गुजरात में रेलवे अवसंरचना का तीव्र विकास, परियोजनाओं में ऐतिहासिक प्रगति

गुजरात में रेलवे विकास को रफ्तार

गुजरात में रेलवे अवसंरचना का तीव्र विकास, परियोजनाओं में ऐतिहासिक प्रगति

गुजरात में रेलवे निवेश 29 गुना बढ़ा। बुलेट ट्रेन, नए ट्रैक, अमृत स्टेशन, कवच प्रणाली और बंदरगाह संपर्क से यात्री व लॉजिस्टिक क्षमता मजबूत हुई।

अहमदाबाद। गुजरात में रेलवे अवसंरचना के विकास कार्य अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2014 से पूर्व जहां वार्षिक पूंजीगत व्यय लगभग 539 करोड़ था, वहीं वर्तमान में यह बढ़कर 17,155 करोड़ तक पहुंच गया है, जो लगभग 29 गुना वृद्धि को दर्शाता है। वर्तमान में राज्य में चल रही बुलेट ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तथा अन्य प्रमुख रेलवे परियोजनाओं सहित कुल निवेश लगभग 1,28,000 करोड़ का है। मण्डल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने प्रेस कोन्फ्रेंस के माध्यम से विस्तृत जानकारी देते हुए बताया की - ट्रैक निर्माण एवं मल्टी-ट्रैकिंग राज्य में 38 ट्रैक निर्माण/मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जो 2,987 किलोमीटर में फैली हुई हैं और जिनकी कुल लागत 41,686 करोड़ है।

हाल ही में स्वीकृत प्रमुख परियोजनाएं

पश्चिम रेलवे के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में दो महत्वपूर्ण नई रेल लाइन देशलपर-हाजीपीर-लूना (81.771 किमी) एवं वायोर-लखपत (62.686 किमी) नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजनाओं को केंद्रीय मंत्री मण्डल ने स्वीकृति प्रदान की है और भुज-नलिया रेल लाइन का वायोर तक विस्तार एवं नलिया-जखाऊ पोर्ट नई रेल लाइन लगभग 194 किमी रु.3375 करोड़ की लागत से बनाई जाएंगी। सीमावर्ती एवं तटीय क्षेत्रों में रेल संपर्क को सुदृढ़ करने, औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने तथा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसंरचना को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होंगी।  नलिया-जखाऊ पोर्ट (24.88 किमी) नई ब्रॉडगेज रेल लाइन, यह रेल लाइन भुज-नलिया खंड के नलिया स्टेशन से प्रारंभ होकर जखाऊ बंदरगाह तक जाएगी। 

आरओबी/आरयूबी (लेवल क्रॉसिंग उन्मूलन)

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लेवल क्रॉसिंग हटाने हेतु 378 रोड ओवर ब्रिज/रोड अंडर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे सड़क यातायात एवं आपातकालीन सेवाओं को निर्बाध सुविधा मिलेगी। इन कार्यों पर लगभग 10,000 करोड़ की लागत आएगी।

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अमृत भारत स्टेशन योजना

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राज्य में 87 अमृत स्टेशनों पर पुनर्विकास कार्य प्रगति पर है, जिनमें से 18 स्टेशनों का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया जा चुका है।

कवच (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली)

कुल 1,758 किलोमीटर में कवच प्रणाली का कार्य प्रगति पर।
दिल्ली-अहमदाबाद खंड पर भौतिक कार्य पूर्ण।
पालनपुर-सामाखियाली-गांधीधाम (लगभग 300 किमी) खंड के लिए भी निविदा जारी।
अहमदाबाद-गेरतपुर (13.42 किमी) खंड कवच से सुसज्जित हो चुका है।
कवच प्रणाली के प्रमुख घटक-ट्रैकसाइड कार्ड रीडर, कम्युनिकेशन टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल, स्टेशन कवच एवं इंजन कवच-एसआईएल-4 स्तर की अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित हैं, जिन्हें भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित किया गया है।

अन्य प्रमुख परियोजनाएं

तारंगा हिल-आबू रोड, दाहोद-इंदौर, छोटा उदयपुर-धार, भीमनाथ-धोलेरा लॉजिस्टिक हब, नलिया-जखाऊ पोर्ट, मोडासा-शामलाजी, मियागाम-सोमलाया गेज परिवर्तन, अड्राज मोटी-विजापुर, खिजड़िया-अमरेली, समनी-जंबूसर, समालया-तिंबा-नडियाद-पेटलाद, पेटलाद-भद्रण, मियागाम-मालसर सहित कुल लगभग 22 परियोजनाएं प्रगति पर हैं।

अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पुनर्विकास

अहमदाबाद स्टेशन के पुनर्विकास के अंतर्गत दक्षिण फुट ओवर ब्रिज के 42 मीटर स्पान का लॉन्चिंग कार्य 18 घंटों में 16 चालू लाइनों के ऊपर सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। 140 मीट्रिक टन एआरटी क्रेन की सहायता से प्रत्येक 42 मीटर, लगभग 25 टन वजनी स्टील गर्डर का सुरक्षित लॉन्चिंग कर उत्कृष्ट इंजीनियरिंग एवं अंतर-विभागीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। स्टेशन पर 17 एकड़ का रूफ प्लाजा, प्लेटफॉर्म 8 से 11 तक कार्य पूर्ण, 16 मंजिला साउथ प्लाजा भवन का निर्माण प्रगति पर, एलिवेटेड रोड का लगभग 65% कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रतिदिन का यात्री फुटफॉल लगभग 1.03 लाख है। पश्चिम रेलवे द्वारा गुजरात में चल रहे ये समस्त कार्य आधुनिक, सुरक्षित एवं विश्वस्तरीय रेल अवसंरचना के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनसे राज्य के आर्थिक विकास, यात्री सुविधा एवं लॉजिस्टिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

भविष्य की योजनाएं

अहमदाबाद से चलने वाली ट्रेनों की संख्या वर्तमान से तीन गुना करने का लक्ष्य।
साबरमती में वंदे भारत ट्रेनों के लिए दो चरणों में डिपो स्वीकृत।
वटवा में 10 पिट लाइन एवं 20 स्टेबलिंग लाइन वाला मेगा कोचिंग डिपो, जिससे लगभग 150 ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
अहमदाबाद-पालनपुर, अहमदाबाद-सूरत, अहमदाबाद-सामाखियाली, पालनपुर-सामाखियाली सहित कई खंडों पर फोर-लेनिंग हेतु सर्वे।
नया स्टेशन गोपालपुर विकसित किया जाएगा, जिससे गांधीनगर से भुज की ओर ट्रेनों का संचालन बिना रिवर्सल संभव होगा और यात्रा समय में लगभग एक घंटे की बचत होगी।

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