गुब्बारे फोड़ने वाली गन से एशियाई खेलों में पदक तक पहुंची मानिनी

बेटी के लिए पिता भी बने निशानेबाज

गुब्बारे फोड़ने वाली गन से एशियाई खेलों में पदक तक पहुंची मानिनी

कौशिक ने बताया कि घर की गैलेरी में ही खिलौने वाली गन से गुब्बारों पर निशाना साधते हुए मानिनी की शूटिंग में रुचि बनी। उन्होंने बताया कि वे पहली बार बेटी को जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज पर लेकर गए।

खेप्र/नवज्योति, जयपुर। बैडमिंटन के खेल से शूटिंग में आई जयपुर की मानिनी कौशिक की एशियाई खेलों में कामयाबी के पीछे पिता अनिल कौशिक की भी बड़ी भूमिका रही है। बेटी के साथ वे खुद भी निशानेबाज बने और नेशनल चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया। अनिल कौशिक न्यायिक सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। कौशिक के अनुसार खेलों में मानिनी ने शुरुआत बैडमिंटन से की और जिला और राज्य स्तर पर मुकाबले खेले। मानिनी की शूटिंग से जुड़ाव की कहानी भी रोचक रही है। गुब्बारे फोड़ने वाली गन से शुरुआत कर मानिनी आज एशियाई खेलों में पदक तक पहुंची है।

कौशिक ने बताया कि घर की गैलेरी में ही खिलौने वाली गन से गुब्बारों पर निशाना साधते हुए मानिनी की शूटिंग में रुचि बनी। उन्होंने बताया कि वे पहली बार बेटी को जगतपुरा स्थित शूटिंग रेंज पर लेकर गए। वहां उसने सटीक निशाने लगाए तो कोच ने तब ही कह दिया कि ये देश के लिए पदक जीतेगी। मानिनी ने इसके बाद गगन नारंग की एकेडमी में ट्रेनिंग ली और वर्तमान में वे इंडिया टीम के कोच मनोज कुमार के पास ट्रेनिंग ले रही हैं। कौशिक ने बताया कि शुरुआत में मानिनी ने 10 मीटर राइफल स्पर्धा में हिस्सा लिया और पदक भी जीते। डेढ़ साल पहले ही उन्होंने 50 मीटर में शुरुआत की। 50 मीटर में बेटी को प्रोत्साहन के लिए उन्होंने खुद भी निशानेबाजी सीखी और दो बार नेशनल में भी हिस्सा लिया। कौशिक ने बताया कि जूनियर लेबल पर इस स्पर्धा में मानिनी के काफी मैडल हैं। पिछले दिनों चीन में ही हुए वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भी मानिनी ने टीम स्पर्धा में नये वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता था। 

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