NPS में बड़ा बदलाव: अब एक मंच पर दिखेंगी सभी पेंशन योजनाएं, निवेशकों को मिलेगा तुलना का मौका

योजना के नाम के साथ वृद्धि श्रेणी दर्शाना अनिवार्य

NPS में बड़ा बदलाव: अब एक मंच पर दिखेंगी सभी पेंशन योजनाएं, निवेशकों को मिलेगा तुलना का मौका
पेंशन नियामक पीएफआरडीए ने एनपीएस योजनाओं के नामकरण, प्रदर्शन और प्रचार के संशोधित नियम 1 दिसंबर तक लागू करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और अंशधारकों को तुलना के स्पष्ट विकल्प देना है। अब पीओपी और सीआरए प्लेटफॉर्म्स पर चुनी गई श्रेणी के तहत सभी फंडों की योजनाएं दिखानी होंगी।

नई दिल्ली। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने पेंशन कोष और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से जुड़े अन्य मध्यस्थों को निवेश योजनाओं के नामकरण, प्रदर्शन और प्रचार के संशोधित नियम एक दिसंबर तक लागू करने का निर्देश दिया है। इन नियमों का उद्देश्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी में अधिक पारदर्शिता लाना और अंशधारकों को निवेश के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है। पेंशन नियामक ने एक परिपत्र में अपने पहले के नियमों में संशोधन करते हुए निर्देश दिया है कि उपस्थिति बिंदु (पीओपी) मंचों पर खाताधारक की ओर से चुनी गई श्रेणी के तहत सभी पेंशन फंडों की योजनाएं दिखाई जाएं।

परिपत्र में कहा गया है, अपना मंच संचालित करने वाले किसी भी अन्य पीओपी को खाताधारक की ओर से चुनी गई श्रेणी के तहत सभी पेंशन फंडों की योजनाएं दिखानी होंगी। नियामक ने ऐसे मंचों को किसी विशेष पेंशन कोष की योजनाओं को सूची में सबसे ऊपर रखने या किसी योजना को पहले से चयनित दिखाने की अनुमति दी है। हालांकि, इसके साथ ही चुनी गई श्रेणी के तहत अन्य सभी पेंशन फंडों की योजनाएं भी प्रदर्शित करनी होंगी। हालांकि, अपने लाइसेंस प्राप्त पीओपी मंच संचालित करने वाले पेंशन कोष केवल अपनी योजनाएं दिखा सकते हैं, बशर्ते खाताधारक विशेष रूप से उनकी वेबसाइट या मोबाइल एप्लिकेशन का चयन करे और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया का संचालन संबंधित पेंशन फंड की ओर से किया जाए।

बहु योजना ढांचा (एमएसएफ) की योजनाओं के नामकरण के संशोधित नियमों के तहत पेंशन कोषों को अपने संक्षिप्त नाम, साझा पहचान चिह्न 'एनपीएस' और योजना के विशिष्ट नाम का इस्तेमाल करना होगा। श्रेणी कोड ए से ई तक योजना के नाम का हिस्सा नहीं होंगे, जबकि टियर-दो की योजनाओं के नाम के साथ 'टियर 2' लिखना अनिवार्य होगा। नियामक ने यह भी अनिवार्य किया है कि विज्ञापनों और आम लोगों के लिए जारी अन्य सामग्री में योजना के नाम के ठीक नीचे या उसके बगल में संबंधित योजना या वृद्धि श्रेणी का उल्लेख किया जाए। योजना विवरणिका और एनपीएस योजना की आवश्यक जानकारी वाले दस्तावेजों में भी इस श्रेणी को स्पष्ट रूप से बताना होगा।

पीएफआरडीए ने कहा कि एनपीएस सेंट्रल और केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (सीआरए) के मंचों पर भी खाताधारकों की ओर से चुनी गयी श्रेणियों के तहत सभी पेंशन कोषों की योजनाएं दिखाई जानी चाहिए। इससे खाताधारक अंतिम निर्णय लेने से पहले उपलब्ध निवेश विकल्पों की तुलना कर सकेंगे। नियामक ने सीआरए, पेंशन कोषों और पीओपी को एक दिसंबर तक योजनाओं के नाम, विवरणिका, विज्ञापनों, वेबसाइटों, मोबाइल एप्लिकेशन और खाताधारकों के पंजीकरण से जुड़ी प्रणालियों में आवश्यक बदलाव पूरे करने का निर्देश दिया है। ये प्रावधान एनपीएस योजनाओं के वर्गीकरण और प्रस्तुतीकरण के लिए बनाए गए नियामक के मानकीकृत ढांचे का हिस्सा हैं। हालांकि, ये नियम सरकारी क्षेत्र के रूप में चिह्नित खातों पर लागू नहीं होंगे।

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