प्रदेश के हाईवे से दो माह में हटाओ अतिक्रमण: हाईकोर्ट
कहा: राजमार्गों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में मौजूद मंदिर, मजार, मकान या दुकान अवैध मानी जाएगी
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने हिम्मत सिंह गहलोत की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को नागरिकों के जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए राज्यभर के नेशनल और स्टेट हाईवे से करीब दो हजार अतिक्रमण दो माह में हटाने के सख्त आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि राजमार्गों के राइट आफ वे क्षेत्र में मौजूद किसी भी प्रकार की संरचना चाहे वह मंदिर, मजार हो, मकान हो या दुकान कानूनन अवैध मानी जाएगी और उसे नियमित नहीं किया जा सकता। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने हिम्मत सिंह गहलोत की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। मामला एक धर्मकांटे (वजन कांटा) के हाईवे की प्रतिबंधित सीमा में संचालित होने से जुड़ा था, जिसके निकट हाल ही में एक सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सेंटरलाइन से 40-40 मीटर तक भवन रेखा तथा 75-75 मीटर तक नियंत्रण रेखा लागू होती है। रोड लैंड बाउंड्री का उल्लंघन सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा को प्रभावित करता है और ऐसे अतिक्रमण हादसों को बढ़ावा देते हैं।
कोर्ट में पेश किए गए आंकड़े
सुनवाई के दौरान पेश आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों की आरओडब्ल्यू में 103 धार्मिक संरचनाएं, 881 आवासीय निर्माण और 1,232 व्यावसायिक अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया कि सार्वजनिक मार्गों पर बने धार्मिक अतिक्रमण भी हटाए जा सकते हैं।
सात दिन में जिला स्तरीय टास्कफोर्स गठन के निर्देश
अदालत ने आदेश दिया कि सात दिनों के भीतर प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स का गठन किया जाए। इस टास्क फोर्स में जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और स्थानीय निकायों के अधिकारी शामिल होंगे, जो संयुक्त रूप से अतिक्रमण की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

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