आबकारी विभाग के पुनर्गठन आदेश पर अंतरिम रोक, राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

बिना नए सेवा नियम बनाए और मौजूदा वैधानिक नियमों में संशोधन किए उठाया कदम

आबकारी विभाग के पुनर्गठन आदेश पर अंतरिम रोक, राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
राजस्थान हाईकोर्ट ने आबकारी विभाग के पुनर्गठन और नए आबकारी प्रवर्तन एवं निरोधक बल के गठन पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए कहा कि नए सेवा नियम बनाए बिना लागू की गई व्यवस्था कर्मचारियों के अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। मामला राजस्थान आबकारी सेवा संघ की याचिका से जुड़ा है।

जयपुर।। राजस्थान हाईकोर्ट ने आबकारी विभाग के पुनर्गठन और आबकारी प्रवर्तन एवं निरोधक बल के गठन से जुड़े राज्य सरकार के गत एक जून के आदेशों की क्रियांविति पर आगामी आदेशों तक रोक लगा दी है। वहीं राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकारों से जवाब देने के लिए कहा है। अवकाशकालीन जस्टिस चन्द्र प्रकाश श्रीमाली ने यह निर्देश राजस्थान आबाकारी सेवा संघ की याचिका पर दिया। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि यदि नए सेवा नियम बनाए बिना नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू होती है, तो इससे उन कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जो मौजूदा नियमों के तहत पदों पर कार्यरत हैं। कोर्ट ने यह माना कि ऐसी स्थिति में वरिष्ठताए पदोन्नति और भर्ती से जुड़े कई जटिल विवाद पैदा हो सकते हैं। याचिका में राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके जरिए आबकारी विभाग आबकारी प्रवर्तन एवं निरोधक बल का गठन किया था। प्रार्थी संघ की ओर से अधिवक्ता सारांश सैनी ने कहा कि सरकार ने यह कदम बिना नए सेवा नियम बनाए और मौजूदा वैधानिक नियमों में संशोधन किए उठाया है।

आबकारी विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तें दो अलग-अलग वैधानिक नियमों द्वारा नियंत्रित होती हैं। पहला, राजस्थान आबकारी अधीनस्थ सेवा सामान्य शाखा नियम,1974 और दूसरा, राजस्थान आबकारी अधीनस्थ सेवा निरोधक शाखा नियम, 1976। ये दोनों नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए हैं और इनमें विभिन्न पदों की भर्ती, पदोन्नति तथा सेवा संरचना का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार ने 1 जून 2026 के आदेशों के जरिए विभागीय पुनर्गठन कर सामान्य शाखा और निरोधक शाखा को एकीकृत करने की दिशा में नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू किया है। ऐसा करते समय न तो 1974 और 1976 के नियमों में संशोधन किया और न ही कोई नए सेवा नियम ही अधिसूचित किए हैं।

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