अमेरिकी सांसदों ने अमेरिका-भारत साझेदारी पर प्रस्ताव किया पेश

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी पर द्विदलीय प्रस्ताव

अमेरिकी सांसदों ने अमेरिका-भारत साझेदारी पर प्रस्ताव किया पेश

अमेरिकी सांसद एमी बेरा और जो विल्सन द्वारा पेश द्विदलीय प्रस्ताव में अमेरिका-भारत साझेदारी के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया गया। प्रस्ताव रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत बताता है तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की प्रमुख भूमिका पर जोर देता है।

नई दिल्ली। अमेरिकी संसद में सबसे लंबे समय तक  सदस्य एमी बेरा और जो विल्सन ने एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें अमेरिका और भारत के बीच दीर्घकालिक साझेदारी के रणनीतिक महत्व, स्थिरता और साझा लोकतांत्रिक प्राथमिकताओं को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका की पुष्टि की गई है। इस प्रस्ताव को मजबूत द्विदलीय समर्थन प्राप्त हुआ है जिसमें सिडनी कामलागर-डोव, रिच मैककॉर्मिक, डेबोरा रॉस, रॉब विटमैन, सुहास सुब्रमण्यम और जे ओबरनोल्टे सहित 24 मूल सह-प्रायोजक शामिल हैं।

यह प्रस्ताव विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, आतंकवाद-रोधी, शिक्षा एवं ऊर्जा सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दशकों से बढ़ते सहयोग पर बल देता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और एक स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका का भी उल्लेख करता है। इसमें अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इसमें कहा गया है कि, इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन) ने ली थी जो दक्षिण एशिया में सीमा पार और छद्म आतंकवाद के लगातार खतरे को उजागर करता है।

यह आतंकवाद से लड़ने में सहयोगात्मक प्रयासों को भी रेखांकित करता है, जैसे कि खुफिया जानकारी साझा करना, प्रत्यर्पण तथा आतंकवादी घोषित करना, जिसमें पहलगाम हमले के बाद अमेरिका द्वारा द रेजिस्टेंस फ्रंट को आतंकवादी घोषित करना भी शामिल है। अमेरिकी सांसदों ने इस बात पर बल दिया कि भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए समर्थन पार्टी लाइन एवं राष्ट्रपति बदलने के बावजूद निरंतर रहा है।

प्रस्ताव में कहा गया है, तीन दशकों से अधिक समय से, अमेरिकी राष्ट्रपति क्लिंटन, बुश, ओबामा, ट्रम्प और बाइडेन के नेतृत्व में अमेरिका ने भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है तथा क्षेत्रीय स्थिरता, लोकतांत्रिक शासन एवं  साझा वैश्विक प्राथमिकताओं के लिए इसके महत्व की पहचान की है।

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आर्थिक समृद्धि बढ़ाने के लिए भारत की सराहना 

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यह उपाय आतंकवाद से निपटने एवं साइबर खतरों से लेकर उभरती प्रौद्योगिकियों तक 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर सहयोग का आह्वान करता है तथा भारतीय अमेरिकी प्रवासियों द्वारा मजबूत किए गए लोगों से लोगों के बीच स्थायी संबंधों को स्वीकार करता है। इसमें भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को भी मान्यता दी गई है तथा अमेरिकी ऊर्जा संसाधनों की खरीद बढ़ाने, पारस्परिक ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक समृद्धि बढ़ाने के लिए भारत की सराहना की गई है।

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प्रस्ताव में इस बात पर बल दिया गया है कि अमेरिका-भारत साझेदारी में दोनों देशों के नागरिकों को लाभ पहुंचाने तथा 21वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।  यह प्रस्ताव अमेरिका-भारत साझेदारी को वाशिंगटन की हिंद-प्रशांत रणनीति के केंद्र के रूप में उजागर करता है और क्वाड के महत्व को रेखांकित करता है जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। 

2004 में रणनीतिक साझेदारी में अगले कदम पर हस्ताक्षर शामिल 

यह प्रस्ताव अमेरिका और भारत को क्वाड के माध्यम से एक स्वतंत्र, खुले एवं लचीले हिंद-प्रशांत के लिए सहयोग जारी रखने और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करता है और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से आर्थिक पहलों में भारत की भागीदारी, क्वाड में इसकी भागीदारी एवं सहयोग का स्वागत करता है। यह प्रस्ताव पांच कांग्रेस सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प को लिखे गए पत्र के कुछ सप्ताह बाद आया है, जिसमें भारत-अमेरिका संबंधों पर इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों के कारण एच-1बी वीजा पर 19 सितंबर की घोषणा पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया था।

प्रस्ताव में अमेरिका-भारत साझेदारी में कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें 2004 में रणनीतिक साझेदारी में अगले कदम पर हस्ताक्षर शामिल हैं, जिसने नागरिक परमाणु ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी में सहयोग का विस्तार किया, इसके बाद 2005-2008 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौता, जिनकी समाप्ति अमेरिका-भारत 123 समझौते के रूप में हुई। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को लेकर रिपब्लिकन्स से ज्यादा उत्साहित हैं.

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