बहुमंजिला कोचिंग...कोटा में भी कई कोचिंग में नहीं आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
निगम के फायर अनुभाग ने जारी कर रखे हैं नोटिस
कोटा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके के एक कोचिंग संस्थान में सोमवार को भीषण आग लगने से पूरी बिल्डिंग धू-धू कर जल गई। जिससे उसमें मौजूद कई बच्चे जान बचाने के लिए पहली व दूसरी मंजिल से कूदे तो उनमें से करीब 15 बच्चों की मौत हुई है। ऐसा ही हादसा कोटा में भी हो सकता है। यहां भी कई छोटे कोचिंग संस्थान ऐसे हैं जिनमें आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है। हालांकि नगर निगम के फायर अनुभाग ने उन सभी को नोटिस जारी किए हुए हैं।
शिक्षा की छोटी काशी के नाम से विख्यात कोटा में कोचिंग की भरमार है। यहां देशभर से लाखों बच्चे मेडिकल व इंजीनियरिंग की कोचिंग करने के लिए आते हैं। ऐसे में कोटा शहर में एक से बढ़कर एक कोचिंग संस्थान है। कई बड़े कोचिंग संस्थान है। जिनमें शहर में ही कई ब्रांच हैं। उनकी बिल्डिंग भी बहुमंजिला हैं। उन कोचिंग संस्थान में एक बार में हजारों बच्चे एक साथ कोचिंग करते हैं। सुबह जल्दी से रात तक अलग-अलग शिफ्टों में कक्षाएं लगती है। वहीं दर्जनों छोटे कोचिंग संस्थान भी है। जो पीजी या आवासीय भवनों में संचालित हो रही है। उनमें भी बच्चों की संख्या काफी अधिक है।
हालत यह हैै कि कोटा में बच्चों से हजारों लाखों रुपए फीस लेने के बावजूद अधिकतर कोचिंग संस्थानों में आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है। ऐसे में जिस तरह से सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक कोचिंग में आग लगने पर हादसा हुआ है कहीं ऐसा हादसा कोटा में भी नहीं हो जाए।
छोटे कोचिंगों में नहीं है इंतजाम
नगर निगम की ओर से शहर में समय-समय पर बहुमंजिला इमारतों में फायर सिस्टम व एनओसी की जांच की जाती है। हाल ही में की गई जांच में भी यह सामने आया कि शहर के अधिकतर बड़े कोचिंग संस्थानों में जो नामचीन हैं उन सभी में तो फायर सिस्टम लगे हुए हैं। उनके पास फायर एनओसी भी है। लेकिन छोटे कोचिंग संस्थान जो एक या दो मंजिल और पीजी में संचालित हो रहे हैं उनमें अधिकतर में आग से सुरक्षा के नाम पर एक उपरकण तक नहीं है। जिससे वहां कभी भी कोई आग जनित घटना होने पर बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।
प्रवेश-निकास एक और लकड़ी का काम अधिक
नगर निगम कोटा के उपायुक्त फायर व सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि छोटे कोचिंग संस्थानों में प्रवेश व निकास के लिए एक ही रास्ता है। वह रास्ता भी संकरा है। जिससे कोई भी हादसा होने पर वहां से आसानी से निकलना तक मुश्किल हो सकता है। वहीं सजावट के नाम पर लकड़ी का काम काफी कराया हुआ है। सभी जगह एसी लगे हुए हैं लेकिन बिजली के लोड की नियमित जांच नहीं की जाती है। यदि कहीं फायर इंस्टीब्यूशन लगे हुए हैं तो वे अवधि पार हो रहे हैं। जिससे आवश्यकता होने पर उनका उपयोग नहीं किया जा सकता। कहीं सब कुछ सही है तो उसे संचालित करना नहीं आता। ऐसे में शॉर्ट सर्किट होने पर उससे निकली एक चिंगारी लकड़ी पर गिरने से भयावह रूप ले सकती है। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
हर बार हादसों के बाद ही चेतता है प्रशासन
लखनऊ में सोमवार को कोचिंग में आग लगी। इससे पहले दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में आग लगी थी। उसके बाद बिहार के एक निजी हॉस्पिटल के आईसीयू में आग लगी। कोटा में भी गत दिनों एक मॉल के स्टोर में भीषण आग लगी थी। एक पटाखा कारखाना में आग लगने से कई लोगों की मौत हो गई थी।ऐसे में आग जनित हो या अन्य किसी तरह का हादसा। प्रशासन हर बार हादसा होने के बाद ही चेतता है। लेकिन उससे पहले व्यवस्था में सुधार पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिससे इस तरह की घटनाएं हो रही है। अभी तक जितनी भी घटनाएं हुई हैं। उनमें एक ही कारण सामने आया है कि वहां न तो फायर सिस्टम लगा हुआ था और न ही एनओसी थी। हालांकि कोटा में पहले कई हॉस्टल में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई थी। जबकि अलेीगंज के कोचिंग संस्थान में तो कई बच्चों की जान जा चुकी है यह गम्भीर मामता है।
नोटिस देकर व्यवस्था सुधार के निर्देश
नगर निगम के उपायुक्त फायर व सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि निगम के फायर अनुभाग की ओर से ही हाल ही में शहर के सभी कोचिंग संस्थान, मॉल, कमर्शियल कॉम्पलेक्स, होटल, हॉस्टल व आवासीय भवनों में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच व सर्वे किया गया है। जहां भी कमियां पाई गई। उन सभी को नोटिस जारी किए हैं। व्यास ने बताया कि कोटा में जितने भी बड़े कोचिंग संस्थान हैं। जिनकी खुद की बिल्डिग़ हैं उन सभी में फायर सिस्टम भी लगे हुए हैं और उनके पास एनओसी भी है। जांच के दौरान सभी जगह पर सिस्टम कार्यशील भी पाए गए। कई जगह पर प्रवेश व निकास को लेकर समस्या थी तो उन्हें सुषार के निर्देश दिए थे। वहीं पीजी में या निजी मकानों में संचालित छोटे कोचिंग संस्थानों में जरूर फायर सिस्टम नहीं है। ऐसे करीब सौ से सवा सौ कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किए हैं। उनमें से कुछ ने सिस्टम लगाने व एनओसी की प्रक्रिया भी शुरु कर दी है।
ये करें प्रयास तो सुरक्षा संभव
व्यास ने बताया कि आग से सुरक्षा के लिए लोगों को विशेष रूप से बिल्डिंग मालिक व संचालक को जागरूक होना पड़ेगा। फायर सिस्टम लगाने के साथ ही उसे क्रियाशील रखना, बिजली के लोड की नियमित चैकिंग करना, लकडी का काम कम से कम करवाना, प्रवेश व निकास की व्यवस्था प्रोपर रखना, बिजली उपकरणों के पास ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखना समेत अन्य सुधार के प्रयास करने होंगे। जिससे काफी हद तक सुरक्षा की जा सकती है।

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