असर खबर का : वन विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी को थमाया नोटिस, दर्ज की एफआईआर

वन भूमि पर 50 विद्युत पोल लगाने व भारी मात्रा में पत्थरों का स्टॉक करने का मामला

असर खबर का : वन विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी को थमाया नोटिस, दर्ज की एफआईआर
विशेषज्ञ बोले-एफसीए कानून का उल्लंघन वन अफसरों की मिलीभगत का परिणाम।

कोटा। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की प्रत्यावर्तित जमीन के बाहर वन भूमि पर 50 विद्युत पोल लगाने व पत्थरों का भारी मात्रा में अवैध स्टॉक करने के मामले में शुक्रवार को वन विभाग हरकत में आ गया। विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, क्षेत्रिय वन अधिकारी डाबी द्वितीय द्वारा वन अधिनियम में एफसीए उल्लंघन के मामले में एफआईआर कर केस दर्ज किया है। कार्रवाई से निर्माण एजेंसी में हड़कम्प मच गया। गौरतलब है कि बूंदी वन मंडल की डाबी रेंज के रामपुरिया नाका क्षेत्र स्थित जाखमुण्ड वनखंड में निर्माण एजेंसी द्वारा बिना अनुमति के वन भूमि पर विद्युत पोल लगवाए और जगह-जगह पत्थरों का स्टॉक कर वन अधिनियम 1980 का उल्लंघन किया। जिसका खुलासा गत 24 जून को डाबी सहायक वन संरक्षक द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद जारी हुए निरीक्षण नोट से हुआ।

मामला खुला तो मचा हड़कम्प
दैनिक नवज्योति के 3 जुलाई के प्रकाशित अंक में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी ने लांघी वन सीमा, लगा दिए 50 बिजली पोल,खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग में हड़कम्प मच गया। वन अधिकारी दिनभर कार्रवाई में जुटे रहे। जांच में पाया गया कि यह गतिविधियां वन संरक्षण अधिनियम-1980 के प्रावधानों का उल्लंघन हैं, जिसके बाद कार्रवाई की गई।

पर्यावरणविदों ने उठाए वन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
पर्यावरणविदों का कहना है कि वन क्षेत्र में 50 बिजली के पोल लगाना, उनमें विद्युत आपूर्ति शुरू करना और 8 से 10 फीट ऊंचे पत्थरों के बड़े-बड़े ढेर जमा करना स्थानीय वन अधिकारियों की जानकारी या मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उनका तर्क है कि डाबी रेंज में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के रेंजरों के अलावा नाकेदार, वन रक्षक, सहायक वनपाल और फॉरेस्टर समेत कई अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी अवैध गतिविधियां बिना विभागीय जानकारी के होना गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में गार्ड से रेंजर तक की भूमिका की जांच की जाना चाहिए।

केएमएल मैप और जीपीएस से वन अपराध का खुलासा
एसीएफ द्वारा जारी निरीक्षण नोट के अनुसार, उन्होंने मौके पर ही सर्वेयर से एयरपोर्ट के लिए प्रत्यावर्तित वन भूमि का केएमएल मैप मंगवाया। जीपीएस कोर्डिनेट्स व लोकेशन का मिलान करने पर स्पष्ट हुआ कि पत्थरों का स्टॉक और बिजली के पोल एयरपोर्ट के लिए हस्तांतरित भूमि में नहीं, बल्कि उससे बाहर वन विभाग की भूमि पर हैं।

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गार्ड से रेंजर तक की भूमिका की हो जांच
पूरे मामले में गार्ड से लेकर रेंजर स्तर तक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण और एफसीए कानून के उल्लंघन की घटनाओं पर रोक लग सके। इतनी बड़ी मात्रा में वन भूमि पर अवैध पत्थरों का स्टॉक जमा करना व विद्युत पोल लग जाना, बिना अफसरों की जानकारी या मिली भगत के संभव नहीं है।
-बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी पीपुल फॉर एनिमल्स

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नोटिस देकर एफआईआर दर्ज की
इस मामले में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, वन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
-मनीष शर्मा, रेंजर द्वितीय डाबी, बूंदी वन मंडल

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नोटिस मिलने की जानकारी मिली है। अभी मैं बहार हूं, लौटकर आने के बाद मामले में कुछ कह पाएंगे।
-जितेंद्र कुमार, लाइजनिंग ऑफिसर एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी

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