प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा: संगम के कई घाट डूबे, निचले इलाकों में गहराया बाढ़ का खतरा 

एनडीआरएफ की टीमें तैनात

प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा: संगम के कई घाट डूबे, निचले इलाकों में गहराया बाढ़ का खतरा 
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ने से संगम क्षेत्र और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नदियों का जलस्तर 2.5 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। संगम के कई घाट डूब चुके हैं और सड़कों पर नावें चल रही हैं। प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीमें तैनात कर राहत कार्य शुरू कर दिए हैं।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से संगम क्षेत्र तथा शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। दोनों नदियां शुक्रवार को लगभग 2.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थीं, जिससे कई घाट जलमग्न हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बढ़ते जलस्तर के कारण संगम क्षेत्र के राम घाट, संगम घाट, दशाश्वमेध घाट, किला वीआईपी घाट, सरस्वती घाट और काली घाट समेत कई घाट पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। राम घाट और संगम घाट की ओर से बढ़ा पानी सड़कों तक पहुंच गया है, जिसके चलते जिन मार्गों पर पहले वाहनों का आवागमन होता था, वहां अब नावों का संचालन किया जा रहा है।

बाढ़ का पानी बड़े हनुमान मंदिर के कॉरिडोर तक पहुंच चुका है। जलस्तर में इसी प्रकार वृद्धि जारी रहने पर पानी के मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने की आशंका व्यक्त की जा रही है, जिससे प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। रिवर फ्रंट रोड तक पानी पहुंचने के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गंगा पथ को यातायात के लिए बंद कर दिया है। संगम क्षेत्र में रहने वाले तीर्थ पुरोहित, घाट कर्मी और दुकानदार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

बाढ़ का प्रभाव अब शहर के निचले इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। टैगोर टाउन, जॉर्ज टाउन, राजरूपपुर और करेली सहित कई क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने लगा है। प्रभावित क्षेत्रों के निवासी तथा प्रतियोगी छात्र सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। अनेक परिवारों ने अपना सामान ऊपरी मंजिलों पर पहुंचा दिया है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर स्थापित किए हैं। एनडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित की जा रही है। कलेक्ट्रेट में आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित कर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की तैनाती की गई है तथा चिकित्सा टीमों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि लगातार हो रही बारिश और विभिन्न बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है। जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहने पर आने वाले घंटों में संगम क्षेत्र तथा निचले इलाकों की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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