1.77 लाख से अधिक आवासीय सम्पत्तियों का हुआ सर्वे

27 सौ वर्ग फीट से अधिक के आवास व भूखंड यूडी टैक्स के दायरे में

1.77 लाख से अधिक आवासीय सम्पत्तियों का हुआ सर्वे
कोटा में 26,772 संपत्तियां यूडी टैक्स के दायरे में,सर्वे से बढ़ेगा राजस्व।

कोटा। नगर निगम की ओर से वसूल किए जाने वाले नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) के लिए निजी फर्म के माध्यम से आवासीय व व्यवसायिक सभी सम्पत्तियों का सर्वे कराया जा रहा है। फर्म द्वारा करीब 1.77 लाख से अधिक आवासीय सम्पत्तियों का सर्वे किया गया है। जिसमें 27 सौ वर्ग फीट से अधिक के आवास व भूखंड यूडी टैक्स के दायरे में आए हैं।

नगर निगम द्वारा वर्ष 2007 से नगरीय विकास कर वसूल किया जा रहा है। पूर्व में यह कर नगर निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से वसूला जा रहा था। लेकिन कर्मचारियों की कमी व पुराना सर्वे होने से हर साल बजट में निर्धारित लक्ष्य से काफी कम टैक्स वसूल हो पा रहा था। ऐसे में नगर निगम द्वारा पिछले बोर्ड के समय पहले कोटा दक्षिण में और बाद में कोटा उत्तर निगम में यूडी टैक्स वसूली का काम निजी फर्म को सौंपा गया।

फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे

यूडी टैक्स का काम मिलने के बाद निजी फर्म ने पूरे शहर में सभी तरह की आवासीय, व्यवसायिक, औद्योगिक व संस्थानिक सम्पत्तियों का सर्वे शुरू किया गया। जो सम्पति नगर पालिका अधिनियम के तहत यूडी टैक्स के दायरे में आने लगी उन सभी से नए प्रावधानों के तहत टैक्स वसूल किया गया।

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177482 आवासीय सम्पत्तियां

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नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी फर्म द्वारा किए गए सर्वे में शहर में 1 लाख 77 हजार 482 आवासीय सम्पत्तियों का सर्वे किया गया। सर्वे के आधार पर उनका आंकलन करने पर यूडी टैक्स के पैरा मीटर के हिसाब से 27 सौ वर्ग फीट के आवास व भूखंड यूडी टैक्स के दायरे में शामिल हुए। जिससे सर्वे की गई आवासीय सम्पत्तियों में से 7040 सम्पत्तियां टैक्स के दायरे में आई। जबकि 170442 नॉन टैक्स के दायरे में आई हैं।

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सर्वे की करीब दस फीसदी सम्पति टैक्स के दायरे में

नगर निगम अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी फर्म द्वारा सर्वे तो सभी सम्पत्तियों का किया गया है। लेकिन सर्वे के बाद अलग-अलग श्रेणीवार सम्पत्तियों में करीब दस फीसदी ही यूडी टैक्स के दायरे में आई हैं। निजी फर्म द्वारा शहर में 2 लाख 19 हजार 620 सम्पत्तियों का सर्वे किया। जिसमें से 26 हजार 772 सम्पत्तियां टैक्स के दायरे में आई हैं। इनमें भी सबसे अधिक 10 हजार 379 व्यवसायिक सम्पत्तियां हैं। जबकि 7040 आवासीय, 6400 मिश्रित,2741 संस्थानिक व 212 औद्योगिक संस्थान शामिल हैं।

लक्ष्य से अधिक प्राप्त किया था टैक्स

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि गत वित्त वर्ष में दोनों नगर निगमों का यूडी टैक्स का लक्ष्य 18 करोड़ रुपए था। जिसकी तुलना में निगम ने रिकॉर्ड 19.18 करोड़ रुपए टैक्स वसूल किया था। इस वित्तीय वर्ष में वैसे तो लक्ष्य दस फीससी बढ़कर रखा जाता है। यह करीब 24 करोड़ हो गया है। जिसमें से अभी आधा वित्त वर्ष बीता है। जिस पर ही 10.50 करोड़ से अधिक का टैक्स वसूल किया जा चुका है।

सर्वे निरंतर जारी, बढ़ सकती हैं सम्पत्तियां

नगर निगम के उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी ने बताया कि निजी फर्म द्वारा आवासीय व व्यवसायिक सम्पत्तियों के सर्वे का काम लगातार व निरंतर जारी है। पूर्व में किए गए सर्वे में यदि वहां भूखंड था। लेकिन उसके बाद उस पर निर्माण कर लिया गया। उसका उपयोग आवासीय में किया जा रहा है और निर्माण के बाद उसका क्षेत्रफल 27 सौ वर्ग फीट से अधिक हो गया तो वह यूडी टैक्स के दायरे में आ जाएगा। यदि भूखंड पर निर्माण के बाद उसका व्तवसायिक उपयोग होता है तो 900 वर्गफीट होने पर वह भी यूडी टैक्स के दायरे में आ जाएगी। ऐसे में सर्वे के आधार पर टैक्स वाली सम्पत्तियों की संख्या बढऩे की संभावना बनी रहती है।

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