वाइब्रेंट विलेज्स प्रोग्राम-कक को कैबिनेट की मंजूरी, राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के सीमावर्ती गांवों का होगा व्यापक विकास
रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
मोदी कैबिनेट ने भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं पर स्थित गांवों के विकास के लिए पूर्ण रूप से वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-कक को मंजूरी दे दी है
नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय भूमि सीमाओं पर स्थित गांवों के विकास के लिए पूर्ण रूप से वित्तपोषित केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-कक को मंजूरी दे दी है। राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के सीमावर्ती गांवों के व्यापक विकास के लिए कुल 6,839 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य समृद्ध और सुरक्षित सीमाओं को सुनिश्चित करने, सीमा पार अपराध को नियंत्रित करने और सीमावर्ती आबादी को राष्ट्र के साथ आत्मसात करने और उन्हें सीमा सुरक्षा बलों की आंख और कान के रूप में विकसित करने के लिए बेहतर जीवन स्थितियां और पर्याप्त आजीविका के अवसर पैदा करना है, जो आंतरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-कक को मंजूरी दे गई। यह सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत भूमि सीमाओं, के लिए विकसित भारत/2047 के दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है। यह कार्यक्रम वीवीपी-क के तहत पहले से ही कवर की गई उत्तरी सीमा के अलावा अंतर्राष्ट्रीय भूमि सीमाओं से सटे ब्लॉकों में स्थित गांवों के व्यापक विकास में मदद करेगा। इस योजना को राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के चुनिंदा रणनीतिक गांवों में वित्त वर्ष 2028-29 तक लागू किया जाएगा। परियोजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जाएगा और पीएम गति शक्ति जैसे सूचना डेटाबेस का उपयोग किया जाएगा।
रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
मोदी कैबिनेट ने भारतीय रेलवे की क्षमता को बढ़ाने के लिए चार प्रमुख मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं पर 18,658 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इन्हें वित्त वर्ष 2030-31 तक पूरा कर लिया जाएगा। यह परियोजनाएं महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के 15 जिलों में 1,247 किलोमीटर तक विस्तारित होंगी। ये परियोजनाएं पीएम मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को ‘आत्मनिर्भर’ बनाएंगी, जिससे उनके लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा हैं, जिसमें एकीकृत योजना की आवश्यकता होती है और ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
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