दवा से मुश्किल ठंडा पानी, रात होने से पहले पानी स्टाक की फिक्र
28 वाटर कूलर में से केवल 18 ही जैसे-तैसे चल रहे
रीते कंठ इलाज कराने की मजबूरी, दवा खाने के पानी की जुगत में तीमारदार ।
कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में इन दिनों तीमारदारों को मरीज की देखभाल से ज्यादा चिंता एक बोतल पानी की है। अस्पताल परिसर में पहले जहां हर जगह शीतल जल उपलब्ध हो जाता था वहां पानी के लिये 100 मीटर तक की दूरी तय करनी पड रही है। कहने को परिसर में 28 वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन धरातल पर केवल 18 ही जैसे-तैसे चल रहे हैं। बाकी या तो कबाड़ हो चुके हैं या प्रशासन की लापरवाही के कारण तालों में बंद हैं। एक बार जहां से पानी की सुविधा बंद हुई फिर वो चालू की ही नहीं गयी। ऐसे में परिजनों के लिये के लिये बोतलें हाथ में लेकर घुमने की मजबूरी इलाज का हिस्सा बन चुकी है।
बदहाल सिस्टम से परिजनों की परिक्रमा
300 फीट लम्बे गलियारों को पार करने के बाद परिसर में लगे वाटर कूलरों से पानी लेने जाने के बाद भी कई बार पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में एमबीएस परिसर की ओल्ड़ बिल्डिंग में पीने के पानी के लिये बाहर आने की मजबूरी से परिजनों की लम्बी परेड़ हाे जाती है। कई बार तो परिजन सड़क पार करके भी पानी लेकर जाते है। सबसे बड़े वार्ड मेडिकल के मरीज पानी के लिए ENT वार्ड की गैलरी तक दौड़ रहे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में लगा कूलर का तो कनेक्शन ही काट कर हटा दिया है हांलाकि कूलर बाहर रखा है। बर्न वार्ड के रिनोवेशन के चलते महीनों से पानी की सुविधा पर ताला लगा है।
पहले कहा मेन्टीनेन्स के बाद, अब जरूरत नहीं
परिसर में लगे वाटर कूलरों की 19 अप्रेल को खबर प्रकाशित करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि पुराने वाटर कूलरों को मेन्टीनेन्स के लिये हटाया गया है, जिन्हे वापस चालू कर दिया जायेगा। लेकिन भीषण गर्मी 15 दिन गुजर जाने के बाद भी सुविधायें बहाल नहीं हो पायी तब दैनिक नवज्योति ने जन उपयोगीता के मुद्देज पर अस्पताल प्रशासन से पक्ष लिया तब अस्पतान अधीक्षक ने ऐसी जगहों पर दुबारा से प्याऊ शुरू करने की जरूरत नही बताई। पहले दवा काउँटर नं 9, दवा काउन्टर 121 तथा सर्जीकल वार्ड के भीतर लगे प्याऊ बंद कर दिये गये है।
जहां से हटे फिर नहीं लगे,अधीक्षक बोले हमारे पास एक्स्ट्रा
लेखा शाखा के बाहर रखा वाटर कूलर कई महीनों से हटाया गया है। न्यू आईपीड़ी व पुराने कॉटेज वार्ड़ की तरफ से आने वाले परिजनाें व लेखा शाखा के कार्मिकों के लिये यही वाटर कूलर ठण्ड़े पानी के लिये काम आता है। अस्पताल सुत्रों ने बताया कि यह कण्ड़म होने के कारण हटा लिया गया है, वही अधीक्षक महोदय के बताये अनुसार अधीक्षक कार्यालय में वाटर कूलर रिजर्व में रखे हुये है।
रखरखाव तो दूर गेट पर ही ताला
मेडिकल यूनिट B व C में 2 साल पहले पानी के लिए बाटर कूलर काम कर रहा था पिछले साल से पार्क की तरफ जाने वाला गेट बंद कर दिया गया हांलाकि कूलर आज भी वहीं लगा हुआ है जाे अब कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है।
जहां खाना खाने के साथ ठण्ड़े पानी की थी जगह, अब पीक व गंदगी
आर्थोपैड़िक वार्ड़ के बाहर परिजनों के खाना खाने के लिये डाईनिंग हालनुमा केम्पस बनाया गया था यहीं पर एक वाटर कूलर भी लगा हुआ है। सीपेज की समस्या के कारण इसे बन्द कर के पुरे केम्पस पर ही ताला लगा दिया। अब यहां लगा कूलर कबाड़ बन गया वहीं गेट के भीतर गंदगी का ढ़ेर जमा हो गया। बची-खुची कसर यहां लोगो ने गुटके की पीक से पुरी कर दी।
मरीज बोले- दवा से मुश्किल ठंडा पानी
भैया के एक्सीडेंट के बाद 5 दिन से यहाँ हूँ। रात में अस्पताल में रोशनी कम रहती है, डर लगता है लेकिन पानी के लिए पूरे अस्पताल की परिक्रमा करनी पड़ती है। कोई मिलने वाला आ जाये तो पानी की पुछने में भी सोचना पड़ता है।
- वंदना, तीमारदार
अभी थोडी देर पहले ही 30 रूपये की पानी की बोतल लेकर आयी हूँ यहां वाटर कूलर तो है लेकिन दूसरे वार्ड के भी यही से भरते है कभी भी पानी ठंडा नहीं मिलता। बाहर भी यही हाल है।
-पूजा ,मरीज की पत्नी
जहां आवश्यकता है वहां के वाटर कूलर चालू है। सभी काे बिना जरूरत चालु करने से क्या फायदा। रिजर्व में रखवा रखें है। वाटर टेंक की सफाई करवाई जाती है। डेट भी रहती है।
-डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा

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