कलक्टर ने मांगी वन विभाग से रिपोर्ट : कलक्ट्रेट पर मजदूरों का हंगामा पुलिस ने बल प्रयोग कर खदेड़ा

बकाया मेहनताना भुगतान की मांग

कलक्टर ने मांगी वन विभाग से रिपोर्ट : कलक्ट्रेट पर मजदूरों का हंगामा पुलिस ने बल प्रयोग कर खदेड़ा

महिलाओं और बच्चों के साथ प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार ने वन विभाग की साइट पर काम कराने के बावजूद भुगतान नहीं किया।

उदयपुर। कलक्ट्रेट के बाहर अपने बकाया मेहनताने के भुगतान को लेकर धरना दे रहे 100 से अधिक मजदूरों को पुलिस ने बलपूर्वक खदेड़ दिया। महिलाओं और बच्चों के साथ प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार ने वन विभाग की साइट पर काम कराने के बावजूद भुगतान नहीं किया। मजदूरों के अनुसार, ठेकेदार पर उनका करीब 47.53 लाख रुपए बकाया है। मध्य प्रदेश से आए मजदूर 3 मार्च से कलक्टर के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। दो रात वहीं बिताने के बाद वे कलक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठ गए। इसी दौरान एक महिला की तबीयत बिगड़ गई, जबकि दूसरी महिला बेहोश हो गई।

इससे पहले रात को एक गर्भवती महिला की तबीयत भी खराब हो गई थी। दोपहर करीब 2 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की। मजदूरों के मुताबिक, पुलिस ने डंडे मारकर उन्हें खदेड़ा, उनके बिस्तर और खाने का सामान फेंक दिया और जबरन वहां से हटाया। भूपालपुरा थाना प्रभारी ने चेतावनी दी कि कानून तोड़कर सड़क जाम की तो मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करेंगे। मामले में कलक्टर नमित मेहता ने कहा कि यह ठेकेदार और मजदूरों के बीच का मामला है। उन्होंने डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर  से इस संबंध में तत्काल रिपोर्ट मांगी है। कलक्टर ने कहा कि जो भी वास्तविक बकाया होगा, उसका भुगतान करवाया जाएगा।

मजदूरों का आरोप: 47.53 लाख रुपए बकाया
मजदूरों ने बताया कि वे वन विभाग के ठेकेदारों के लिए पौधरोपण के गडृढे खोदने का काम कर रहे थे। उन्होंने परसाद और काला मगरा क्षेत्र में काम किया था। उनके अनुसार, कुल भुगतान 51.12 लाख रुपए बनता था, लेकिन उन्हें सिर्फ 3.59 लाख रुपए मिले हैं। ठेकेदार बसंतीलाल और दिलीप सिंह पर 47.53 लाख रुपए बकाया हैं। 

ठेकेदार बोले: केवल 4.31 लाख रुपए बकाया
इधर ठेकेदार दिलीप सिंह ने मजदूरों के दावे को गलत बताते हुए कहा कि उनके पास सिर्फ 81,150 रुपए और बसंतीलाल पर करीब 3.50 लाख रुपए बकाया हैं। उन्होंने कहा कि कुल 4.31 लाख रुपए की बकाया राशि देने के लिए तैयार हैं, लेकिन मजदूर तीन गुना ज्यादा भुगतान मांग रहे हैं।

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