कलक्टर अंकल-हमारे स्कूल रोड पर हजारों गड्ढ़े, जान का सताता डर

दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला

कलक्टर अंकल-हमारे स्कूल रोड पर हजारों गड्ढ़े, जान का सताता डर
बारां रोड स्थित स्कूल के 12 हजार विद्यार्थियों ने कलक्टर से लगाई फरियाद

कोटा। बोरखेड़ा क्षेत्र से गुजर रहा बारां रोड जर्जर हो रहा है। जबकि, इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्कूल हैं। अनगिनत जानलेवा गड्ढ़े हो रहे हैं। ऐसे में स्कूल  आने-जाने के दौरान बाल वाहिनियों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। बच्चों के स्कूल जाने से लेकर घर लौटने तक अभिभावक अनहोनी की आशंका से आशंकित रहते हैं। ऐसे में एक निजी स्कूल के 12 हजार विद्यार्थियों ने मिलकर जिला कलक्टर को 200 पत्र लिखकर न केवल पीड़ा बयां की बल्कि सड़क की दुर्दशा सुधरवाने की फरियाद लगाई। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने बारां रोड पर स्कूलों की सड़कों पर हो रहे जानलेवा गड्ढ़ों व इनसे होने वाली घटना-दुर्घटनाओं को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित कर प्रशासन को चेताया था। 

बच्चों ने 200 पत्रों में कलक्टर को बताई पीढ़ा
स्कूल के छात्र-छात्राओं ने जिला कलक्टर के नाम कुल 200 पत्र अपनी पीढ़ा बताई। बच्चों ने यह पत्र प्राचार्य को सौंपे। जिसे विद्यालय निदेशक राघव अग्रवाल, प्राचार्य शैलेंद्र पोरवाल एवं विद्यालय समिति के जनरल मैनेजर पुरुषोत्तम शर्मा ने छात्रों को साथ लेकर इन पत्रों को जिला कलक्टर कोटा को प्रेषित कर सड़कों की दशा सुधरवाने की गुहार लगाई। इधर, क्षेत्रवासियों और अभिभावकों ने मांग है कि प्रशासन शीघ्र ही सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य पूरा कराए, ताकि आए दिन होने वाली परेशानियों और दुर्घटनाओं से राहत मिल सके। 

15 से 20 हजार विद्यार्थियों का रहता है आवागमन
स्कूल संचालक राघव अग्रवाल का कहना है कि इस मार्ग पर करीब दो दर्जन सीबीएसई स्कूल हैं। जिनमें करीब 15 से 20 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो प्रतिदिन इसी जानलेवा गड्ढ़ों से छलनी सड़क से गुजरकर स्कूल आते-जाते हैं। बारिश के दिनों में स्कूल तक पहुंचना बच्चों के लिए जोखिमभरा हो जाता है। 

स्कूल वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा
बारां रोड पर सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक स्कूल बसें, आॅटो और निजी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। जर्जर सड़कों के कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। स्कूल प्रशासन ही नहीं अभिभावकों की भी चिंता बढ़ जाती है। सड़कों पर मोटी-मोटी गिट्टियां फैली हुई हैं। जिसके चलते दुपहिया वाहन, आॅटों व बाल वाहिनियों के पलटने व स्लिप होने जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है। 

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