थोक में सस्ता, खुदरा में महंगा

केंद्र सरकार के पाम आयल आयात से रोक हटाने के बाद भी सस्ता नहीं हुआ तेल

थोक में सस्ता, खुदरा में महंगा

बाजार में रेट कम होने के बावजूद खुदरा व्यापारी पुराना स्टॉक बताकर महंगे दाम में माल बेचते है। जिससे आम आदमी को तेजी और मंदी का कोई फायदा नहीं मिलता है। पिछले साल की तुलना में खाद्य तेल महंगा ही है। इससे गरीब और आम लोगों को आर्थिक झटका सहन करना पड़ रहा है। कोटा में थोक से लेकर खुदरा तेल व्यापारी लोगों से अधिक कीमत वसूल रहे हैं।

कोटा। मंडी में सरसों की आवक अच्छी होने के बावजूद अभी तक खाद्य तेलों के दाम में विशेष अंतर नहीं आया है। हालांकि पिछले माह की अपेक्षा इस माह सोयाबीन के टीन में 100 रुपए की कमी आई लेकिन आम आदमी को खुदरा में अभी महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने पाम आयल के आयात से रोक हटाने के बावजूद दाम में खास अंतर नहीं आ रहा है। पिछले साल जहां सरसों 6 हजार रुपए क्विंटल बिकी वहीं इस बार सरसों 4500 रुपए क्विंटल बिक रही उसके बावजूद सरसों के तेल के दाम कम नहीं हो रहे है। खुदरा और होलसेल में तेल के दाम में पांच से दस रुपए का अंतर आ रहा है। इधर वादा कारोबार में भी तेलों के दामों में कमी आई लेकिन तेल व्यापारी आयात कम होने की दलीद लेकर दामों में मॉनोपोली बना रहे हैं। होलसेल में प्रतिदिन तेल के दाम कम ज्यादा होते रहते हैं। खुदरा में बाजार में दाम  स्थिर ही रहते हैं। बाजार में रेट कम होने के बावजूद खुदरा व्यापारी  पुराना स्टॉक  बताकर महंगे दाम में माल बेचते है। जिससे आम आदमी को तेजी और मंदी का कोई फायदा नहीं मिलता है। पिछले साल की तुलना में खाद्य तेल महंगा ही है।  इससे गरीब और आम लोगों को आर्थिक झटका सहन करना पड़ रहा है।  कोटा में थोक से लेकर खुदरा तेल व्यापारी लोगों से अधिक कीमत वसूल रहे हैं।  होली के बाद तेल का उठाव भी कमजोर पड़ा है।  दीपावली 2020 में सोयाबीन तेल का रेट 94 रुपए प्रति किलो था।  जो 2022 में  170 रुपए किलो पहुंच गया है। व्यापारियों की दलील है पहले   देश में तेल के आयात पर रोक होने से ऊंचे दाम थे अब सरकार ने आयात से रोक हटाई है अब एक दो माह में दाम कम होंगे। मूंगफली तेल अभी 195 रुपए किलो ही बिक रहा है।  कोटा में सभी प्रकार के खाद्य तेलों में से सर्वाधिक यानी 70 फीसदी बिक्री सोयाबीन तेल की होती है। फरवरी में 162 से 165 रुपए प्रति किलो के रेट पर बिक रहा था। पाम आयल आयात  शुरू होने के बाद 15 रुपए किलो की गिरावट आई है।  मार्च में 150 रुपए किलो बिक रहा है।  

खाद्य तेल के होलसेल भाव
सोया रिफाइंड फॉर्च्यून 2070, चंबल 2040, सदा बहार 1890, एलेक्सा 1790 दीप ज्योति1890, सरसों स्वास्तिक 2060,  तेल अलसी 2360 रुपए प्रति टीन। मूंगफली ट्रक 3190, स्वास्तिक निवाई 2830, कोटा स्वास्तिक 2790, सोना सिक्का 3080 प्रति टीन। 

तेलों के दाम होलसेल और खुदरा में 
तेल    होलसेल    खुदरा 
मूंगफली ट्रक    212    220
स्वातिक कोटा    189    195
सोना सिक्का    205    210    
सोयाबीन फॉर्चुन    138    155
चंबल    136    150
सदाबहार    125    135
एलेक्सा    119    130
दीपज्योति                126    135
सरसों स्वास्तिक    137    155
अलसी तेल    158    175
सरसों स्वास्तिक           138    145   
[रुपए प्रति टिन]

 उछाल का यह है कारण
रूस व यूक्रेन दोनों सूरजमुखी उत्पादक देश हैं। यहां से सूरजमुखी का तेल आयात होता है, लेकिन युद्ध के कारण तेल का आयात नहीं हो पा रहा है जिसके चलते सरसों के तेल की डिमांड बढ़ी है। पिछले एक पखवाडेÞ में खाद्य तेलों के दामों में 100 रुपए टीन तक कमी आई है।  हाड़ौती के कई जिलों में सरसों की खेती बड़े स्तर पर होती है। इस बार बंपर उत्पादन हुआ है । अभी बाजार में नई सरसों आना शुरू हुई लेकिन दाम महंगे है। तेलों के लगातार दाम बढ़ने का दूसरा कारण यह है कि कोरोना के चलते दो साल से मलेशिया, इंडोनेशिय, वियतनाम, फिलिपिंस से पाम आयल का आयात नहीं हुआ है। सरकार ने अब आयात से रोक हटाई है। इसका असर आने में एक दो माह लगेंगे। 
-दीपक दलाल, तेल कारोबारी  

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दाम कम आने में चार साल का लगेगा समय
सरकार ने तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर होने की दिशा में पहल की है, लेकिन इसके लिए चार साल का वक्त लगेगा।  हालांकि केंद्र सरकार ने तेलों के दाम कम करने के लिए पाम आयल के आयात से रोक हटाने के बाद दामों में कमी आने की संभावनाए बनी है। पिछले डेढ़ साल से सरसों तेल, रिफाइंड आॅयल  और अन्य एडिबल आॅयल की कीमतों में काफी अधिक तेजी देखने को मिली है।  रूस-यूक्रेन की लड़ाई आगे बढ़ने के साथ ही भारत में क्रूड एडिबल आॅयल की सप्लाई पर असर पड़ा है। भारत अपनी खाद्य तेल की 70 फीसदी जरूरत इम्पोर्ट के जरिए पूरी करता है। ऐसे में तेलों के दामों लगातार इजाफा हो रहा है। अभी लोकल माल आने से दाम में कुछ कमी आई है लेकिन यह अस्थाई है। 
-आकाश गर्ग, तेल व्यापारी 
 
तेल में लगी आग से पकवान पर ब्रेक
तीज त्यौहारों का सीजन शुरू हो गया है लेकिन महंगाई है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। राशन में लगातार बढ़ोतरी से रसोई का बजट बिगड़ा हुआ है। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने से किचन का बजट और बिगड़ गया। हर चीज महंगी हो गई है। उस पर  खाद्य तेलों के दामों में आग लगी हुई है। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो रहा है।  सोयाबीन तेल में रोज हो रही बढ़ोत्तरी घर का बजट पूरा बिगड़ गया है। सोयाबीन 80 रुपए से बढ़कर 150 रुपए किलो पहुंच गया है।  नौकरी पेशा लोगों के वेतन में वृद्धि हो नहीं रही, महंगाई बेलगाम हो रही है। तीज त्यौहारों में मिठाईयां और पकवान ज्यादा बनते है और तेल के दाम बढ़े होने से इस बार पकवानों में कमी करनी पड़ रही है। बाजार में मिठाइयां नमकीन सब महंगे हो गए है। 
-जया शर्मा, गृहिणी, आकाशवाणी कॉलोनी 

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मंडी में बंपर आवक फिर भी दाम नहीं हो रहे कम
होल सेल में सरसों तेल 138 रुपए किलो में बिक रहा है लेकिन खुदरा में अभी सरसों तेल 165 रुपए किलो ही चल रहा है। वहीं मूंगफली तेल होलसेल में 188 रुपए किलो बिक रहा है वहीं खुदरा में 192 से 195 रुपए किलो बिक रहा है। सोयाबीन तेल होलसेल में 138 रुपए किलो है वहीं रिटेल में 150 रुपए किलो बिक रहा है। होलसेल और खुदरा दाम में 10 से 15 रुपए का अंतर चल रहा है। घर का पूरा बजट बिगड़ा हुआ है। मार्च में तेल सस्ता हो जाता है लेकिन इस बार दाम नीचे नहीं आए है। रसोई में समझो आग लगी है। घर परिवार का पूरा बजट प्रभावित हो रहा है। आम आदमी के लिए इतनी महंगाई ठीक नहीं। पता नहीं आने वाले दिनों में क्या होगा। दाल रोटी भी मिलेगी अथवा नहीं।
-सुनीता मीणा, गृहिणी, निवासी बालिता 

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