विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ा, लेकिन दाल-तेल और सब्जियों की महंगाई से परिवारों का रसोई-बजट अब भी संकट में

ई-केवाईसी अनिवार्य होने से बढ़ीं तकनीकी मुश्किलें

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ा, लेकिन दाल-तेल और सब्जियों की महंगाई से परिवारों का रसोई-बजट अब भी संकट में
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राजस्थान में 28.14 लाख नए लाभार्थी जुड़े हैं। प्राथमिकता परिवारों को 5 किलो और अंत्योदय को 35 किलो गेहूं मिल रहा है। हालांकि, अनिवार्य ई-केवाईसी और तकनीकी खामियों के कारण राशन रुकने का संकट है, जिसे सुधारने और गेहूं के साथ दाल-तेल देने की मांग उठ रही है।

जयपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता श्रेणी के प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। इस हिसाब से पांच सदस्यों के परिवार को 25 किलोग्राम गेहूं उपलब्ध होता है। अंत्योदय परिवार को प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न का अधिकार है। यह राहत महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल गेहूं को संपूर्ण खाद्य सुरक्षा नहीं माना जा सकता। दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान, घरेलू कामगार, विधवा, वृद्ध, दिव्यांग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक की आय अनिश्चित है, जबकि भोजन से जुड़े बाकी खर्च लगातार उसकी जेब पर दबाव डालते हैं।

नाम जुड़ना राहत, कटना पूरे परिवार का संकट

राज्य सरकार के अनुसार, 26 जनवरी 2025 से एनएफएसए पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28 लाख से अधिक नए नाम योजना में जोड़े गए। यह बड़ी राहत है, लेकिन अब ई-केवाईसी अनिवार्य होने से बुजुर्गों, मजदूरी के लिए बाहर गए प्रवासियों, आदिवासी परिवारों और खराब इंटरनेट वाले ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

तकनीकी खामी अपात्रता का प्रमाण नहीं

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अंगुलियों के निशान नहीं मिलने, आधार और जनाधार में नाम अलग होने, मोबाइल नंबर बंद होने या सर्वर खराब होने जैसी तकनीकी समस्याओं को अपात्रता का प्रमाण नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी परिवार का राशन रोकने या नाम हटाने से पहले भौतिक सत्यापन, लिखित सूचना और अपील का पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है।

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खाद्य विभाग को प्रत्येक उचित मूल्य दुकान का मासिक स्टॉक, वितरण और शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। घटतौली, दुकान बंद मिलने या राशन से वंचित होने की शिकायत का निस्तारण अधिकतम 72 घंटे में हो। वृद्ध और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए घर तक राशन पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ गोदाम से अनाज निकालना नहीं, बल्कि नागरिक की थाली में सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना है। सरकार को गेहूं के साथ दाल, खाद्य तेल और नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं की सहायता पर भी विचार करना चाहिए। व्यवस्था की सफलता लाभार्थियों की संख्या से नहीं, इस तथ्य से मापी जाएगी कि राजस्थान में कोई परिवार भूखा सोने को मजबूर न हो।

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्राथमिकता परिवारों के लिए प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम और अंत्योदय परिवारों के लिए प्रति परिवार 35 किलोग्राम मासिक खाद्यान्न का प्रावधान है। राजस्थान सरकार के अनुसार, पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28,14,942 नए नाम जोड़े गए और नए लाभार्थियों के लिए तीन महीने में ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया। फरवरी 2026 में ई-केवाईसी और सूची से नाम हटने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी उठा था।

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