूंज रही है। जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में सफेद बाघ भीम और गोल्डन बाघिन स्कंधी की कहानी संघर्ष, संवेदनशीलता और सफ लता की मिसाल बन गई है।
जयपुर। जिंदगी की सबसे कठिन शुरुआत के बाद अब जीत की दहाड़ गूंज रही है। जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में सफेद बाघ भीम और गोल्डन बाघिन स्कंधी की कहानी संघर्ष, संवेदनशीलता और सफ लता की मिसाल बन गई है। 10 मई, 2024 को जन्म के तुरंत बाद मां ने दोनों शावकों को छोड़ दिया था। जिससे उनका बचना भी मुश्किल माना जा रहा था। उन्हें बायोलॉजिकल पार्क स्थित नियोनिटेल केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया था। यहां नाहरगढ़ बायोलाजिकल पार्क के उप निदेशक डॉ.अरविंद माथुर और उनकी टीम ने इन शावकों की पूरी देखभाल की। अब वही दोनों भाई-बहन टाइगर सफारी के खुले जंगल में अपनी धाक जमाने को तैयार हैं। इन्हें रविवार को नाहरगढ़ टाइगर सफारी में पर्यटकों के अवलोकनार्थ छोड़ा गया।
डमी मां और विदेशी दूध से मिली नई जिंदगी
दोनों शावकों को बचाने के लिए विशेषज्ञों ने अनोखे प्रयोग किए। अस्पताल में डमी टाइग्रेस लाई गई। जिस पर असली टाइग्रेस की गंध डाली गई, ताकि उन्हें मां जैसा अहसास मिल सके। इसके साथ ही अमेरिका से मंगाए गए विशेष दूध से उनका पोषण किया गया। लगातार पांच महीने तक गहन देखभाल के बाद उन्हें बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया और बाद में डिस्प्ले एरिया में रखा गया। अब राजस्थान में पहली बार सफेद बाघ को इस तरह सफारी में देखने का अवसर सैलानियों को मिलेगा।
सफारी में गुलाब, चमेली और भक्ति भी
नाहरगढ़ टाइगर सफारी में पहले से मौजूद नर बाघ गुलाब, बाघिन चमेली भी अक्सर सैलानियों को नजर आती है। वहीं एक अन्य बाघिन भक्ति भी अपने शांत स्वभाव के लिए जानी जाती है।

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