जमीन तय किए बिना सीवरेज प्लांट का काम, 41 करोड़ की योजना पर उठे सवाल
तीन साल बाद भी प्लांट के लिए जमीन नहीं
रावतभाटा में सड़कों की खुदाई सहित गारंटी पीरियड में पुनर्निर्माण और भुगतान प्रक्रिया पर विवाद।
भैंसरोड़गढ़/ रावतभाटा। रावतभाटा में मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत वर्ष 2023 में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) एवं पाइपलाइन बिछाने के लिए लगभग 41 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत की गई थी, जिसकी समयावधि वर्ष 2025 तक निर्धारित थी। लेकिन तीन वर्ष बीतने के बावजूद नगर पालिका के पास प्लांट स्थापित करने के लिए प्रस्तावित जमीन ही उपलब्ध नहीं है।जानकारी के अनुसार क्षेत्र एनजीटी के नियमों और जवाहर सागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी तथा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दायरे में आता है, जिसके चलते निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध और जमीन आवंटन में अड़चनें बताई जा रही हैं। इसके बावजूद नगर में सड़कों की खुदाई और पाइपलाइन कार्य शुरू कर दिए गए हैं। आरोप है कि वर्ष 2022 में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बनी सड़कों, जिनका गारंटी पीरियड अभी शेष है, उन्हें भी दोबारा खोदकर नई सड़कें बनाई जा रही हैं। इससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
योजना की पारदर्शिता और उद्देश्य पर गहराया संदेह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकृत फर्म को बिना जमीन तय हुए ही कार्यदिश जारी कर दिया गया और सीवरेज लाइन डालने के नाम पर ड्रेन चैंबर हटाकर सीसी सड़क निर्माण शुरू कर दिया गया। इससे योजना की पारदर्शिता और उद्देश्य पर संदेह गहराया है। पूरे मामले को लेकर शहरवासियों में असमंजस और चिंता का माहौल है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस योजना को लेकर क्या ठोस निर्णय लेता है और उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देता है।
इनका कहना है
यह पूरा मामला बेहद गंभीर है। बिना जमीन के योजना शुरू करना और गारंटी पीरियड की सड़कों को तोड़ना भ्रष्टाचार की आशंका को जन्म देता है।
- शंकर बुनकर, नगर काँग्रेस अध्यक्ष
रावतभाटा का अधिकांश क्षेत्र एनजीटी की धारा 20 के तहत प्रतिबंधित है और फिलहाल सीवरेज प्लांट का स्थान तय नहीं हुआ है। आगामी एक वर्ष में संबंधित विभागों और वन्य क्षेत्र प्रबंधन से समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा।
- विवेक गरासिया, तहसीलदार एवं वर्तमान नगर पालिका प्रशासक, रावतभाटा

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