वर्ल्ड ब्रेन स्ट्रोक डे : प्रदेश में ब्रेन स्ट्रोक के हर साल 6 से 7 हजार नए मामले, 700 से 900 मौतें
खराब कोलेस्ट्रॉल से दिमाग की नसों में ब्लॉकेज का जोखिम
जयपुर। राजस्थान में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदेश में हर साल करीब 6 से 7 हजार नए मरीज सामने आने और 700 से 900 लोगों की मौत होने का अनुमान है। स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के साथ कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन शामिल है। खून में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल बढ़ने से मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट पैदा हो सकती है। इससे दिमाग के हिस्से तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने पर इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है।
लिपिड प्रोफाइल को नजर अंदाज करना नुकसानदेह :
सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुरेश गुप्ता ने बताया कि लिपिड प्रोफाइल में गड़बड़ी को नजरअंदाज करना गंभीर पड़ सकता है। एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर और गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल का कम होना रक्त वाहिकाओं में फैट जमा होने की आशंका बढ़ाता है। लंबे समय तक असंतुलित खानपान, मोटापा, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी इस समस्या को बढ़ा सकती है।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों पर नजर जरूरी :
डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्ट्रोक के हर मरीज में कारण एक जैसा नहीं होता। इस्केमिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की नस में थक्का या ब्लॉकेज के कारण रक्त प्रवाह रुक जाता है जबकि हेमोरेजिक स्ट्रोक में रक्त वाहिका फटने से मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है। कोलेस्ट्रॉल असंतुलन मुख्य रूप से धमनियों में रुकावट से जुड़े जोखिम को बढ़ाता हैए जबकि अनियंत्रित उच्च रक्तचाप रक्तस्राव वाले स्ट्रोक का भी प्रमुख जोखिम कारक है।
ये हैं स्ट्रोक के लक्षण :
अचानक चेहरा टेढ़ा होना
हाथ-पैर में कमजोरी आना या बोलने और समझने में परेशानी होना
बचाव :
लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें
कुछ मरीजों में लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर थक्का घोलने वाली दवा से उपचार किया जा सकता है।
उपचार का फैसला स्ट्रोक के प्रकार और मरीज की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण से स्ट्रोक का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

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