घरों में घुस कर खाने-पीने की चीजें चुरा रहे बंदर

हर साल 800 से अधिक बंदर पकड़े जा रहे फिर भी नहीं घट रही संख्या

घरों में घुस कर खाने-पीने की चीजें चुरा रहे बंदर

शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए नगर निगम हर साल ठेका करता है।

कोटा । केस 1 - कैथूनीपोल निवासी अजय सिंह के मकान में छत के रास्ते आए दिन बंदर घुृसकर फ्रिज से खाने-पीने के सामान चुरा रहे हैं। हालत यह है कि बंदरों को भगाने के लिए उन्होंने घर में लठ रखा हुआ है। 

केस 2 - कैथूनीपोल मोखापाड़ा निवासी राधेश्याम नागर के मकान में आए दिन बंदर बॉलकनी से अंदर घुसकर रसोईघर में से सब्जी व रोटी चोरी कर ले जाते थे। अब बंदरों से बचने के लिए उन्होंने मकान को जाली से कवर करवा दिया है। 

केस 3 - कैथूनीपोलसाबरमती कॉलोनी निवासी मनीष शर्मा के मकान में बंदरों का इतना अधिक आतंक है कि वे खाने का सामान तो उठाकर ले ही जाते हैं। उन्हें भगाने पर सामान तक तोड़ जाते थे। ऐसे में उन्होंने मकान में ऊपर की तरफ बाहर लगे एसी की मशीन तक को जाली से कवर करवा लिया है। 

ये तो उदाहरण मात्र हैं। शहर में बंदरों के आतंक को बताने के लिए। शहर में ऐसे कई मकान हैं जहां लोगों ने बंदरों के आतंक से बचने के लिए न केवल पूरे मकान को ही जाली से पैक करवा लिया है। वरन् घरों में लठ रखे हुए हैं। किसी ने बाहर सामान रखना बंद कर दिया है। यहां तक कि बिना जाली के मकानों में तो लोग कपड़े तक बाहर नहीं सुखा पा रहे हैं। 

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पुराने शहर में अब अधिक
वैसे तो बंदर पूरे शहर में ही है। महावीर नगर हो या विश्वकर्मा नगरे। गणेश नगर हो या दादाबाड़ी। लेकिन वहां उनकी संख्या अपेक्षाकूत कम है। जबकि पुराने शहर के पाटनपोल, कैथूनीपोल, मोखापाड़ा, रामपुरा, सावरमती कॉलोनी में अधिक हैं। वहीं नयापुरा में सीबी गार्डन के अलावा मंदिरों में भी इनकी संख्या अधिक है। गोदावरी धाम, खड़े गणेशजी, नयापुरा स्थित पूर्व मुखी हनुमान मंदिर, रंगबाड़ी बालाजी मंदिर के अलावा किशोर सागर तालाब की पाल पर भी मंदिर नजर आ जाते हैं। यहां तो सुहब के समय लोग उन्हें केले और चलने खिलाते हुए देखे जा सकते हैं। यहां और गार्डन व मंदिरों में होने वाले आयोजनों के दौरान बंदर हाथ से खाने की चीजे छीनकर ले जाते हैं। आयोजनों के दौरान तो बंदरों को भगाने के लिए अलग से एक व्यक्ति लगाना पड़ता है। वह पटाखे चलाकर थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें भगाता रहता है। वरना वहां पंगत में खाना खाना ही मुश्किल हो जाता है। 

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निगम हर साल पकड़वा रहा बंदर
शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए उन्हें पकड़ने के लिए नगर निगम हर साल ठेका करता है। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण की ओर से किए जा रहे टेंडर में मथुरा की फर्म द्वारा बंदरों को पकड़ा जा रहा है। हर साल 800 से अधिक बंदर पकड़कर शहर से दूर छोड़े जा रहे हैं। उसके बाद भी इनकी संध्या कम नहीं हो रही है। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार मथुरा का संवेदक शिकायत पर संबंधित क्षेत्र में पिंजरा लगाकर बंदरों को पकड़ रहे हैं। इस सत्र में अप्रेल से 15 जुलाई तक ही करीब 475 बंदर पकड़े जा चुके हैं। 

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बाग-बगीचों से शहर में घुसे बंदर
पीड़ित तमन्ना भाटिया ने बताया कि  बाग-बगीचे अधिक होने से बंदर अधिकतर वहीं रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे बाग बगीचे कम होने से बंदरों की संख्या भी  कम होने लगी थी लेकिन  अधिकतर बंदर शहर में प्रवेश कर गए और घरों में घुसने लगे  हैं।  उषा सिंह ने कहा कि बंदरों को खाने के लिए सामान नहीं मिल रहा है। जबकि घरों में उन्हें फल, सब्जी, खाना और मिठाई समेत कई तरह की वैरायटी खाने को मिल रही है। जिससे उनकी संख्या शहर में बढ़ गई है। 

दरा व रावतभाटा के जंगल में छोड़ रहे
संवेदक इमामुद्दीन का कहना है कि कोटा में बंदरों की संख्या पहले से कम हुई है लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुए हैं। पहले रामपुरा व सीबी गार्डन से अधिक शिकायतें आती थी। लेकिन अब वहां से शिकायतें कम हुई है। साथ ही कई दिन पिंजरा लगाने पर भी गिनती के ही बंदर पकड़े जा रहे हैं। सीबी गार्डन की तरफ अधिक है। उन्होंने बताया कि बंदरिया साल में दो बार ही बच्चे को जन्म देती है। बंदरिया ढाई से तीन साल में ही फिर से बच्चे देने लगती है। उन्होंने बताया कि शहर से बंदर पकड़ने के बाद उन्हें 40 से 45 किमी. दूर दरा व रावतभाटा के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। जहां से वापस आना संभव नहीं है। बंदर 10 किमी. दूर से भी वापस नहीं आ सकता। बंदरों का बधियाकण भी नहीं हो रहा है। जिससे इनकी संख्या बढ़ रही है। 

इनका कहना है
शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए ही निगम द्वारा हर साल उन्हें पकड़ने का ठेका किया जाता है। जहां से भी शिकायतें अधिक आती हैं। वहां संवेदक के माध्यम से पिंजरा लगवाकर उन्हें पकड़ा जा रहा है। पकड़ने के बाद छोड़ा भी शहर से दूर जा रहा है। उसके बाद भी शहर में बंदर हैं लेकिन संख्या पहले से कम हुई है। चार महीने में ही 400 से अधिक बंदर पकड़े जा चुके हैं। 
- रिचा गौतम, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम कोटा दक्षिण

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