सुरों में सजी जीवन की सीख : JLF में गौर गोपाल दास का राग–वैराग्य, कहा- हर जीवन एक अधूरी धुन की तरह है, जिसमें कोई न कोई बोझ छुपा होता है
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का एक सत्र सुरों और संवेदनाओं में डूब गया
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का एक सत्र उस वक्त सुरों और संवेदनाओं में डूब गया, जब मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने शब्दों के साथ संगीत को भी संवाद का माध्यम बनाया।
जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का एक सत्र उस वक्त सुरों और संवेदनाओं में डूब गया, जब मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने शब्दों के साथ संगीत को भी संवाद का माध्यम बनाया। उन्होंने कहा कि हर जीवन एक अधूरी धुन की तरह है, जिसमें कोई न कोई ऐसा बोझ छुपा होता है, जो मन के तारों को कसकर बाँधे रखता है। असली सवाल यह नहीं कि परेशानी क्या है, बल्कि यह है कि हम आज कौन-सा बोझ उतारने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि लोग मृत्यु को अनावश्यक रूप से कोसते हैं, जबकि जीवन की उलझनें ही अक्सर सबसे भारी साबित होती हैं।
अपने विचारों को और गहराई देने के लिए गौर गोपाल दास ने ‘खामोशियाँ’ सहित अन्य गीत गाए, जिससे पूरा माहौल संगीत मय हो गया। सुरों के बीच उन्होंने बताया कि उनकी लेखन यात्रा भी इसी आत्मबोध से निकली है। जब मन अपने भीतर जमा शोर को शांत कर देता है, तभी जीवन की नई लय बनती है। उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन की उस धुन को पहचानें, जो अब बेसुरी हो चुकी है और जिसे छोड़ देना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित जेएलएफ के तीसरे दिन की शुरुआत समाजसेवी और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति के वक्तव्य से हुई।

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