विश्वेंद्र सिंह के बयान से सियासी गलियारों में फिर से एक नई चर्चा का दौर शुरू, विधानसभा में पर्यटन मंत्री ने कहा मैं एक साल से था छुट्टी पर
विधानसभा में शुक्रवार को महाराणा प्रताप से संबंधित स्थलों के विकास पर पिछले 3 साल में एक भी पैसा खर्च नहीं होने का मामला उठा तो पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सदन में बड़ा बयान दिया।
जयपुर। विधानसभा में शुक्रवार को महाराणा प्रताप से संबंधित स्थलों के विकास पर पिछले 3 साल में एक भी पैसा खर्च नहीं होने का मामला उठा तो पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सदन में बड़ा बयान देकर प्रदेश की राजनीति में फिर से एक नई हलचल शुरू कर दी है। नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि सरकार के तीन साल में एक नया पैसा खर्च नहीं हुआ, यह विभाग कैसे चल रहा? जवाब में पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह बोले मैं एक साल की छुट्टी पर था, उस दौरान यह विभाग मुख्यमंत्री जी के अधीन था, अब मैं वापस आ गया हूं अब देखता हूं क्या कर सकते हैं।
दरअसल, विधायक धर्म नारायण जोशी ने प्रश्नकाल में महाराणा प्रताप से संबंधित स्थलों के विकास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की जन्मस्थली पर बनी समाधि निजी खातेदारी भूमि पर है, तीन साल में इस पर एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया, कुंभलगढ़ के आसपास भी अतिक्रमण है। सवाल पर हस्तक्षेप करते हुए नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने भी पिछले कुछ समय में संरक्षण कार्यो पर कोई पैसा खर्च नहीं करने का मामला उठाया। जवाब में विश्वेन्द्र सिंह ने कहा मैं एक वर्ष की छुट्टी पर था मंत्री पद से, तब मेरा विभाग मुख्यमंत्री गहलोत के अंडर में था। अब मैं फिर से काम पर लौट आया हूं अब काम में तेजी आएगी। यह बयान सुनकर सदन में तेज हंसी फूटी।
सवाल का मंत्री ने यह दिया जवाब
उदयपुर एवं राजसमन्द जिले में महाराणा प्रताप से संबंधित कुम्भलगढ़, गोगुन्दा, दिवेर मायरा की गुफा, छापली, चावण्ड, हल्दीघाटी आदि स्थल स्थित है। इन स्थलों के विकास के लिए विगत पांच वर्षों में मेवाड़ कॉम्लेक्स फेज ॥ के अन्तर्गत हल्दीघाटी में 4.03 करोड़, गोगुन्दा में 1.34 करोड़, छापली में 46 लाख, चावण्ड में 69 लाख, दिवेर में 1.39 करोड़ के विकास कार्य करवाए गए हैं। बजट 2021-22 में उदयपुर में पर्यटकों की सुविधा एवं आकर्षण के लिए फतेहसागर में स्थित नेहरू पार्क, रानी-रोड तथा मायरा की गुफा (महाराणा प्रताप शस्त्रागार), गोगुन्दा के जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण के कार्यों पर 19 करोड़ खर्च किए जाएंगे। जिसके अन्तर्गत मायरा की गुफा के विकास के लिए 5.40 करोड़ के प्रस्ताव अनुमोदन के लिए प्रक्रियाधीन है। विभाग की बी.एफ.सी. वित्तीय वर्ष 2021-22 में मेवाड़ कॉम्पलेक्स उदयपुर/ राजसमंद, फेज-3 प्रोजेक्ट अन्तर्गत 2 करोड़ का प्रोजेक्ट प्रावधित किया गया है । विभाग की ओर से मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजनान्तर्गत निर्मित परिसम्पत्तियों (चावण्ड, गोगुन्दा, दिवेर, छापली एवं हल्दीघाटी) का संचालन एवं रख-रखाव उपखण्ड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित उपखण्ड स्तरीय पर्यटन विकास समिति वर्ष 2017 से गठित है, जो कार्य करती है। स्थलवार भी गठित उपखण्ड स्तरीय समितियों का गठन किया गया है। जिला कलक्टर, राजसमन्द एवं उदयपुर से रिपोर्ट प्राप्त कर ली गई है। प्राप्त सूचना अनुसार महाराणा प्रताप से जुड़े उक्त स्थलों पर वर्तमान में किसी प्रकार का अवैध नहीं है।

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