12 साल बाद भी कोटा सहित राज्य का एक भी शहर नहीं हो सका कचरा मुक्त

स्वच्छता सर्वेक्षण में हैं जीएफसी के एक हजार अंक

12 साल बाद भी कोटा सहित राज्य का एक भी शहर नहीं हो सका कचरा मुक्त
गारबेज फ्री सिटी के सर्वेक्षण के लिए आएगी टीम।

कोटा। स्वच्छता सर्वेक्षण वर्ष 2014 से किया जा रहा है। करीब 12 साल से अधिक का समय हो गया। अभी तक कोटा ही नहीं राज्य का एक भी शहर चाहे वह जयपुर हो या जोधपुर या फिर उदयपुर जैसा शहर हो एक भी शहर कचरा मुक्त नहीं हो सका है। हालांकि 50 हजार से कम की आबादी वाले शहरों में शामिल डूंगरपुर साफ शहरों में तो शामिल है लेकिन वह भी कचरा मुक्त नहीं है। अब फिर कचरा मुक्त शहर का सर्वे करने के लिए भी टीम कोटा आएगी। कचरा मुक्त शहर(जीएफसी) में अभी प्रदेश का कोई शहर शामिल नहीं है। स्वच्छता सर्वेक्षण में जीएफसी के एक हजार अंक निर्धारित हैं।

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण किया जाता है। इसके लिए जनसंख्या के हिसाब से अलग-अलग शहर व नगर निकायों को लिया गया है। 50 हजार से अधिक, 1 लाख से अधिक और 5 लाख से अधिक की आबादी वाले निकायों में होने वाले सर्वेक्षण के लिए हाल ही में सफाई का भौतिक सत्यापन केन्द्रीय टीम द्वारा हाल ही में किया जा चुका है। वहीं सर्वेक्षण में ही एक घटक है गारबेज फ्री सिटी(कचरा मुक्त शहर)। जिसका सर्वेक्षण करने के लिए भी टीम कोटा आएगी। इस टीम के जून में आने की संभावना है।जानकारी के अनुसार कोटा में रोजाना करीब पांच सौ टन से अधिक कचरा निकल रहा है।

जगह-जगह कचरे का अम्बार
कोटा जैसे शहर में जो संभागीय मुख्यालय होने के साथ ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी शामिल रहा है। अरबों रुपए शहर को स्मार्ट बनाने में खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन अभी तक न तो शहर स्मार्ट बन सका है और न ही स्वच्छ। नगर निगम की ओर से हर साल सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर कचरा परिवहन तक के कार्य की मॉनिटरिंग भी सख्ती से की जा रही है। उसके बाद भी शहर में अंदरूनी इलाकों के अलावा मुख्य मार्गों पर भी जगह-जगह कचरे के अम्बार देखे जा सकते हैं। हालांकि निगम अधिकारियों का दावा है कि कचरा रोजाना साफ हो रहा है। सफाई के बाद कचरा डलने से वह दिनभर पड़ा रहता है। लेकिन कारण कुछ भी हो शहर में अभी भी कचरा खुले में पड़ा देखा जा सकता है। फिर चाहे वह छावनी बंगाली कॉलोनी में हो या कोटड़ी नहर के किनारे। चम्बल रिवर फ्रंट नयापुरा रोड पर भी कचरे का ढेर देखा जा सकता है।

कचरा पात्रों के बाहर भी कचरे के ढेर
नगर निगम की ओर से शहर में जगह-जगह पर कचरा पॉइंट निर्धारित किए हुए हैं। जिससे वहां से कचरा समय पर उठ सके। वहीं उनके अलावा जगह-जगह पर कचरा पात्र भी रखे गए हैं। जिससे लोग उनमें ही कचरा डालें। यहां तक कि उन कचरा पात्रों में कचरा नजर ही नहीं आए। इसके लिए नगर निगम की ओर से दादाबाड़ी मेन रोड पर अंडर ग्राउंड कचरा पात्र तक बनाया गया है। इसी तरह का दूसरा अंडरग्राउंड कचरा पात्र किशोरपुरा मुक्तिधाम में बनाने की योजना है। नयापुरा में भी बाग स्कूल के पास इसी तरह का प्रयास किया गया था। यहां तक कि निगम की ओर से जगह-जगह पर प्लास्टिक के कचरा पात्र रखे गए लेकिन लोगों ने उन्हें ही तोड़ दिया था चोरी कर लिया। जिससे उनका भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि कचरा पात्रों के होने के बावजूद कचरा उनके बाहर तक बिखरा रहता है।

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इंदौर पहला कचरा मुक्त शहर
शहरी आवास और कार्य मंत्रालय की ओर से हर साल कचरा मुक्त शहर के लिए सर्वे किया जाता है। मंत्रालय की ओर से देश में करीब 1170 शहरों को स्टार रेटिंग के हिसाब से कचरा मुक्त शहर घोषित किया गया है। जिनमें इंदौर सफाई के मामले में तो देश में पिछले कई सालों से सबसे स्वच्छ शहर है ही। वहीं 7 स्टार रैकिंग के साथ ही यह देश का पहला कचरा मुक्त शहर भी है।

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खुले में शौच मुक्त शहर
स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत जिस तरह से जीएफसी के एक हजार अंक निर्धारित हैं। उसी तरह से खुुले में शौच मुक्त(ओडीएफ) के भी एक हजार अंक है। कोटा ओडीएफ में तो प्लस-प्लस है।ऐसे में अगले माह जून में टीम कोटा आएगी। जिसमें ओडीएफ व जीएफसी का भी भौतिक सत्यापन करेगी। जिससे दो हजार अंक में से निगम को अंक मिलेगी।

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सिटीजन फीडबैक का आज अंतिम दिन
नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी ऋचा गौतम ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत सिटीजन फीडबैक चल रहा है। अब तक कोटा में करीब पौने तीन लाख लोग एप व बार कोड के माध्यम से शहर की सफाई के संबंध में फीडबैक दे चुके हैं। सिटीजन फीडबैक का रविवार को अंतिम दिन है। वहीं अब अगले माह तक ओडीएफ व जीएफसी सर्वे के लिए टीम के आने की संभावना है। इन दोनों के ही एक -एक हजार अंक निर्धारित है। कोटा नगर निगम ओडीएफ में तो प्लस-प्लस है। लेकिन जीएफसी में अभी राज्य का कोई भी शहर शामिल नहीं है। यह रेटिंग के हिसाब से तय होता है। 

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