रेरा में देरी पडेगी भारी, प्रमोटर्स को हर दिन एक हजार रुपए का देना होगा जुर्माना, प्लॉटेड डवलपमेंट के डवलपर्स को 30 जून तक पंजीकरण में राहत
रहन मुक्त पत्र में देरी पर जुर्माना
रेरा में अब हर तिमाही की प्रोजेक्ट प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं देने वाले प्रमोटर्स को हर हर तिमाही पांच हजार रुपए जुर्माना देना होगा।
जयपुर। रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी ने रियल एस्टेट प्रमोटर्स के लिए सख्त नियम और जुर्माने की नई व्यवस्था लागू कर दी है। साथ ही रजिस्ट्रेशन और औद्योगिक योजनाओं पर राहत के फैसले से संतुलन बनाए रखा है। औद्योगिक योजनाओं की स्टैंडर्ड फीस 10 रुपए के बजाए 5 रुपए प्रति वर्ग मीटर लगेगी। स्टैंडर्ड फीस इस वर्ष एक मार्च से लागू होगी। रेरा अथॉरिटी की हाल ही हुई बैठक में ये फैसले लिए गए हैं। ये निर्णय एक मार्च से लागू होंगे।
रहन मुक्त पत्र में देरी पर जुर्माना
प्रमोटर्स को पूर्णता प्रमाण पत्र, अधिवास प्रमाण पत्र और रहन मुक्त पत्र सबमिट करने में देरी पर जुर्माना देना होगा। ये जुर्माना प्रति दिन एक हजार रुपए का देना होगा। यह प्रावधान इसी साल एक मार्च से लागू होगा। रेरा के नियमों के अनुसार संबंधित निकाय से जारी होने के 45 दिन में सबमिट करना जरुरी है। पूर्णता प्रमाण पत्र, अधिवास प्रमाण पत्र व रहन मुक्त पत्र सबमिट करना जरुरी है, लेकिन कई प्रमोटर इस नियम की पालना नहीं कर रहे हैं। अब तक किसी प्रकार के जुर्माने का प्रावधान नहीं था।
अधूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया वाले प्रोजेक्ट्स को राहत
अथॉरिटी ने प्लॉटेड डवलपमेंट से जुड़े ऐसे प्रमोटर्स को राहत दी है, जिन्होंने अपने प्रोजेक्ट रेरा पंजीकृत नहीं कराए थे और उनका प्रोजेक्ट भी पूरा हो चुका है। अब सरकार की सख्ती के चलते ऐसे प्रमोटर्स प्रोजेक्ट पंजीकरण के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन ले-आउट प्लान की वैद्यता खत्म होने के चलते प्रोजेक्ट पंजीकरण संभव नहीं हो रहा। ऐसे मामलों में रेरा ने इस वर्ष 30 जून 2025 तक की राहत दी है। 30 जून तक आवेदन करने पर रेरा में पंजीकरण कराया जा सकेगा। इसके साथ ही ले-आउट प्लान की वैधता खत्म होने पर भी पंजीकरण कराया जा सकेगा।
क्यूपीआर नहीं देने पर पांच हजार की पेनल्टी
रेरा में अब हर तिमाही की प्रोजेक्ट प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं देने वाले प्रमोटर्स को हर हर तिमाही पांच हजार रुपए जुर्माना देना होगा। ऐसे में अब अथॉरिटी के बजाय प्रमोटर्स को सक्रिय रहते हुए क्यूपीआर देनी होगी। अगर किसी प्रमोटर ने जनवरी-मार्च की क्यूपीआर उसी वर्ष के दिसंबर में जाकर सबमिट की तो तीनों तिमाही अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर व अक्टूबर-दिसंबर का जुर्माना देना होगा। प्रति तिमाही 5 हजार के हिसाब से तीन तिमाही के 15 हजार रुपए देने होंगे।
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