परीक्षा से पहले ही खाली हो गए हाड़ौती के राजसेस कॉलेज
18 में से 16 कॉलेजों में फेकल्टी को किया कार्यमुक्त
राजसेस कॉलेजों में विद्या संबल फैकल्टी का मामला।
कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित हो रहे हाड़ौती के सभी राजसेस कॉलेज परीक्षा से पहले ही खाली हो गए। कोटा-बूंदी, बारां-झालावाड़ को मिलाकर यहां कुल 18 राजसेस कॉलेज हैं, जिनमें अध्यापन कार्य के लिए लगे विद्या संबल शिक्षकों को कार्य मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, चेचट व दीगोद ही ऐसे कॉलेज है, जिसमें फैकल्टी अभी कार्यरत हैं। लेकिन, उन्हें भी दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। जबकि, अभी तक कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा एग्जाम तिथि घोषित नहीं की गई है। इसके बावजूद शिक्षकों को हटाए जाने से शैक्षणिक व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई। एक ओर जहां शिक्षकों का रोजगार छीन गया वहीं, दूसरी ओर विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया। क्योंकि, इस वर्ष नए खुले राजसेस कॉलेजों में तो 12 नवम्बर तक एडमिशन हुए हैं और 21 फरवरी तक शिक्षक हटा दिए गए। कोर्स अधूरे होने से विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है। ऐसे में विद्यार्थी और शिक्षक दोनों ही मझधार में फंस गए। दरअसल, कोटा संभाग में 18 राजसेस कॉलेज हैं। जिनमें प्राचार्य के अलावा सभी सहायक आचार्यों की नियुक्ति विद्या संबल योजना के तहत की गई है। इनका वर्किंग-डे 28 फरवरी को पूरा होता है, लेकिन आयुक्तालय के नियम विसंगतियों के कारण अधिकतर कॉलेजों में 90 वर्किंग डेज होने पर शिक्षकों को हटा दिया गया। शेष रहे मात्र दो कॉलेज चेचट व दीगोद के शिक्षक 28 फरवरी को कार्यमुक्त होने से बेरोजगार हो जाएंगे।
मंझधार में हजारों विद्यार्थी
हाड़ौती के चारों जिलों में 18 राजसेस कॉलेजों में हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से यूजी प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं इसी माह में होने की संभावना है, हालांकि अभी तक परीक्षा का शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। पहली बार सेमेस्टर एग्जाम देने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा पैटर्न समझाने वाला भी कोई नहीं है।
शिक्षक-विद्यार्थी दोनों तनाव में
कोटा संभाग में राजसेस के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक बेरोजगार होने से तनाव में हैं, वहीं पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों को परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है। अभी तक कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा एग्जाम तिथि घोषित नहीं की गई है, इससे पहले ही शिक्षक हटाने से कोर्स अधूरे रह गए। जिससे परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में इन दिनों गुरु-शिष्य दोनों ही तनाव से गुजर रहे हैं।
नवम्बर तक एडमिशन, फरवरी में शिक्षक हटा दिए
हाड़ौती में हाल ही में तीन नए राजसेस कॉलेज खुले हैं। जिनमें कोटा में चेचट व दीगोद और बूंदी में लाखेरी और एक झालावाड़ के असनावर में खुला है। लाखेरी कॉलेज में तो 12 नवम्बर 2024 तक एडमिशन हुए हैं और 21 फरवरी 2025 तक सभी विद्या संबल शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया। ऐसे में कोर्स पूरा नहीं हो पाने से विद्यार्थी परेशान हैं। हालांकि, नए कॉलेजों में से दीगोद व चेचट में कक्षाएं चल रहीं हैं जो दो दिन बाद यानी 28 फरवरी को बंद हो जाएगी।
यह हैं राजेसस कॉलेज
कोटा जिले में राजकीय कला कन्या महाविद्यालय रामपुरा, चेचट, दीगोद, बूंदी में तालेड़ा, हिंडौली, लाखेरी, नैनवां, झालावाड़ में असनावर और बारां जिले में राजकीय गर्ल्स कॉलेज छबड़ा, नाहरगढ़, शाहबाद, गर्ल्स अटरू, गर्ल्स केलवाड़ा, कृषि महाविद्यालय बारां व शाहबाद सहित 18 कॉलेज शामिल हैं। इनमें कृषि को छोड़कर सभी आर्ट्स कॉलेज हैं, जिनमें सात-सात विषय संचालित हैं।
क्या कहते हैं विद्यार्थी
परिणाम बिगड़ने का सता रहा डर
अभी तक प्रथम सेमेस्टर का करीब 25% कोर्स अधूरा है। यूनिवर्सिटी के एग्जाम शेड्यूल जारी करने से पहले ही शिक्षक हटा दिए गए। ऐसे में अधूरा कोर्स पूरा कराने वाला भी कॉलेज में नहीं है। छात्रों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार क्वालिटी एजुकेशन देने का दवा करती है और दूसरी तरफ शिक्षकों को हटाने पर तुली है। शिक्षकों के बिना पास होने के भी लाले पड़ जाएंगे।
- उपेंद्र कुमार, तस्यम नेग, छात्र, लाखेरी व तालेड़ा कॉलेज
प्रायोगिक परीक्षाओं पर भी संकट
प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के बाद प्रेक्टिकल एग्जाम होने हैं, जिसकी तैयारी शिक्षकों के बिना नहीं हो पाएगी। गत वर्ष भी विद्या संबल शिक्षकों को बीच सत्र में ही हटा दिया था। उस समय पढ़ाई बेपटरी हो गई थी। सरकार राजसेस कॉलेजों में स्थाई शिक्षक तो लगाती नहीं, विद्या संबल पर लगे शिक्षकों को भी बीच सत्र में ही हटा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
- पुष्पेंद्र सिंह, हितेश नंदवाना, छात्र, प्रथम वर्ष अटरू कॉलेज
क्या कहते हैं शिक्षक
विद्या संबल पर लगे सभी शिक्षक वेल क्वालिफाइड हैं। यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार ही नियुक्ति होती है। इसके बावजूद बीच सत्र में हटा दिया। यह व्यवस्था विद्यार्थियों व शिक्षकों दोनों के हित में नहीं है। शिक्षक बेरोजगार हो गए वहीं स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो गई। ऐसे में सरकार योजना के नियमों में बदलाव कर हमें सैकंड सेमेस्टर तक लगाए रखें।
- डॉ. हनीफ खान, सहायक आचार्य विद्या संबल, राज.महा. रामपुरा कॉलेज कोटा
नियमों में हो एकरूपता
जब तक राजसेस कॉलेजों में स्थाई फैकल्टी की व्यवस्था न हो तब तक विद्या संबल को संविदा के समकक्ष ही लगाया जाना चाहिए। साथ ही शैक्षणिक के साथ गैर शैक्षणिक कार्यों की भी जिम्मेदारी देनी चाहिए। जिससे छात्रों को अन्य अशैक्षणिक कार्यों का लाभ मिल सकेगा। इन दिनों कॉलेजों में एग्जाम फॉर्म की हार्ड कॉपी जमा करवाई जा रही है। वहीं, स्कॉलर शिप सहित अन्य कार्यों के लिए शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थी परेशान है। ऐसे में सरकार, राजसेस कॉलेजों में नियमों की विसंगतियों को दूर कर एकरूपता अपनाई जानी चाहिए।
- डॉ. रवि कुमार नागर, प्रतिनिधि विद्या संबल योजना राजस्थान
विद्या संबल योजना में कई खामियां है। इस योजना में कार्यरत शिक्षकों को राजकीय व साप्ताहिक अवकाश का भी पैसा नहीं मिलता। इसके बावजूद पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाते हैं। भले ही हमें परमानेंट न करो लेकिन कम से कम 10 महीने तक तो रोजगार दो। सरकार, हमारे परिवार के बारे में भी सोचे, बीच सत्र में हम शिक्षक कहां जाएंगे।
- डॉ. शर्मिला कुमारी, सहायक अचार्य, राजकीय महाविद्यालय दीगोद
शाहबाद गर्ल्स कॉलेज में 15 फरवरी को ही शिक्षकों को रिलीव कर दिया गया। जबकि, कई कॉलेजों में तो कोर्स भी अधूरे हैं। विद्या संबल के शिक्षकों को 3-4 माह में ही हटा दिया जाता है, जो गलत है। सरकार को अपनी पॉलिसी में बदलाव कर एक साल तक के लिए स्थाई रखना चाहिए।
- डॉ. ज्योति गुप्ता, सहायक आचार्य शाहबाद गर्ल्स कॉलेज
इनका कहना है
यदि पाठ्यक्रम अधूरे हैं और संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य की मांग होती है तो रेस सेंटर से फेकल्टी लगाकर कोर्स पूरा करवाया जाएगा। रही बात आॅफिशियल कार्यों की तो इसकी व्यवस्था नोडल कॉलेज द्वारा की जा रही है। यदि कोई परेशानी होती है तो उसके समाधान के लिए नोडल महाविद्यालय अधिकृत है।
- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा
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