राजस्थान ने पार की 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता, 44.13 गीगावाट सौर क्षमता के साथ देश के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का प्रमुख केंद्र बना राजस्थान

सौर ऊर्जा बनी राजस्थान की सबसे बड़ी ताकत

राजस्थान ने पार की 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता, 44.13 गीगावाट सौर क्षमता के साथ देश के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का प्रमुख केंद्र बना राजस्थान
राजस्थान ने 50.33 गीगावाट स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया। 44.13 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता शामिल। राजस्थान सोलर एसोसिएशन ने इसे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताया।

जयपुर। राजस्थान ने देश की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 50.33 गीगावाट यानी 50,335 मेगावाट स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। 44.13 गीगावाट यानी 44,135 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता शामिल है। इस उपलब्धि के साथ राजस्थान देश के अग्रणी अक्षय ऊर्जा राज्यों में और मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।

राजस्थान सोलर एसोसिएशन ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि 50 गीगावाट का आंकड़ा राज्य की विशाल अक्षय ऊर्जा क्षमता, अनुकूल नीतियों, बढ़ते निवेश, उद्योगों की भागीदारी और तेजी से विकसित हो रहे अक्षय ऊर्जा तंत्र का परिणाम है।

देश की 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता में राजस्थान की बड़ी भूमिका :

राजस्थान की यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत ने भी 31 जुलाई 2026 तक 300.50 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। यह वर्ष 2030 तक निर्धारित 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक है।

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता में 164.59 गीगावाट सौर, 58.14 गीगावाट पवन, 57.24 गीगावाट बड़ी एवं छोटी जलविद्युत, 11.75 गीगावाट जैव ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा शामिल है। देश की कुल करीब 552 गीगावाट स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी अब 54 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

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वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी। इसमें 44.6 गीगावाट सौर और करीब 6 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का योगदान रहा। देश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन भी वर्ष 2014-15 के 190.96 अरब इकाई से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 477.79 अरब इकाई हो गया है।

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सौर ऊर्जा बनी राजस्थान की सबसे बड़ी ताकत :

राजस्थान की 50.33 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता में सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। 44.13 गीगावाट सौर क्षमता के साथ राज्य देश में सौर ऊर्जा विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। राजस्थान की यह क्षमता देश की बढ़ती सौर ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

राजस्थान सोलर एसोसिएशन के अनुसार अब राज्य का ध्यान केवल नई ऊर्जा क्षमता स्थापित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ऊर्जा भंडारण, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, मिश्रित अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं, हरित हाइड्रोजन, पारेषण एवं ग्रिड एकीकरण, अक्षय ऊर्जा उपकरण निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऊर्जा प्रबंधन तथा कुशल मानव संसाधन के विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

50 गीगावाट पार करना राजस्थान के नेतृत्व की मजबूत घोषणा : अग्रवाल

राजस्थान सोलर एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिन अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान का 50 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा पार करना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में राजस्थान के नेतृत्व की मजबूत घोषणा है। देश का 300.50 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तक पहुंचना और राजस्थान का 50.33 गीगावाट पार करना बताता है कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब लक्ष्य भर नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुका है।

उन्होंने कहा कि 44 गीगावाट से अधिक सौर क्षमता के साथ राजस्थान भारत की स्वच्छ ऊर्जा वृद्धि का प्रमुख आधार बन गया है। अब अगले चरण में अक्षय ऊर्जा को ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, मिश्रित ऊर्जा परियोजनाओं, पारेषण, विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कौशल विकास से जोड़कर एक एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा तंत्र तैयार करने की आवश्यकता है। इससे राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने के साथ निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।

50 गीगावाट के बाद अब नई ऊर्जा यात्रा :

राजस्थान सोलर एसोसिएशन का मानना है कि 50 गीगावाट की उपलब्धि अक्षय ऊर्जा यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नए चरण की शुरुआत है। राज्य की विशाल सौर क्षमता और मजबूत अक्षय ऊर्जा तंत्र को ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, विनिर्माण और आधुनिक विद्युत ग्रिड ढांचे से जोड़कर राजस्थान को देश के प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा एवं हरित अर्थव्यवस्था केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

राजस्थान सोलर एसोसिएशन के अनुसार- “50 गीगावाट एक पड़ाव है, स्वच्छ ऊर्जा में नेतृत्व हमारा लक्ष्य है।राजस्थान की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर ऊर्जा तंत्र, ऊर्जा सुरक्षा और हरित आर्थिक विकास की दिशा में राज्य की भूमिका को और मजबूत करती है। 

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