राखी से पहले 'चटकी मटकी' बताएगी बारिश का हाल

हल पूजन, हवन और मल्ल युद्ध के साथ होगा आयोजन; अनुष्ठान पूरा होने के बाद ही मनाया जाएगा रक्षाबंधन

राखी से पहले 'चटकी मटकी' बताएगी बारिश का हाल
नान्ता के जेठी समाज में सदियों पुरानी 'हरिया महोत्सव' परंपरा, मटकी फूटने के आधार पर लगाया जाता है वर्षा का पारंपरिक अनुमान।

कोटा। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पूर्व गुरूवार काे शहर के नान्ता इलाके का जेठी समाज अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक व धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए 'हरिया महोत्सव' हर्षोल्लास के साथ मनाएगा। राजा-महाराजाओं के समय से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा का मुख्य ध्येय आने वाले वर्ष में वर्षा, कृषि उत्पादन और प्राकृतिक परिस्थितियों का पारंपरिक ज्ञान व मान्यता के आधार पर आकलन करना है। इसके पूर्व सुबह से ही समाज के लोग अखाडे में माता की आरती करते है। दिन भर सांस्कृति आयोजनों के बाद शाम साढे 5 बजे के बाद यह रस्म निभाई जाती है।

हल स्थापना, 4 मटकियों का नामांकरण एवं 5 परिक्रमा की रस्म
हरिया महोत्सव में वर्षा के पूर्वानुमान की यह प्रक्रिया अत्यंत सांस्कृतिक आस्था से परिपूर्ण है। सबसे पहले मिट्टी के चौक को लीपकर लकड़ी के हल को 4-6 अंगुली जितना गाड़ा जाता है। तत्पश्चात विधि-विधान से हल का पूजन और हवन संपन्न होता है।


चार मटकियाँ व 4 गोत्रों के प्रतिनिधि करते है परिक्रमा
जल से भरी चार छोटी मटकियों पर क्रमशः आषाढ़, सावन, भादवा और अशोज अंकित किया जाता है। पूजा-हवन के बाद समाज के संतुलन व सामूहिक भागीदारी को दर्शाते हुए चार प्रमुख गोत्रों के 4 वरिष्ठ प्रतिनिधि इन मटकियों को अपने हाथों में उठाते हैं। ये चारों गोत्र प्रतिनिधि जल से भरी मटकियों को लेकर स्थापित हल की विधि-विधान से 5 परिक्रमा करते हैं।

खूंटे पर मटकी चटकने से बिखरे जल से होता है वर्षा का पारंपरिक आकलन
जेठी समाज के मुखिया प्रतिनिधी साेहन जेठी ने बताया कि परिक्रमा पूरी होने के बाद मटकी का मुंह नीचे (उल्टा) करके उसे स्थापित हल के ऊपरी हिस्से यानी खूंटे पर पटका/फोड़ा जाता है। यदि हल के खूंटे से टकराकर मटकी पूरी तरह चटक कर बिखर जाती है और जल चारों तरफ फैलता है, तो उस संबंधित महीने में मूसलाधार और बेहतरीन बारिश का संकेत माना जाता है। इसके विपरीत, यदि मटकी नहीं फूटती तो उस माह में सूखा या कम बारिश की संभावना मानी जाती है।

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शौर्य का प्रतीक 'मल्ल युद्ध' व महाआरती दिन भर कार्यक्रम
समाज के वरिष्ठ त्रिलोक जेठी ने बताया कि अनुष्ठान के तुरंत बाद उसी पवित्र स्थल पर जेठी समाज की पारंपरिक कुश्ती (मल्ल युद्ध) का आयोजन किया जाता है, जो युवाओं में शौर्य, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का प्रतीक है। शाम को कुश्ती समाप्त होने के बाद माता जी की महाआरती की जाएगी और महाप्रसाद का वितरण होगा। इस अनिवार्य परंपरा और पूजा-विधान के संपन्न होने के बाद ही अगले दिन समाजजन रक्षाबंधन का पर्व मनाएंगे।

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यह परम्परा राखी से पूर्व निभाई जाती है जिसमें पूरे समाज की महिलाएं पुरूष व बच्चों के लिए कार्यक्रमों का आयोजन होता है। यह परम्परा के निर्वाह के अलावा समाज को बांधे रखने का भी महत्वपूर्ण कार्य करते है।
-सोहन जेठी, मुखिया जेठी समाज नान्ता

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