धनतेरस पर परंपरा और कारोबार का संगम, लक्ष्मी पूजन के साथ होगी बही खातों की पूजा
नए वित्त वर्ष में शुरू होगा लेन-देन का हिसाब
जयपुर। डिजिटल भुगतान और कंप्यूटर पर कारोबार का हिसाब-किताब रखने के दौर में भी व्यापारियों के बीच लाल बही खाते की परंपरा कायम है। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के साथ नई बही शुरू करने का रिवाज आज भी बाजारों में अपनी खास जगह बनाए हुए है। धनतेरस के शुभ मुहूर्त पर जयपुर के बाजारों में लाल बही खाते खरीदने के लिए व्यापारियों की रौनक नजर आ रही है। कहीं थोक व्यापारी अपने सालभर के लेन-देन का हिसाब रखने के लिए बही खरीद रहे हैं, तो कहीं पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए नए बही खाते घर और प्रतिष्ठान तक पहुंचाए जा रहे हैं।
हवामहल बाजार स्थित गुलाब चंद देवी लाल के अक्षय अग्रवाल ने बताया कि लाल बही खाते की सबसे ज्यादा खरीदारी मंडी के व्यापारी करते हैं। फल-सब्जियों के थोक विक्रेता और मंडी कारोबारी बही खाते खरीदने के बाद मंडी एसोसिएशन भवन से उन पर मुहर लगवाते हैं। इसके बाद इनमें कारोबार के लेन-देन की एंट्री दर्ज की जाती है।

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