राजस्थान में ‘डॉग अटैक’ का खतरा : ‘स्कूल गेट से लेकर घर की चौखट तक’... हर दिन 400 से ज्यादा लोग हो रहे शिकार

हर रोज कोई ना कोई बन रहा शिकार

राजस्थान में ‘डॉग अटैक’ का खतरा : ‘स्कूल गेट से लेकर घर की चौखट तक’... हर दिन 400 से ज्यादा लोग हो रहे शिकार

सड़कों, गलियों और स्कूलों के बाहर आवारा कुत्तों के हमले तेजी से बढ़ रहे। अस्पतालों में रोज डॉग बाइट के मामले दर्ज हो रहे। सबसे ज्यादा बच्चे शिकार बन रहे। सुबह टहलते बुजुर्ग हों या कामकाजी लोग, कोई सुरक्षित नहीं। बढ़ती घटनाएं अब आमजन में डर और चिंता की बड़ी वजह बन चुकी हैं।

जयपुर। राजस्थान में सड़कों, गलियों और अब स्कूलों के बाहर एक खामोश खतरा तेजी से पैर पसार रहा है, यह खतरा है- आवारा कुत्तों का आमजन पर हमला करना। जीं हां, अस्पतालों में रोजाना डॉग बाइट के नए मामले दर्ज हो रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या बच्चों की है। खेलते-कूदते मासूम बच्चे अचानक कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। इसे लेकर परिवारों में डर का माहौल बढ़ता जा रहा है। हर साल आम लोगों पर कुत्तों के हमले करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। कुत्तों की बाइट के अधिकतर शिकार मासूम बच्चे होते हैं। सड़कों, गलियों, बाजारों और यहां तक कि स्कूलों के आसपास ऐसा खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिसका कोई ना कोई शिकार बन ही जाता है।

Dog Attacked 4 year old on first day of school in rajasthan स्कूल के पहले ही  दिन चार साल के मासूम पर कुत्ते ने कर दिया हमला; राजस्थान में दर्दनाक घटना,  Rajasthan

आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं अब छिटपुट नहीं रहीं, बल्कि लगातार सामने आ रही हैं। खेलते-कूदते मासूम बच्चे, सुबह की सैर पर निकले बुजुर्ग, दफ्तर जाते कर्मचारी या घर लौटती महिलाएं, कोई भी अचानक आवारा कुत्तों के हमले का शिकार हो रहा है। अस्पतालों में डॉग बाइट के बढ़ते मामले इस गंभीर स्थिति की साफ तस्वीर पेश कर रहे हैं। कई परिवारों के लिए यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि डर और चिंता की स्थायी वजह बन चुकी है। घाव भर जाते हैं, लेकिन दहशत और रेबीज का खतरा लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ता। आखिर प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है। इससे निपटने के लिए क्या कदम जरूरी हैं। 

राजस्थान में 2024 से 2025 के बीच डॉग बाइट की घटनाओं के आंकड़े 

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डॉग बाइट के मामले : NCDC RTI डेटा के अनुसार (राजस्थान) 2024 (जनवरी से दिसंबर): 1,40,543 से 1,42,606 मामले दर्ज हुए। 

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- यह 2023 के मुकाबले काफी बढ़ोतरी दिखाता है (2023 में लगभग 1,03,533) मामले दर्ज हुए थे। 

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डॉग बाइट के मामले : NCDC RTI डेटा के मुताबिक 2025 (जनवरी से दिसंबर): 1,51,870 मामले दर्ज हुए।  (2024 से 9,264 की बढ़ोतरी)।  

 कई जिलों में बढ़ोतरी: अलवर में 12,257, झुंझुनूं में 2,578, जयपुर में मासिक औसत 680 से अधिक।

कुल (2024 + 2025): लगभग 2,92,413 से 2,94,476 मामले।  औसतन प्रति दिन 400-410 मामले दर्ज होते है। 

ये रिपोर्टेड केस हैं (अस्पतालों/स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड), वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई मामूली या ग्रामीण केस रिपोर्ट नहीं होते।

 

वर्ष

कुल डॉग बाइट मामले

बढ़ोतरी (पिछले साल से)

मुख्य स्रोत

2024

1,40,543 – 1,42,606

  37,000+ (2023 से)

NCDC RTI / IDSP

2025

1,51,870

  9,264

NCDC RTI

कुल (दोनों   वर्ष)

2,92,413 – 2,94,476

      -

संयुक्त अनुमान

जोधपुर में डॉग बाइट के बढ़ते मामले: 12 दिनों में 629 लोग घायल, सर्दियों में  क्यों बढ़ता है खतरा? - rising dog bite cases in jodhpur 629 injured in 12  days winter risks explained-mobile

राजस्थान में डॉग बाइट की हाल ही की प्रमुख घटनाएं : 

श्रीडूंगरगढ़ : हाल ही में बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ के निकटवर्ती गांव ऊपनी स्थित स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल के गेट के निकट एक आवारा कुत्ते ने 4 साल के बच्चे पर हमला कर दिया। 4 वर्षीय बच्चा बड़े भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था। इसी दौरान बच्चा अचानक स्कूल परिसर से बाहर निकल आया। गेट के पास मौजूद आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह नोच लिया। कुत्ता बच्चे के सिर में गहरा घाव कर चुका था। 

जयपुर : गोपालपुरा बाइपास स्थित गोविंदा कॉलोनी में घर के बाहर खेल रहे साढ़े 3 साल के मौलिक सोनी नामक बच्चे पर कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ता बच्चे को घर के गेट से करीब 10 फीट खींचकर ले गया। बच्चे के पेट पर दो जगह काटने के निशान मिले। घटना के बाद बच्चा बाहर जाने से डरता है। 

झालावाड़ : जिले के खानपुर नगरपालिका क्षेत्र में आवारा कुत्तों ने एक मासूम बच्चे पर आक्रामक तरीके से हमला कर दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का आक्रोश बढ़ गया। यह बच्चा शाम के समय अपने घर लौट रहा था। इस दौरान श्वान ने बच्चे पर हमला कर दिया। श्वान के झपट्टा मारने से बच्चा घायल हो गया। 

जोधपुर : एक 9 साल के बच्चे पर कुत्ते ने हमला कर घायल कर दिया। घटना के सीसीटीवी में देखा जा सकता है कि कुत्ते ने बच्चे को जबड़े से पकड़कर घसीटा और सिर, हाथ व पैर को नोच डाला। बच्चे की चीख सुनकर मौके पर मौजूद लोग दौड़कर आए। कुत्ते को भगाकर बच्चे को छुड़ाया। 

उदयपुर : शहर में पिछोला झील के पास अल सुबह सिंगापुर निवासी पर्यटक मार्निंग वॉक पर थे। इस दौरान पीछे से आए एक आवारा कुत्ते ने उन पर हमला करते हुए उनका एक पैर पर काट लिया। इससे वह लहूलुहान हो गए। 

अलवर : खैरथल-तिजारा के माचा गांव में एक कुत्ते ने 4 साल के मासूम पर अचानक हमला कर दिया। आवारा श्वान ने बच्चे को जबड़े में दबाकर करीब 100 मीटर तक घसीटा। बच्चे की मां पास में ही थी, लेकिन कुत्ते की आक्रामकता के कारण वह उसे बचा नहीं पाई। कुत्ते ने मासूम के सिर, दोनों आंखों और एक हाथ की अंगुलियों व दूसरे हाथ की बाजू को बुरी तरह नोच डाला। करीब 30 सेकंड तक कुत्ता बच्चे को जबड़े में दबाए रहा। हमले से बच्चा खून से लथपथ हो गया। 

बांसवाड़ा : घर के बाहर खेल रहे 3 साल के मासूम पर आवारा कुत्ते ने हाथ पर झपट्टा मारा और बुरी तरह नोच डाला। बच्चे के चेहरे पर पंजे गड़ाने से बच्चा बुर तरह घायल हो गसा। 3 साल का बच्चा घर के पास खेल रहा था, तभी अचानक कुत्ते ने आकर उस पर हमला कर दिया। कुत्ते के हमले से मासूम के शरीर पर कई जगह गहरे जख्म हो हैं, जिससे काफी खून बह गया।

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 डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के कारण : 

  • कुत्तों की बढ़ती आबादी

  • खराब कचरा प्रबंधन (खुले में मीट/होटल वेस्ट)

  • झुंड में रहने से आक्रामक व्यवहार

  • पिल्लों के आसपास आक्रामकता ( लोग उनसे छेड़छाड़ करते है, मादा कुत्ते अपने बच्चों की सुरक्षा में अधिक हमलावर हो जाती हैं)

  • मानवीय उकसावे ( पत्थर मारना, छेड़ना या डराना)

  • रेबीज संक्रमित या बीमार कुत्ते

  • डॉग कैचर टीमों की कमी और धीमी कार्रवाई

 

डॉग बाइट को रोकने के उपाय :

  1. एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) प्रोग्राम को मजबूत करना।
  2. स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से कुत्तों को हटाना।
  3. डॉग शेल्टर की व्यवस्था।
  4. रेबीज वैक्सीनेशन और पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) को मजबूत करना।
  5. कचरा प्रबंधन और फीडिंग कंट्रोल, खुले कचरे को बंद करना।
  6. स्कूलों में जागरूकता बढ़ाना।

 

डॉग बाइट के बाद क्या करें?

  • घाव को तुरंत पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं। 

  • एंटीसेप्टिक लगाएं।

  • तुरंत नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाएं। 

  • घाव में बिना डॉक्टर की सलाह के टांके न लगवाएं।

  • घरेलू इलाज से बचें।   

 

इनका कहना है :

लोगों में कुत्तों के व्यवहार को लेकर जागरूकता की कमी है। छोटे बच्चे अक्सर कुत्तों को देखकर भागते हैं, जिससे कुत्ता असुरक्षित महसूस कर हमला कर सकता है। ऐसी स्थिति में शांत रहें, अचानक हरकत न करें और धीरे-धीरे वहां से निकलें। इससे श्वान के हमला करने की आशंका कम हो जाती है। डॉग बाइट के बाद तुरंत रेबीज का इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है। 

- डॉ. राकेश बिजानरिया, फॉनिक्स पेट हॉस्पिटल।

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