बूढ़ी नहरें हो रही घायल, प्रवाह में बाधा बन रही कागजी सफाई
झाड़-झंखाड़ और कचरे से अटी नहरें : पर्याप्त सफाई नहीं होने से टेल तक पानी पहुंचाने में होगी परेशानी
सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाड़िय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसकों लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है।
कोटा। रबी सीजन की फसलों को जीवनदान देने के लिए चम्बल की नहरों में जलप्रवाह किया जा रहा है। सोमवार को दोनों नहरों में जलप्रवाह बढ़ा दिया गया है, लेकिन झाड़-झंखाड़, घास-फूस व कचरे-गंदगी से अटी नहरें जलप्रवाह में बाधा बन रही है। ऐसी स्थिति में आगामी दिनों में जिले के टेल (अंतिम छोर) तक समय पर पानी पहुंचने में संशय बना हुआ है। फिलहाल दायीं नहर में ढाई हजार और बायीं नहर में 800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। आगामी दिनों में किसानों की मांग आने पर पानी की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। चंबल में पानी की मात्रा भरपूर होने से चारों बांधों लबालब भरे हुए हैं। वर्तमान में सिंचाई के लिए बांध की दायीं व बायीं नहरों में जलप्रवाह किया जा रहा है। रविवार को दायीं नहर में 750 क्यूसेक और बायीं नहर में 400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। अब सोमवार को पानी की मात्रा बढ़ाकर दायीं नहर में 2550 और बायीं नहर में 800 क्यूसेक कर दिया गया है।
बिना साफ-सफाई किए छोड़ा पानी
सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाड़िय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसकों लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि पहले अतिवृष्टि ने मेहनत पर पानी फेर दिया। अब रबी सीजन की फसल में किसान मेहनत कर बुवाई कर रहे हैं, लेकिन सीएडी प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत व साफ-सफाई केवल कागजों में ही करवाने से टेल क्षेत्र तक पानी के लिए तरसना पड़ेगा। फिलहाल पानी की ज्यादा जरूरत नहीं है, लेकिन आगामी दिनों में आवश्यकता होने पर नहरी पानी नहीं मिला तो किसानों के सामने परेशानी हो जाएगी।
यहां भी वितरिकाएं हो रही जर्जर
किसान नेता विकास कुमार ने बताया कि दायीं मुख्य नहर से ग्रामीण क्षेत्र में निकलने वाली ब्रांचों, माइनरों व वितरिकाओं के बुरे हाल हैं। किशनपुरा ब्रांच दुर्दशा की शिकार है। मरम्मत के नाम पर सीएडी ने लीपापोती कर दी। थेगड़ा से बोरखेड़ा तक नहर के दोनों हिस्सों की टूटी दीवारों की मरम्मत के नाम पर कुछ माह पहले सीएडी ने काम शुरू किया, लेकिन कुछ स्थानों पर मरम्मत कर बाकी जगह टूटी पड़ी दीवारों को ऐसे ही छोड़ दिया। नहर में कचरे के ढेर लगे है। नहर में कचरे व मलबे की ट्रॉलियां तक खाली कर रखी है।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति
अयाना के किसान जानकीलाल धाकड़ ने बताया कि दायीं मुख्य नहर की इटावा केनाल ब्रांच की सफाई नहीं हो पाई है। इस कारण केनाल में जगह जगह मिट्टी जमा हो रही है। वहीं इसकी वितरिका व माइनरों की हालत भी ठीक नहीं है। यह जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं या इनमें झाडिय़ां व घास उग आई है। जोरावरपुरा वितरिका की माइनर भी क्षतिग्रस्त हालत में है। उसमें झाड़ झंखाड़ उग रहे हंै। अयाना ब्रांच की मुख्य केनाल में भी घासफूस तथा मलबा जमा है। इस कारण इनमें जलप्रवाह के आगे बढ़ने में परेशानी आएगी।
चंबल का नहरी तंत्र
- दार्इं मुख्य नहर
6600 क्यूसेक जल प्रवाह क्षमता
124 किलोमीटर राजस्थान में
248 किलोमीटर मध्यप्रदेश में
1.27 लाख हैक्टेयर भूमि राजस्थान में सिंचित
3.70 लाख हैक्टेयर भूमि मध्यप्रदेश में सिंचित
- बार्इं मुख्य नहर
1500 क्यूसेक जलप्रवाह क्षमता
178 किलोमीटर राजस्थान में
1.02 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित
रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। किसानों की मांग के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है। जलप्रवाह से पहले से नहरों और माइनरों की साफ-सफाई करवा दी गई थी। टेल क्षेत्र में समय पर नहरी पानी पहुंच जाएगा।
- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा

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