आरआईसी में सजी कला-प्रदर्शनी में कला-प्रेमियों के बीच दुर्लभ कृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र, 35 कलाकारों की 50 कलाकृतियां एक मंच पर
कुल पैंतीस कलाकारों में से सत्रह राजस्थान के
जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में चल रही कला-प्रदर्शनी के छठे दिन भी दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ। यहां देश के जाने-माने कलाकारों की लगभग पचास कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें साठ, सत्तर और अस्सी के दशक की दुर्लभ रचनाएं भी शामिल हैं। कुल पैंतीस कलाकारों में से सत्रह राजस्थान के हैं। प्रदर्शनी में पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत और उनके शिष्य समन्दर सिंह खंगारोत ‘सागर’ की कृतियां विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। शेखावत की चर्चित कृति ‘रागिनी विभास’ में राधा-कृष्ण को प्रकृति के बीच बेहद बारीकी से चित्रित किया गया है। छठे दिन भी दर्शक इस रचना के सामने रुककर उसकी सूक्ष्मता को निहारते नजर आए। प्रदर्शनी में एक और बड़ा आकर्षण रहा प्रसिद्ध संगीतकार डॉ. अश्विन एम. दलवी का इंस्टॉलेशन, जिसमें पचपन पारंपरिक वेणु बांसुरियों से स्वस्थ हृदय की धड़कन का आकार गढ़ा गया है। यह अनूठी कृति बीस सितंबर तक देखी जा सकेगी। युवा कलाकार डॉ. चन्द्रशेखर सेन की टेराकोटा में बनी रिलीफ शिल्प कृतियां भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं, जिनमें मानवीय भावों को मिट्टी की सतह पर उकेरा गया है।
क्यूरेटर निखत अंसारी के अनुसार, यह प्रदर्शनी दर्शकों को कला देखने के साथ-साथ समझने और अनुभव करने का अवसर देती है। दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से भी कला-प्रेमी और संग्रहकर्ता यहां पहुंच रहे हैं। ऐसी दुर्लभ कृतियां भविष्य में मिलना आसान नहीं, इसलिए यह अवसर खास माना जा रहा है।

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