पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार, आपत्तियों की समय सीमा आज पूरी: चुनाव आयोग
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और हटाने की समय सीमा आज समाप्त
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की विस्तारित समय सीमा 19 जनवरी को समाप्त हो रही है। अब तक करीब 9.12 लाख नए आवेदन प्राप्त हुए हैं।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मसौदा मतदाता सूची पर आवेदन और आपत्तियां दाखिल करने की चुनाव आयोग की विस्तारित समय सीमा सोमवार को समाप्त हो जायेगी। इसी के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के शिकायत और दावा चरण का समाप्त हो जायेगा।
आयोग ने एसआईआर की घोषणा के समय ही स्पष्ट कर दिया था कि मतदाताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति होगी। पश्चिम बंगाल में इस तरह के आवेदनों को जमा करने की अंतिम तिथि 19 जनवरी निर्धारित की गयी थी। आज समय सीमा समाप्ति के बाद अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन तक कोई ताजा आवेदन या आपत्तियां स्वीकार नहीं की जायेंगी।
प्रारंभिक मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित की गयी थी और आयोग ने 17 दिसंबर से दावे और आपत्तियां स्वीकार करना शुरू कर दिया था। इस दौरान मतदाताओं ने या तो मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया या फिर फॉर्म-7 जमा कर नाम हटाने की मांग की। राजनीतिक दलों ने भी अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के जरिये आवेदन किया।
पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित की गयी थी। चुनाव आयोग ने हालांकि बाद में समय सीमा चार दिनों के लिए बढ़ा दी थी। सुनवाई प्रक्रिया सात फरवरी तक जारी रहेगी। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है, वे चाहें तो जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। यह सुविधा आवेदन विंडो बंद होने के बावजूद मतदाताओं के लिए सात फरवरी तक खुली रहेगी।
आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, रविवार रात तक के मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद मतदाता सूची में शामिल किये जाने के आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रारंभिक सूची के प्रकाशित होने से पहले नये नामों को शामिल कराने के लिए 3,31,075 आवेदन प्राप्त हुए थे। प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के बाद के एक महीने में नाम शामिल कराने के लिए 5,59,053 और आवेदन जमा कराये गये।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अब तक कुल 9,12,128 लोगों ने आवेदन दिया है। तय समय में नाम हटाने के लिए 56,867 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के बाद ऐसे 41,847 और आवेदन दायर किये गये। कुल मिलाकर नाम हटाने के लिए करीब एक लाख आवेदन आयोग के सामने आये हैं। राजनीतिक मोर्चे पर तृणमूल कांग्रेस ने 13 मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया है, जिन्हें मतदाता सूची के मसौदे में 'मृत' दिखाया गया था। पिछले कुछ दिनों में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक बैठकों में बार-बार यह मुद्दा उठाया और उन व्यक्तियों को पेश कर दावा किया कि मसौदा सूची में मृत के रूप में दर्ज होने के बावजूद वे जीवित हैं।
इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने कई मौकों पर जवाब दिया है। कुछ मामलों में गलतियां मानी हैं और कुछ में संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों से सफाई मांगी है। ऐसा माना जा रहा है कि तृणमूल की तरफ से जमा किये गये आवेदन इन 13 'मृत' मतदाताओं से जुड़ी हैं। इसकी तुलना में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे सिर्फ एक को शामिल कराने के लिए आवेदन दी है। इसके विपरीत भाजपा की ओर से नाम हटाने की मांग करने वाले सबसे अधिक आवेदन आये हैं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने 591 नामों को हटाने की मांग की है, जबकि तृणमूल ने केवल 13 नाम हटाने के लिए आवेदन किया है।

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