14 बार हारे, फिर भी हौसला बरकरार! अब 15वीं पारी खेलने को तैयार ‘पोपटलाल’
सरपंच से सांसद तक आजमाई किस्मत
जयपुर/बालोतरा। राजनीति में कुछ लोग सत्ता के लिए चुनाव लड़ते हैं, कुछ सियासत में पहचान बनाने के लिए, लेकिन राजस्थान के पोपटलाल सरगरा का मामला कुछ अलग ही है। यहां हार भी है, हौसला भी और चुनाव लड़ने की ऐसी धुन भी, जो 14 हार के बाद भी कम होने का नाम नहीं ले रही। 59 साल के पोपटलाल अब एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। सवाल वही है-14 बार हार का सामना करने वाले पोपटलाल की 15वीं पारी में क्या जीत का खाता खुलेगा?
बालोतरा जिले के समदड़ी क्षेत्र के रहने वाले पोपटलाल सरगरा इन दिनों राजस्थान की सियासत में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच उनका नाम उस समय फिर सुर्खियों में आया, जब कांग्रेस नेता और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने एक बैठक में उनके चुनाव लड़ने के जुनून का जिक्र किया। चौधरी की चुटकी के बाद पोपटलाल की चुनावी कहानी एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में आ गई है।
चुनाव कोई भी हो, पोपटलाल तैयार!
पोपटलाल का चुनावी सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। अब तक वे सरपंच से लेकर विधायक और सांसद बनने तक की उम्मीद में 14 बार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। इनमें पांच बार सरपंच, चार बार विधानसभा, चार बार लोकसभा और एक बार जिला परिषद सदस्य का चुनाव शामिल बताया जाता है। हालांकि, हर बार नतीजा उनके पक्ष में नहीं आया। कुछ चुनावों में उनकी पत्नी ने भी किस्मत आजमाई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इतनी हार के बाद आम आदमी शायद चुनावी राजनीति से दूरी बना ले, लेकिन पोपटलाल के लिए हर चुनाव एक नई शुरुआत है। उनकी उम्मीद अब भी कायम है कि कभी न कभी जनता उन्हें मौका जरूर देगी। उनका मानना है कि समाज के सभी वर्गों का समर्थन मिला तो जीत का सपना भी पूरा हो सकता है।
पांच साल बचत, फिर चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी
पोपटलाल का चुनाव लड़ने का शौक केवल चर्चा तक सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव के खर्च के लिए वे वर्षों तक थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाते हैं। चुनावी जुनून में उन्हें अपनी जमीन और पालतू जानवर तक बेचने पड़े। परिवार की आर्थिक स्थिति भी साधारण है। पत्नी और बेटा मेहनत-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते हैं। शुरुआत में परिवार के लोग उन्हें चुनाव लड़ने से रोकते थे, लेकिन बार-बार की कोशिशों के बाद अब उन्होंने भी मान लिया है कि पोपटलाल को चुनावी मैदान से दूर रखना आसान नहीं है। प्रचार में भी वे बड़े काफिले या तामझाम के बजाय खुद लोगों तक पहुंचने पर भरोसा करते हैं। कभी बस से तो कभी पैदल ही मतदाताओं के बीच पहुंचकर समर्थन मांगते हैं।
हरीश चौधरी की चुटकी ने फिर दिलाई चर्चा
14 अक्टूबर को कांग्रेस की पंचायत चुनाव रणनीति को लेकर हुई बैठक में हरीश चौधरी ने पोपटलाल का जिक्र करते हुए उनके चुनाव लड़ने की आदत पर चुटकी ली। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के सिर पर चुनाव लड़ने की धुन सवार हो जाए, उसका क्या किया जा सकता है। चौधरी ने पोपटलाल के पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि वे कई नेताओं के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। उनका आशय था कि जब किसी व्यक्ति ने चुनाव लड़ने की ठान ही ली हो, तो उसे रोकना आसान नहीं होता। इस टिप्पणी के बाद पोपटलाल की कहानी फिर चर्चा में आ गई। कोई उनके जुनून को जिद मान रहा है तो कोई इसे लोकतंत्र में भागीदारी की मिसाल बता रहा है।
अब कांग्रेस से टिकट की आस, 15वीं बार क्या होगा कमाल?
पोपटलाल की चुनावी कहानी में अब नया मोड़ आने की बात सामने आई है। खबर के मुताबिक, वे इस बार कांग्रेस से टिकट मांगने पहुंचे हैं। यानी अब तक चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने वाले पोपटलाल की नजर पार्टी के टिकट पर भी है।

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