देर रात तक रुक-रुक कर बारिश : तापमान में सात डिग्री तक की गिरावट, आज भी जयपुर सहित कई जगहों पर जारी रह सकता है बारिश का दौर
राजस्थान में मौसम का यू-टर्न: ओलावृष्टि और बारिश से लुढ़का पारा
पश्चिमी विक्षोभ के चलते जयपुर, नागौर और टोंक सहित कई जिलों में तेज अंधड़ के साथ बारिश और ओले गिरे। फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है और तापमान में 7 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो के सक्रिय होने से इस साल मानसून कमजोर रह सकता है।
जयपुर। प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण जयपुर सहित कई जिलों में मंगलवार सुबह से ही मौसम में बदलाव हुआ। जयपुर में सुबह बादल छाए और फिर बारिश हुई। दोपहर में एक बार फिर धूप खिली फिर शाम को बारिश का दौर शुरू हुआ जो रुक-रुक कर देर रात तक बूंदाबांदी के रूप में चलता रहा। नागौर में तेज अंधड़ के साथ बारिश हुई और चने के आकार के ओले भी गिरे। यहां तेज तूफान के कारण कई पेड़ और बिजली पोल गिर गए। फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा। टोंक और श्रीगंगानगर में भी तेज बारिश के साथ ओले गिरे। जैसलमेर, अजमेर, जोधपुर, सीकर, बांसवाड़ा सहित कई जिलों में बारिश हुई। सीकर-झुंझुनूं में भी तेज अंधड़ के साथ ओले और उदयपुर-प्रतापगढ़ में अंधड़ के साथ बारिश हुई। अलवर में तेज देर शाम तेज बारिश हुई। बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश फलोदी में 42 एमएम दर्ज की गई।
आज भी रहेगा पश्चिमी विक्षोभ का असर
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी पश्चिमी विक्षोभ का असर रहेगा। जिसके भरतपुर, जयपुर संभाग के उत्तरी भागों में हल्की बारिश की संभावना है। वहीं 9 अप्रेल से तापमान में 3-4 डिग्री बढ़ोतरी होने की संभावना है। बारिश के कारण तापमान में सात डिग्री तक की गिरावट आई है। इस बीच अधिकांश जिलों में तापमान 30 डिग्री या उसके आसपास ही दर्ज किया गया।
इस बार मानसून के कमजोर रहने के आसार
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बीते करीब 20 दिन में एक्टिव हुए 6 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण मौसम गर्म नहीं हो सका है। इसका असर आने वाले मानसून सीजन पर पड़ने की आशंका है। एक्सपर्ट के अनुसार मानसून को कई फैक्टर प्रभावित करते हैं। यदि गर्मी तेज पड़ती है और समुद्र का तापमान सामान्य से नीचे रहता है तो मानसून अच्छा रहता है। हालांकि इस बार स्थिति विपरीत हो सकती है। बार-बार बारिश से धरती का तापमान सामान्य से नीचे है। वहीं समुद्र का तापमान फिलहाल सामान्य है लेकिन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। जुलाई-अगस्त के बीच अल-नीनो के सक्रिय होने की संभावना 60 से 80 फीसदी के बीच है। इसका प्रभाव कम बारिश के तौर पर सामने आ सकता है। क्योंकि जुलाई में ही मानसून में सबसे ज्यादा बरसात होती है।

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