Voice of youth : छोटे व्यापारियों पर ही क्यों चलता है प्रशासन का डंडा?
फैक्ट्रियों और गोदामों तक क्यों नहीं पहुंचते जिम्मेदारों के कदम
कोटा। पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नियम-कानून तो बना दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आती है। 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में इनका इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। सवाल यह है कि आखिर प्लास्टिक की थैलियां बाजार तक पहुंच कहां से रही हैं? इन्हें बनाने वाली फैक्ट्रियों, सप्लाई करने वाले नेटवर्क और बड़े गोदामों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई करके ही पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी पूरी हो जाती है? दैनिक नवज्योति के वाइस ऑफ यूथ में युवाओं ने इसी दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्लास्टिक पर प्रतिबंध को प्रभावी बनाना है तो कार्रवाई की शुरुआत इसके उत्पादन और भंडारण के ठिकानों से होनी चाहिए।
जनता की आदत बदलना भी जरूरी
पॉलिथिन पर प्रतिबंध तभी सफल हो सकता है, जब आमजन खुद अपनी जिम्मेदारी समझे। बाजार में सामान खरीदने जाते समय घर से कपड़े या कागज का थैला लेकर निकलना चाहिए। दुकानदारों को भी ग्राहकों को प्लास्टिक की जगह पर्यावरण अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए। प्रशासन को प्लास्टिक बैग बनाने वाली फैक्ट्रियों और बड़े गोदामों पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। केवल छोटे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई करने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
-शियुअल पांचाल, स्टूडेंट
बड़ा जुर्माना ही लगाएगा अंकुश
प्लास्टिक की थैलियों पर रोक लगाने के लिए छोटी-मोटी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जब तक पॉलिथिन बनाने वालों और इसका इस्तेमाल कर सामान बेचने वालों पर बड़ा जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, तब तक इस पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। जुर्माने की राशि इतनी होनी चाहिए कि व्यापारी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से बचें। इसके स्थान पर पेपर बैग और कपड़े के थैलों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। आज कई बड़ी कंपनियां भी अपने उत्पाद कागज और कपड़े के बैग में उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे विकल्पों को छोटे व्यापारियों तक भी पहुंचाना जरूरी है।
-वरुण योगी, स्टूडेंट
आमजन की आदत में शामिल हो चुका है प्लास्टिक
प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसे एकदम से बंद करना आसान नहीं है, लेकिन लगातार जागरूकता अभियान चलाकर लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है। आमजन को बाजार से सामान खरीदते समय कागज या कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करना चाहिए। प्लास्टिक पर्यावरण के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। सरकार को प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों पर सख्ती करनी चाहिए और प्रतिबंधित प्लास्टिक के उत्पादन पर प्रभावी रोक लगानी चाहिए। जब उत्पादन ही बंद होगा, तभी बाजार में इसकी उपलब्धता कम होगी।
-कहकशा अंसारी, स्टूडेंट
गरीब दुकानदारों पर कार्रवाई से नहीं निकलेगा समाधान
प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के नाम पर गरीब सब्जी विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों की थैलियां जब्त करने से कोई खास फायदा नहीं होने वाला। सरकार को इस समस्या के स्थायी समाधान पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्लास्टिक के स्थान पर ऐसे विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए, जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक न हों और व्यापारियों व आमजन के बजट पर भी भारी न पड़ें। कागज की थैलियों के अलावा भी दूसरे पर्यावरण अनुकूल विकल्प तलाशने चाहिए, जिनकी कीमत प्लास्टिक की थैलियों के आसपास हो। प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने के लिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी जरूरी है।
-स्वस्ति मीणा, स्टूडेंट

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