जर्जर नहरों के सहारे हाड़ौती के खेतों को सीचने की कवायद, जानें पूरा मामला
टूटी दीवारों से पैदल व वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा
सेफ्टी वाल जर्जर होकर टूटे नहरों में बहता पानी अब सड़कों पर बहने लगा है।
कोटा। सरकारी दावों में भले ही चम्बल की नहरों की मरम्मत के नाम पर लाख दावे किए जाए, लेकिन नहरों के जर्जर हालात प्रशासनिक फिक्र की असली कहानी बयां कर रहे है । नहर के तलहटी में जमा गाद ओैर झाड़ झंझाड़ नहरों को कमजोर कर रहे है वहीं नहरों में बहने वाले पानी के प्रवाह को भी कम कर रहे है। नतीजतन नहरें पूरी क्षमता से पानी का वहन नहीं कर पा रही है। कोटा से बूंदी ब्रांच के सेफ्टी वाल जर्जर होकर टूट गए है ऐसे में नहरों में बहता पानी अब सड़कों पर बहने लगा है।
जर्जर नहरों से टेल तक पानी
कोटा बैराज और इसकी नहरों का निर्माण कार्य 1954 में शुरू हुआ था और यह 1960 में बनकर तैयार हुई। 178 किलोमीटर लम्बी नगर बूंदी जिले के लिए वरदान की तरह काम करती है। 65 साल पुरानी इस नहर को राजस्थान के बूंदी जिले की कृषि भूमि को सींचने के लिए बनाई गई है। अंधेड़, दौलाडा,ओकारपुरा, खटकड, रायता, लालपुरा कुआंरती माटुंदा तक के नहरी तंत्र की हालत यह है कि यहां खेतों मे पानी रिसने के कारण सैकडों बीघा खेत उसर हो रहे है। ऐसे में कम क्षमता के बहाव के चलते पूरे क्षेत्र मुख्यरूप से टेल तक समय पर पानी पहुंचने की आसार कम ही है।
28 से ज्यादा जगह गिरी दीवारें
नान्ता से बल्लोप हाईवे तक दोनो और की सुरक्षा दीवारें 65 से ज्यादा जगह पर टूटी हुई है। नान्ता से पत्थर मण्डी रोड़ पुलिया तक ही नहर की दीवारें 28 से ज्यादा जगह पर टूट चुकी है। नान्ता थाना के सामने जाकर तो इनका हाल और भी बुरा हो जाता है। यहां पर पहले ही दीवारों की ऊचांई डेढ से एक फीट तक ही रह जाती है। ऊपर से जर्जर और टूटी हुुई दीवारों से वाहन चालकों सहित जानवरों और पैदल चालकोें के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
बूंदी नहर के दोनों और की दीवारें जगह जगह टूटी पड़ी है। नान्ता से सगस जी मोखा तक दायी तरफ 3 जगह तो बायीं तरफ 8 से ज्यादा जगह पर बडे बडे हिस्से टूटकर नहर में ही गिर चुके है। इसके आगे यहां से सुखाडिया व महर्षि नवल योजना नहर के दायीं तरफ 4 तो बायीं तरफ 8 जगह दीवारें पूरी तरह टूट चुकी है। नान्ता थाने से पत्थर मण्ड़ी तक करीब 8 ये ज्यादा जगह खतरनाक स्थिति बनी हुई है।
अभी के दिनों में यह अक्सर होता है
नहर प्रशासन का कहना है कि अभी गर्मी के शुरूआत के समय नगर के तले में उगी काई जिसे खांजी भी कहते है, वह फूल जाती है। जिसके कारण पानी का गेज बढ़ाने पर पानी बाहर आने लग जाता है, यह पूरे समय नहीं रहता है। केवल होली तक यह परेशानी रहेगी।
1300 क्यूसेक में ही उफनने लगी नहरें
नहर में अधिकतम 1500 क्यूसेक क्षमता तक का पानी का प्रवाह करने की क्षमता है, यानि इतनी क्षमता तक भी नहरों का पानी नहर में ही बहने के लिएनहरी तत्र की डिजाइन की गई है, लेकिन अभी 1300 क्यूसेक क्षमता के दबाब में ही पानी छोड़ा जा रहा है। फिर भी नहरी दीवारों से रिसता पानी सड़कों पर लगातार बह रहा है ।
लाइनिंग और स्थानीय रूप से मरम्मत
सीएडी के अधिकारियों ने बताया कि समय-समय पर नहर की दीवारों मे होने वाले रिसाव और सुराखों को रोकने के लिए सीएडी प्रशासन मरम्मत का कार्य करवाता रहता है। अभी इन दीवारों की मरम्मत का कार्य सीएडी और सकतपुरा की तरफ फवकऊढ द्वारा किया गया था।
इनका कहना है
कल ही मामला दिखवाते है। जैसी भी आवश्यकता होगी उसे पूरा करवाया जाएगा।
कुशल कोठारी,अति. क्षेत्रीय आयक्त सीएडी

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