ग्लोबल मंच पर जनजातीय कला : पीएम मोदी ने वैश्विक नेताओं को भेंट किए जनजातीय कला का प्रदर्शन करने वाले उपहार
भारत की जीवंत जनजातीय कला की विरासत का प्रतीक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी दौरों पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। उन्होंने स्वीडन की प्रिंसेस को मध्य प्रदेश की गोंड पेंटिंग, इटली की पीएम मेलोनी को असम का मूगा सिल्क व नागा शॉल और यूएई की महारानी को मणिपुर का काला चावल (चक-हाओ) उपहार में देकर वैश्विक स्तर पर आदिवासी शिल्प कौशल को बढ़ावा दिया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल की अपनी विदेश यात्राओं के दौरान वहां के नेताओं को जनजातीय कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाने वाले उपहार भेंट कर देश की समृद्ध विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल से उन्हें अवगत कराया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पीएम मोदी ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को मध्य प्रदेश की परंपरागत गोंड पेंटिंग भेंट की, जो भारत की जीवंत जनजातीय कला की विरासत का प्रतीक है। गोंड आदिवासी समुदाय की इस कला को अपने जटिल बिंदु-रेखा पैटर्न, चमकदार प्राकृतिक रंगों और प्रकृति से प्रेरित विषयों के चित्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। गोंड कला मध्य भारत के आदिवासी कारीगरों को स्थायी रूप से आजीविका के अवसर प्रदान करती रहती है।
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को असम के मूगा रेशम की पारंपरिक शॉल और मणिपुर के तंगखुल नागा समुदाय की ओर से निर्मित शिरुई लिली की शॉल उपहार में दी । प्राकृतिक रूप से चमकदार और टिकाऊ होने के कारण प्रसिद्ध मूगा रेशम असम की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा का प्रतीक है और इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। शिरुई लिली की शॉल तंगखुल नागा जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और कलात्मक परंपराओं को दर्शाती है। यह मणिपुर के दुर्लभ राज्य पुष्प शिरुई लिली से प्रेरित है।
उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात की महारानी को मणिपुर का काला चावल (चक-हाओ) उपहार में दिया, जो इस क्षेत्र के जनजातीय पहाड़ी समुदायों की ओर से पारंपरिक धरोहर के रूप से उगाया जाने वाला अनाज है। चक-हाओ की पहचान व्यापक रूप से अपने पौष्टिक और औषधीय गुणों के लिए है। यह इस क्षेत्र के मूलनिवासी समुदायों की पीढ़ियों से संरक्षित समृद्ध कृषि परंपराओं का प्रतीक है।

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