'धमकियों से डरने वाले नहीं...',ग्रीनलैंड तनाव, यूक्रेन के लिए खतरे का संकेत 

अमेरिका-यूरोप तनाव से यूक्रेन की सुरक्षा को खतरा

'धमकियों से डरने वाले नहीं...',ग्रीनलैंड तनाव, यूक्रेन के लिए खतरे का संकेत 

गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते मतभेद यूक्रेन के लिए घातक हो सकते हैं। ट्रंप की टैरिफ धमकियों से नाटो की एकता और सैन्य सहायता प्रभावित होने की आशंका है।

मैनचेस्टर। ग्रीनलैंड के अधिग्रहण को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच चल रहा तनाव यूक्रेन के लिए विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। गार्जियन अखबार की सोमवार की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय नेता अब एक विकट स्थिति का सामना कर रहे हैं, क्योंकि यूक्रेन संघर्ष में अभी भी अमेरिका के समर्थन की जरूरत है, लेकिन इस तनाव के कारण स्थिति विकट होती नजर आ रही है। 

गार्जियन ने बताया कि जुलाई में, यूरोपीय संघ (ईयू) ने इस उम्मीद से अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे कि यह समझौता अमेरिका को संघर्ष में यूक्रेन का समर्थन जारी रखने के लिए मजबूर करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को घोषणा कि थी कि वह फरवरी में डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएंगे, जो बाद में बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि यह तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि  अमेरिका ग्रीनलैंड की खरीद सौदे पर हस्ताक्षर नहीं कर लेता।

राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व का हवाला देते हुए बार-बार कहा है कि इसे अमेरिका का हिस्सा बनना चाहिए। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने हालांकि अमेरिका को द्वीप पर कब्जा करने के खिलाफ चेतावनी दी है और इस बात पर जोर दिया है कि वे अमेरिका से अपनी क्षेत्रीय अखंडता के प्रति सम्मान की अपेक्षा करते हैं।

यह द्वीप 1953 तक डेनमार्क का उपनिवेश था। वर्ष 2009 में स्वायत्तता प्राप्त करने के बाद से यह डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा बना रहा है, जिसके पास स्व-शासन और अपनी घरेलू नीति निर्धारित करने की क्षमता है।

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