वर्ल्ड हार्ट डे : युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी
अब हार्ट अटैक को केवल बुजुर्गों की बीमारी मानना सही नहीं
जयपुर। वर्ल्ड हार्ट डे के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में हृदय स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर-कार्डियोलॉजी डॉ. अमित कुमार सिंघल ने कहा कि अब हार्ट अटैक को केवल बुजुर्गों की बीमारी मानना सही नहीं है। 30-40 वर्ष की उम्र के फिट और सक्रिय दिखने वाले लोग भी हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जैसी समस्याएं लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं। केवल पतली कमर या नियमित जिम जाने से हृदय स्वस्थ होने की पुष्टि नहीं होती। शहरी जीवनशैली, लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव, अनियमित नींद, अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन तथा तंबाकू हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
डॉ. सिंघल ने कहा कि सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, मतली, चक्कर या दर्द का हाथ, जबड़े, पीठ अथवा गर्दन तक फैलना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। इन्हें गैस या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने लोगों से नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने तथा पारिवारिक हृदय रोग के इतिहास को गंभीरता से लेने की अपील की।

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