शहर के 1 लाख एसी प्रतिदिन छोड़ रहे 45 लाख किलोवाट हीट, खोखली हो रही ओजोन

100 दिन में 45 करोड़ किलोवाट हीट से तपता वायुमंडल

शहर के 1 लाख एसी प्रतिदिन छोड़ रहे 45 लाख किलोवाट हीट, खोखली हो रही ओजोन
एयर कंडीशनर्स से निकलती गैस बढ़ा रही शहर का तापमान।

कोटा। शहर इन दिनों भट्टी सा तप रहा है। आसमान से आग बरस रही है। चिलचिलाती धूप झुलसा रही है। टेम्प्रेचर भी 45 डिग्री पार कर चुका है। अचानक तापमान में वृद्धि और मौसम में बदलाव के पीछे कारण आमतौर पर हरियाली कम होना माना जाता है लेकिन इसका एक और बड़ा कारण है, जो एयरकंडीशनर्स हैं। शहर में बेलगाम चलते एसी अंदर से तो ठंडा कर रहा, बदले में बाहर गर्म हवा फेंक रहा। यह हीट प्रतिदिन लाखों-करोड़ों किलोवाट में वायुमंडल को झुलसा रही है, जो आप और हमारे लिए ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षियों-जानवरों व जैव विविधता के लिए भी धातक बन रही है। अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि एसी भला कैसे तापमान बढ़ा रहा, तो पढ़िए, विशेषज्ञों की रोशनी में नवज्योति की खास रिपोर्ट....

1.5 टन का एसी प्रति घंटे दे रहा 5.275 किलोवाट गर्मी : एक्सपर्ट के मुताबिक, घर, दुकान, ऑफिस, मॉल, होटल, सरकारी कार्यालयों में एक या इससे अधिक एसी होना सामान्य बात है। दिनभर में अमूमन 8 घंटे एसी चलता है। ऐसे में डेढ़ टन का एक एसी एक घंटे में 5.275 किलोवाट हीट छोड़ता है। जबकि, शहर में वर्तमान में 1 लाख से ज्यादा एसी चल रहे हैं। इस तरह एक लाख एसी  एक दिन में 45 लाख किलोवाट हीट वायुमंडल में छोड़ता है। इसी तरह गर्मी के पीक तीन महीने अप्रेल से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक के 100 दिनों की केल्कूलेशन करें तो एक लाख एसी 45 करोड़ किलोवाट हीट वातावरण में छोड़ता है। जिससे वातावरण में गर्मी सकुर्लेट होने से तापमान बढ़ जाता है।  

एसी से निकलती गैसें ओजोन को कर रही खोखली
गवर्नमेंट कॉलेज कोटा की बोटनी प्रोफेसर डॉ. नीरजा श्रीवास्तव बतातीं हैं, एसी चलने से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) गैस निकलती है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि वे समताप मंडल में जाकर सूर्य के पराबैंगनी विकिरण से टूट जाती हैं और क्लोरीन परमाणु मुक्त करते हैं, जो ओजोन अणुओं को नष्ट कर देते हैं। क्लोरीन परमाणु ओजोन (ड3) अणुओं के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और उन्हें ऑक्सीजन (ड2) में तोड़ देते हैं। इससे ओजोन अणु नष्ट हा जाते हैं। जिससे ओजोन परत कमजोर होती है। सर्वप्रथम 1974 में वैज्ञानिकों ने कहा था कि सीएफसी गैस ओजोन परत के क्षय के लिए जिम्मेदार हैं। जिसके बाद मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में प्रतिबंध लगाया गया था।

एसी की हीट ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार  
विशेषज्ञों के अनुसार, एयर कंडीशनर से निकलने वाली हीट ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में जिम्मेदार है। एसी कमरों को ठंडा करने के लिए गर्मी को बाहर निकालते हैं, जिससे बाहरी तापमान बढ़ता है। साथ ही एसी में रेफ्रिजरेंट गैस का उपयोग होता है, जो ग्रीनहाउस गैसों के रूप में कार्य करते हैं। हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसीएस) गैस कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में अधिक शक्तिशाली हैं।

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शहर में प्रतिदिन 400 से ज्यादा बिक रहे एसी
एक एयरकंडीशनर कम्पनी के राजस्थान सेल्स हैड पिंटू यादव ने बताया कि कोटा शहर में छोटे-बड़े 100 से ज्यादा आउटलेट्स हैं, जहां औसतन प्रतिदिन 400 से ज्यादा एयरकंडीशनर (एसी) बिकते हैं। वर्तमान में जो एसी आ रहे हैं, वो ईको प्रैंडली है। ड्यूट इनवटर होने से बिजली की खपत के साथ हीट का उत्सर्जन भी कम होता है। हालांकि, वाहनों के एसी ज्यादा जिम्मेदार हैं। क्योंकि, वाहन स्टार्ट होता है तो फ्यूल बर्न होने और एसी चलने दोनों ही सूरत में हीट वातावरण में ज्यादा सर्कुलेट होती है। 

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इनका कहना है :

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पर्यावरण ही नहीं, जैव विविधता को भी नुकसान
एयर कंडीशनर का बढता उपयोग न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाता है बल्कि इससे निकलने वाली गैसें  एच.एफ.सी. एवं सी.एफ.सी. ओजोन परत को पतला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें मौजूद हैलाइडस (फलोराइड/ क्लोराइड/ब्रोमाइड) गैसें प्रदूषण फैलाने के साथ गर्मी भी बढ़ाती है। जिससे उस क्षेत्र की जीव विविधता प्रभावित होती है। जिसके कारण आज शहरी क्षेत्रों में पक्षी, तितली जैसे जीवों की संख्या घटती जा रही है। इससे बचने के लिए एसी निश्चित तापमान पर चलाना चाहिए। इंडोर प्लांट्स जैसे मनी प्लांट, स्नेक प्लानट को लगाए जाना चाहिए। यह हीट व प्रदूषण को सोंख लेते हैं।  
-नीरजा श्रीवास्तव, प्रोफेसर बोटनी, गवर्नमेंट कॉलेज कोटा

एसी की गैस के विकल्प पर हो रहे रिसर्च
पहले एसी में कूलिंग के लिए जो गैस इस्तेमाल की जाती थी वो क्लोरोफ्लोरोकार्बन हुआ करती थी, जो ओजोन परत के क्षरण का मुख्य कारक थी। अब हाइड्रोफ्लोरोकार्बन इस्तेमाल किया जाता है जो स्वयं ग्रीन हाउस गैस है और ग्लोबल वार्मिंग का एक कारण भी है। एसी चलते समय इस गैस के लीक होने से ग्रीन हाउस प्रभाव देखने को मिलता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के एक अध्ययन के अनुसार 2050 तक एसी का उपयोग तीन गुना बढ़ जाएगा। ऐसी स्थिति में एसी के विकल्प के बारे में सोचना आवश्यक है। हालांकि एसी में प्रयोग होने वाले गैस के विकल्पों पर कई रिसर्च किए जा रहे हैं। 
-पूनम जायसवाल, पर्यावरणविद् एवं प्रोफेसर जेडीबी साइंस कॉलेज

एसी अंदर के तापमान को खींचकर बाहर फेंकता है। जिससे तापमान में और वृद्धि होती है। हालांकि, समान्य उपाय से भी हीट को कम किया जा सकता है।  घरों के आसपास पेड़-पौधे लगाना, सौलर पैनल लगाना चाहिए, जो धूप को अवशोषित कर लेते हैं और बदले में बिजली बना देते हैं। आजकल ऐसे पेंट्स आने लगे हैं, जिसे छत पर करने से वह धूप को वापस रिफ्लेक्ट कर देते हैं और छत गर्म नहीं होती। इसी तरह छत को ग्रीन नेट से भी कवर कर धूप से बचाव कर तापमान में कमी ला सकते हैं। जब छत नहीं तपेगी तो कमरा ठंडा रहेगा और एसी चलाने की जरूरत नहीं होगी। 
-डॉ. आनंद चतुर्वेदी, प्रोफेसर मैकेनिकल डिपार्टमेंट आरटीयू

घर के अंदर व बाहर का तापमान में अधिक अंतर नहीं होना चाहिए। यदि, तापमान 35 से 40 डिग्री से अधिक हो तो एसी को 24 टेम्प्रेचर से नीचे न चलाएं। लंबे समय तक एसी में रहने से सिर की ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती है। इससे ब्रेन में खून का फ्लो कम हो जाता है, जो सिर दर्द व माइग्रेन की वजह बनता है। वहीं, स्कीन ड्राई होना, आंखों में सूखापन होने की समस्या भी हो सकती है। विशेष तौर पर बच्चों का ध्यान रखे जाने की जरूरत है, क्योंकि वे एसी कमरों से अंदर बाहर आते-जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है। 
-डॉ. विनोद पंकज, शिशुरोग विशेषज्ञ राजकीय रामपुरा चिकित्सालय 

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