50 हेक्टेयर में जंगल की दुनिया बसा रहा वन्यजीव विभाग

10 हजार पौधों से सजेगा जंगल, परिंदों का चहकेगा संसार

50 हेक्टेयर में जंगल की दुनिया बसा रहा वन्यजीव विभाग
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के सामने 2 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा नगर वन

कोटा। एक तरफ अभेड़ा का विशाल तालाब तो दूसरी तरफ जंगल का विस्तार और बीच में आकार लेता ऐसा पर्यटन स्थल, जहां पेड़ों की छांव में पक्षियों की चहचहाहट और खुले जंगल में विचरण करते वन्यजीव पर्यटकों के लिए जंगल सफारी का रोमांचक डेस्टिनेशन बनेगा। पर्यटकों के लिए शहर के बीचोंबीच जंगल की दुनिया को बसाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। वन्यजीव विभाग द्वारा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के सामने 50 हैक्टेयर में 2 करोड़ रुपए की लागत से नगर वन विकसित किया जा रहा है। यहां 10 हजार पौधे, वॉच टावर, ईको ट्रेल, सुरक्षा दीवार और नेचर व्यू पॉइंट तैयार किए जा रहे हैं। नगर वन के पूरा होने पर कोटा को शहर के करीब एक ऐसा पर्यटन स्थल मिलेगा, जहां जंगल, वन्यजीव और पक्षियों का संसार एक साथ नजर आएगा।

16 लाख का एंट्री गेट तैयार, प्रकृति का अहसास
नगर वन में प्रवेश के लिए 16 लाख रुपए की लागत से 14 फीट ऊंचा और 20 फीट चौड़ा आकर्षक गेट बनाया गया है। गेट पर वन्यजीवों की सजीव डमी लगाई गई हैं, जो प्रवेश के साथ ही पर्यटकों को जंगल और प्राकृतिक परिवेश का अहसास कराएगा।

सुरक्षा दीवार से संरक्षित होगा 50 हैक्टेयर का जंगल
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए करीब 50 लाख रुपए की लागत से एक हजार रनिंग मीटर सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है। 6 फीट ऊंची दीवार का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इससे नगर वन क्षेत्र की सीमा सुरक्षित होने के साथ वन्यजीवों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

8 हजार पौधे लगे, 2 हजार लगना बाकी
नगर वन में 22 लाख रुपए की लागत से 10 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें औषधीय, छायादार और फूलदार प्रजातियां शामिल हैं। करीब 8 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि शेष पौधों का रोपण जारी है। इनके बड़े होने के बाद क्षेत्र में पक्षियों के लिए भी अनुकूल प्राकृतिक आवास तैयार होगा। जहां परिंदों का संसार चहकेगा।

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वॉच टावर से होगी बर्ड वॉचिंग
अधिकारियों का कहना है कि नगर वन में पक्षी प्रेमियों के लिए वॉच टावर भी बनाया जा रहा है। यहां से वन क्षेत्र में विचरण करने वाले पक्षियों को देखा जा सकेगा। चौकी और वॉच टावर के निर्माण पर करीब 15 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। चौकी का निर्माण पूरा हो चुका है और इसकी दीवारों पर प्रकृति आधारित पेंटिंग्स करवाई गई हैं।

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पर्यटकों के लिए बन रही 2 किमी ईको टेल
पर्यटकों को वन क्षेत्र में घूमने के लिए करीब 5 लाख रुपए की लागत से 2 किमी लंबी ईको टेल विकसित की जा रही है। करीब एक हजार रनिंग मीटर ट्रेल का काम पूरा हो चुका है। टेल के जरिए पर्यटक वन क्षेत्र और प्राकृतिक परिवेश को करीब से देख सकेंगे।

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30 हैक्टेयर तालाब का भी हो रहा गहरीकरण
नगर वन क्षेत्र में मौजूद करीब 30 हैक्टेयर के अभेड़ा तालाब का भी गहरीकरण कराया जा रहा है। अभी तक करीब 2 हैक्टेयर हिस्से से मिट्टी निकाली जा चुकी है। गहराई बढ़ने से बारिश के दौरान तालाब की जलभराव क्षमता बढ़ेगी और गर्मियों में वन्यजीवों व पक्षियों के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहेगी।

आगे जंगल सफारी का मिल सकेगा मौका
वन्यजीव विभाग के अनुसार, 50 हैक्टेयर के इस वन क्षेत्र में पहले से ही शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में नगर वन के पूरी तरह विकसित होने के बाद यहां जंगल सफारी शुरू की जा सकती है। इससे पर्यटकों को खुले वन क्षेत्र में विचरण करते वन्यजीवों की प्रत्यक्ष साइटिंग का अवसर मिल सकेगा।

50 हैक्टेयर में विकसित हो रहा नगर वन कोटा के पर्यटन मानचित्र पर आकर्षण का केंद्र बनेगा। यहां शहरवासियों को जंगल, वन्यजीव और प्रकृति को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। 10 हजार पौधों के विकसित होने के बाद यह क्षेत्र पक्षियों के लिए भी बेहतर प्राकृतिक आवास बनेगा। हमारा प्रयास है कि पर्यटन के साथ प्रकृति संरक्षण और बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिले
-पंकज सिंह, सहायक वन संरक्षक वन्यजीव विभाग कोटा

शहर के बीच 50 हैक्टेयर यानी करीब 300 से अधिक बीघा क्षेत्र में नगर वन विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण के अधिकांश विकास कार्य 90 प्रतिशत पूरे हो चुके हैं और वॉच टावर का काम भी जारी है। हमारा प्रयास है कि मार्च तक शहरवासियों को प्रकृति और वन्यजीवों से रूबरू कराने वाला नया टूरिज्म डेस्टिनेशन मिल सके। यहां स्थानीय लोगों के साथ करणी माता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी जंगल और प्रकृति के बीच सुकूनभरा अनुभव मिलेगा। नगर वन के जरिए लोगों को प्रकृति से जोड़ने के साथ वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही हमारा उद्देश्य है।
-प्रमोद कुमार धाकड़, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा

 

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