कर्नाटक में हाई-वोल्टेज ड्रामा खत्म: सीएम शिवकुमार ने मंत्रियों को फोन करना किया शुरू, मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ
20 नए मंत्रियों का चयन
बेंगलुरु। कर्नाटक मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले लगभग दो महीने की राजनीतिक अनिश्चितता, घमासान लॉबिंग और हाई-वोल्टेज वार्ताओं का दौर खत्म होने का संकेत देते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को मंत्री पद के लिए चुने गये कांग्रेस विधायकों को व्यक्तिगत रूप से फोन करना शुरू कर दिया है। यह फोन कॉल अंतिम सूची को कांग्रेस आलाकमान की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद किये जा रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में राष्ट्रीय राजधानी में लंबी मैराथन बैठकें हुईं, जिसके बाद यह मंजूरी मिली है। इससे 20 नये मंत्रियों के शामिल होने और मंत्रिपरिषद की सदस्य संख्या 34 की अधिकतम सीमा तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया।
यह मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री शिवकुमार के तीन जून को पदभार संभालने के बाद कांग्रेस सरकार के सामने आई सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील कवायदों में से एक का समापन है। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने 60 से अधिक दावेदारों के परस्पर प्रतिस्पर्धी दावों पर विचार करते हुए जातीय, क्षेत्रीय, सामुदायिक और गुटीय संतुलन साधने की कोशिश की। मूल रूप से 31 जुलाई के लिए निर्धारित, इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया था, क्योंकि नेतृत्व आम सहमति पर पहुंचने से पहले प्रतिद्वंद्वी दावेदारों को समायोजित करने और मंत्रालय के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को अंतिम रूप देने के लिए संघर्ष कर रहा था।
मुख्यमंत्री का फोन आने के तुरंत बाद, कई संभावित मंत्रियों ने अपने शामिल होने की पुष्टि की, जबकि लोक भवन के ग्लास हाउस में शाम को आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की उम्मीद में समर्थकों के एकत्र होने से उनके आवासों के बाहर जश्न शुरू हो गया है। फोन आने की पुष्टि करने वालों में शिवराज तंगड़ागी भी शामिल हैं। तंगड़ागी ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे मुख्यमंत्री ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कहा है। राज्य की सेवा करने का एक और मौका देने के लिए मैं खरगे, शिवकुमार, सिद्दारमैया, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और सोनिया गांधी को धन्यवाद देता हूं।" उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, वे उसे स्वीकार करेंगे।
एक अन्य संभावित मंत्री मधु बंगारप्पा ने इस नियुक्ति को बड़ी जिम्मेदारी बताया और कहा कि वे उन्हें सौंपे गये किसी भी विभाग में सेवा देने के लिए तैयार हैं। पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव, जिनकी मंत्रिमंडल में वापसी की संभावना नहीं है, ने मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया पूरी होने का स्वागत करते हुए कहा कि देरी से उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा, "दूसरों को भी अवसर मिलना चाहिए और अनुभव हासिल करना चाहिए।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले ही तीन वर्ष तक मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, संभावित सूची में पीएम नरेंद्रस्वामी, तंगड़ागी, रुद्रप्पा लमाणी, केएस बसवंतप्पा, बी नागेंद्र, रघुमूर्ति, जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुट्टरंग शेट्टी, मानकल एस वैद्य, अजय सिंह, चेलुवरायास्वामी, शिवलिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण, गायत्री शांतेगौड़ा, बसवराज रायरेड्डी, जयानंद कशप्पनवर और लक्ष्मण सावदी शामिल हैं, हालांकि अंतिम सूची का पता आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। मंत्रिमंडल का गठन लगभग तय होने के बाद अब सारा राजनीतिक ध्यान प्रमुख विभागों के बंटवारे पर रहेगा। यह अगला बड़ा कदम शिवकुमार सरकार के भीतर शक्ति का संतुलन तय करेगा और कांग्रेस के बनाये जातीय, क्षेत्रीय और गुटीय समीकरणों की कड़ी परीक्षा भी लेगा।

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