आनंदपाल एनकाउंटर मामले में पुलिस अधिकारियों को राहत, डीजे जोधपुर महानगर ने हत्या का मुकदमा चलाने का एसीजेएम का आदेश किया निरस्त

मामला चुरू जिले के मालासर गांव में मुठभेड़ से जुड़ा

आनंदपाल एनकाउंटर मामले में पुलिस अधिकारियों को राहत, डीजे जोधपुर महानगर ने हत्या का मुकदमा चलाने का एसीजेएम का आदेश किया निरस्त

जिला एवं सत्र न्यायाधीश जोधपुर महानगर अजय शर्मा ने बहुचर्चित गैंगस्टर आनंदपाल सिंह एनकाउंटर केस में पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए एसीजेएम, जोधपुर महानगर की ओर से पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। जिसमें एनकाउंटर करने वाले 7 पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाने का निर्देश दिया गया था

जोधपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जोधपुर महानगर अजय शर्मा ने बहुचर्चित गैंगस्टर आनंदपाल सिंह एनकाउंटर केस में पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए एसीजेएम (सीबीआई प्रकरण), जोधपुर महानगर की ओर से पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। जिसमें एनकाउंटर करने वाले 7 पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले से तत्कालीन चूरू एसपी राहुल बारहठ समेत सभी पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। आपराधिक पुनरीक्षण याचिका तत्कालीन एस.पी. चुरू राहुल बारहठ, तत्कालीन सीओ कुचामन सिटी विद्या प्रकाश, तत्कालीन इंस्पेक्टर एसओजी सूर्यवीर सिंह राठौड़ सहित अन्य पुलिसकर्मियों की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने 24 जुलाई 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एसीजेएम (सीबीआई प्रकरण) ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए धारा 147, 148, 302, 326, 325, 324 सहपठित धारा 149 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अभियोजन स्वीकृति के बिना संज्ञान लिया था। 

मामला चुरू जिले के मालासर गांव में मुठभेड़ से जुड़ा
 मामला 25 जून 2017 को चुरू जिले के मालासर गांव में हुई उस मुठभेड़ से जुड़ा है जिसमें गैंगस्टर आनंदपाल सिंह की मृत्यु हुई थी। एफआईआर के अनुसार, पुलिस टीम जब उसे गिरफ्तार करने पहुंची तो आनंदपाल ने अपनी एके-47 राइफल से गोलियां चलाकर पुलिस पर हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की। इस दौरान आनंदपाल ढेर हो गया। राजस्थान सरकार ने बाद में इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद मुठभेड़ को वास्तविक मान क्लोजर रिपोर्ट पेश की। लेकिन मृतक की पत्नी राज कंवर ने इसका विरोध करते प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर आरोप लगाया कि आनंदपाल ने आत्मसमर्पण किया था तथा बाद में पुलिस ने उसे गोली मारी। एसीजेएम ने उक्त प्रोटेस्ट पिटीशन स्वीकार कर सीबीआई की रिपोर्ट को अस्वीकार किया और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध संज्ञान लिया और 24 जुलाई 2024 हत्या का मुकदमा चलाने का आदेश जारी किया गया था। 

आत्मरक्षा में कार्रवाई अपराध नहीं माना जा सकता
याचिकाकताओंकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत जैन, राहुल चौधरी और उमेशकांत व्यास ने तर्क दिया कि सीबीआई की जांच स्वतंत्र, निष्पक्ष और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित थी। फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट था कि 32 गोलियां आनंदपाल की एके-47 राइफल से चलीं, और कमांडो सोहन सिंह की पीठ में लगी गोली भी आनंदपाल की राइफल से चली थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद डीजे जोधपुर महानगर कोर्ट ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से फायरिंग हुई थी और पुलिसकर्मी सोहन सिंह को लगी गोली आनंदपाल की एके-47 से चली थी। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि गवाह रूपेंद्र पाल की गवाही, जो घटना के छह वर्ष बाद पहली बार सामने आई, विरोधाभासी और अविश्वसनीय है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने माना कि आनंदपाल सिंह द्वारा निरंतर फायरिंग की जा रही थी। ऐसी स्थिति में आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई को अपराध नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने निष्कर्ष दिया कि एसीजेएम की ओर से पारित आदेश कानूनी रूप से अस्थिर एवं तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है, अत: उसे निरस्त किया जाता है। 

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