एक्सपोर्ट ठप: 200 करोड़ का चावल बीच राह में अटका
खाड़ी देशों में नहीं हो पा रहा बासमती चावल का निर्यात
कोटा। मिडिल ईस्ट के तनाव का असर हाड़ौती के चावल उद्योग पर भी पड़ा है। भारत से 25 से 30 फीसदी तक चावल का निर्यात केवल ईरान में ही होता है, जिसमें हाड़ौती का बासमती चावल सबसे ज्यादा वहां भेजा जाता है। समुद्री जलमार्ग पर जहाजों का आवागमन बाधित होने के कारण हाड़ौती से बासमती चावल के निर्यात से जुड़ी सारी प्रक्रिया थम गई है। हालांकि अब अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक कारोबार शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में हाड़ौती का करीब 200 करोड़ का बासमती चावल का कारोबार मझधार में अटका हुआ है। करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। एक्सपोर्टर्स की ओर से विदेश में पहले से किए हुए बासमती चावल के सौदे भी खत्म होने की कगार पर हैं। निर्यात रुक जाने और जलमार्ग बंद होने से उठाव नहीं हो रहा है। इन हालातों के चलते एक्सपोर्टर से लेकर व्यापारी और मिल मालिक भी परेशान हो गए हैं। दूसरी तरफ मंडियों में धान के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को भी परेशानी हो रही है।
कुछ माल गोदाम तो कुछ बंदरगाहों पर अटका
चावल एक्सपोर्टरों के अनुसार हाड़ौती की लगभग सभी राइस मिलों के पास अभी तक करीब 40 से 50 करोड़ के सौदे हैं, लेकिन यह सब कुछ अटक गए हैं। इनका माल मिल मालिकों के पास गोदाम में तैयार है। इसी तरह से 40 से 50 करोड़ का माल कांडला पोर्ट पर पड़ा हुआ है। इनका भुगतान भी आना बाकी है। एक महीने का प्रोडक्शन इन्होंने तैयार किया हुआ है। दो महीने का कच्चा माल भी उनके पास है। यह सब कुछ मिलाकर 200 करोड़ से ज्यादा का व्यापार फिलहाल अटक गया है। इसके अलावा माल खरीदा हुआ है, जिसका भुगतान करना शेष है। ऐसे में सकुर्लेशन पूरी तरह से ठप हो जाने पर मिलर्स को बड़ी हानि होने की संभावना बनी हुई है।
इन देशों में निर्यात होता है चावल
भामाशाहमंडी सहित कोटा संभाग के अन्य जिले बारां और बूंदी की मंडियों में बासमती चावल बिकने के लिए ज्यादा आता है, जिसमें से करीब 90 फीसदी चावल एक्सपोर्ट होता है। मिडिल ईस्ट में ईरान, इराक, दमाम, जेद्दा, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात में भारत से चावल जाता है। भारत के कुल निर्यात का 25 से 30 फीसदी केवल ईरान में ही जाता है, जबकि 5 से 10 फीसदी यूएसए और यूके में जाता है। वहां तनाव जैसे हालात होने से सब रुक गया है। हाड़ौती में वर्तमान में 30 से आिक राइस मिल हैं, इनमें धान से तैयार चावल पड़ा हुआ है, लेकिन अब खरीददार नहीं हैं। एक्सपोर्ट होने वाला एक महीने का माल उनके पास है, जबकि तीन माह का उनके पास कच्चा माल है, ऐसे में इनके दाम लगातार कम होने से नुकसान मिल मालिकों को हो रहा है। मिल में आगे आॅर्डर नहीं आने के चलते काम बंद करने की स्थिति आ गई है।
दामों में आ रहा उतार-चढ़ाव
थोक चावल व्यापारी अंकित अग्रवाल ने बताया कि एक्सपोर्ट होने वाली 17-18 वैरायटी के दाम 5200 से 7100 के बीच चल रहे थे, जो अब 6350 के आसपास रह गए हैं। उम्मीद की जा रही थी कि यह बढ़कर 7500 के आसपास हो जाएंगे। इसी तरह से वैरायटी 1509 के दाम 5200 से लेकर 6800 के बीच थे, इसके दाम 5750 रह गए हैं। वैरायटी 1847 के दाम 4900 से 6600 प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, यह 5800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास हैं। इनके दाम 6300 के आसपास पहुंच जाने का अनुमान था, हालांकि, 1509 से नीचे की क्वालिटी होने के बावजूद भी इसके दाम ऊंचे हो गए हैं।
फैक्ट फाइल
-200 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित
-30 फीसदी चावल का निर्यात केवल ईरान में
-30 से अधिक राइस मिल हाड़ौती में
-47 लाख क्विंटल चावल होता है निर्यात
मिडिल ईस्ट में चले युद्ध के कारण बासमती चावल का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक समुद्री जलमार्ग पर आवागमन सुचारू नहींं हो पाया है। इस कारण करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है।
- भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख व्यापारी, भामाशाहमंडी

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