700 साल पुरानी पाताल की दुनिया, जहां जमीन के नीचे नमक से बसाया गया पूरा शहर; जानें 300 किलोमीटर लंबी सुरंगों में छिपे इस अद्भुत संसार के बारे में
नमक उत्पादन से विश्व धरोहर बनने तक का सफर
पोलैंड। दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जिनकी बनावट और इतिहास किसी कल्पना से कम नहीं लगते। पोलैंड के क्राको शहर के नजदीक स्थित विएलिज्का नमक खदान भी ऐसी ही अनोखी जगह है। यहां जमीन के नीचे एक विशाल संसार बसा हुआ है, जिसमें चर्च, झीलें, मूर्तियां, बड़े-बड़े हॉल और लंबे गलियारे मौजूद हैं। इसकी खासियत यह है कि यहां की ज्यादातर कलाकृतियां और सजावट नमक को तराशकर तैयार की गई हैं।
इस खदान में नमक निकालने का काम 13वीं शताब्दी में शुरू हुआ था। उस समय नमक भोजन को सुरक्षित रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। कई पीढ़ियों तक खनिकों ने यहां काम किया और धीरे-धीरे भूमिगत कमरों को अनूठी कलाकृतियों से सजा दिया। वर्ष 1978 में इसे यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में जगह मिली।
इस खदान का सबसे आकर्षक हिस्सा सेंट किंगा चैपल है, जो जमीन से करीब 101 मीटर नीचे स्थित है। इसकी दीवारों, फर्श, मूर्तियों और झूमरों में नमक का इस्तेमाल किया गया है। यहां नमकीन पानी की झीलें भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। खदान में करीब 300 किलोमीटर लंबे भूमिगत रास्ते और लगभग 3000 कमरे बताए जाते हैं। इसकी गहराई करीब 327 मीटर तक है। हालांकि पर्यटकों के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर का रास्ता खुला है। कभी नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र रही यह जगह आज सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीत समारोहों और पर्यटन के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

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