आरआईसी फोरम के फिर से सक्रिय होने पर रूसी राजदूत ने दिया बड़ा बयान, कहा- रूस आरआईसी को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए उत्सुक

विदेश मंत्री लावरोव ने भी उम्मीद जताई थी

आरआईसी फोरम के फिर से सक्रिय होने पर रूसी राजदूत ने दिया बड़ा बयान, कहा- रूस आरआईसी को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए उत्सुक

रूस ने भारत और चीन के साथ अपने त्रिपक्षीय फोरम (आरआईसी) के फिर से शुरू होने की उम्मीद जताई है

मॉस्को। रूस ने भारत और चीन के साथ अपने त्रिपक्षीय फोरम (आरआईसी) के फिर से शुरू होने की उम्मीद जताई है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा है कि उनका देश इस मंच को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए उत्सुक है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भारत और चीन अपने विवादों को पीछे छोड़ते हुए इस पर आगे बढ़ेंगे। अलीपोव ने ये माना कि चीन और भारत के रिश्ते सहज नहीं हैं। साथ ही उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि दोनों देशों के संबंधों में सुधार आएगा।

डेनिस अलीपोव ने कहा, यह प्रारूप (आईआरसी फोरम) 20 वर्षों से ज्यादा समय से चला आ रहा है। हमने इस फोरम के मंच से शिखर सम्मेलन, विदेश मंत्रियों की नियमित उच्चस्तरीय बैठकें और सक्रिय कार्यकारी स्तर के संपर्क आयोजित किए हैं। इसके तहत हमारा सहयोग अत्यधिक सफल रहा है। इस मंच का इतिहास उत्साह को बढ़ाने वाला है।

विदेश मंत्री लावरोव ने भी उम्मीद जताई थी
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पिछले महीने आरआईसी वार्ता फिर से शुरू करने की ख्वाहिश का इजहार किया था। उन्होंने कहा था कि इसे फिर से शुरू किया जाए। इसके बाद चीन की ओर से भी इस फोरम को फिर से शुरू करने पर अपनी सहमति दी गई। अभी तक भारत ने कोई स्पष्ट बात इस मुद्दे पर नहीं कही है। हालांकि अलीपोव के बयान के बाद माना जा रहा है कि उनको दिल्ली से सकारात्मक संदेश मिला है, तभी वह विश्वास से इस पर बोल रहे हैं।

मुझे उम्मीद, फिर होगी शुरुआत
अलीपोव ने आगे कहा, मुझे उम्मीद है कि हम जल्दी ही नियमित रूप से यह बातचीत (फोरम की बैठकें) फिर शुरू करेंगे। हाल के वर्षों में भारत-चीन संबंधों में तनाव के कारण यह रुका हुआ है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और चीन दोनों इस सिद्धांत को मानते हैं कि उनके संबंध सहयोग पर आधारित होने चाहिए ना कि टकराव बढ़ाना चाहिए। ऐसे में मुझे फोरम के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है।

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कैसे शुरू हुई सुगबुगाहट
भारत, चीन और रूस की तिकड़ी यानी आरआईसी त्रिपक्षीय फोरम के सक्रिय होने की सुगबुगाहट हाल ही में शुरू हुई है। रूस के विदेश मंत्री की ओर से इस पर बयान के बाद इस पर चर्चा शुरू हुई। चीन भी इस मुद्दे पर मौटेतौर पर सहमत दिखा है कि ये फोरम सक्रिय हो। हालांकि इसमें अभी तक एक बड़ी अड़चन चीन और भारत का रिश्ता बनता दिख रहा है। रूस के चीन और भारत दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। दूसरी ओर भारत और चीन का सीमा विवाद दशकों पुराना है। आरआईसी (रूस, भारत, चीन के नाम के शुरूआती अक्षर) की शुरूआत 1990 के दशक में हुई थी। इसे येवगेनी प्रिमाकोव (पूर्व रूसी प्रधानमंत्री) की पहल पर स्थापित किया गया था। इस त्रिपक्षीय मंच का उद्देश्य गैर-पश्चिमी शक्तियों में सहयोग को बढ़ाते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था मजबूत करना है। हालांकि बीते कई वर्षों से यह फोरम निष्क्रिय है।

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