आरबीआई एमपीसी बैठक होगी अगले सप्ताह, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद 

बैठक 03 से 05 दिसंबर को होने वाली है

आरबीआई एमपीसी बैठक होगी अगले सप्ताह, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद 
आरबीआई की एमपीसी की 3-5 दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों में 0.25% कटौती की प्रबल संभावना है। रिकॉर्ड न्यूनतम 0.25% मुद्रास्फीति, 8.2% जीडीपी वृद्धि, जीएसटी कटौती और आयकर छूट बढ़ने से आर्थिक संकेत सकारात्मक हैं। सरकार और रेटिंग एजेंसियाँ भी दरों में कमी के संकेत दे चुकी हैं, जिससे निवेश और खर्च बढ़ने की उम्मीद है।

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगले सप्ताह होने वाली बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। रेपो दर वह दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। एमपीसी की बैठक 03 से 05 दिसंबर को होने वाली है। इससे पहले अक्टूबर को हुई बैठक में रेपो तथा अन्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछली बार आरबीआई गर्वनर ने कहा था कि मुद्रास्फीति की कम दरों को देखते हुए रेपो दरों में कटौती की गुंजाइश है, लेकिन केंद्रीय बैंक और आंकड़ों का इंतजार करेगा। वह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में की गयी कटौती तथा अमेरिका में भारतीय वस्तुओं पर उच्च आयात के प्रभाव को देखना चाहेगा। इन दोनों ही मोर्चों पर आंकड़े काफी अच्छे आए हैं। अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 8.2 प्रतिशत रही है जिसने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। साथ ही खुदरा मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत पर रही जो 13 साल में सबसे कम है। इस प्रकार सभी कारक ब्याज दरों में कटौती का समर्थन कर रहे हैं। स्वयं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री भी हाल ही में उद्योग मंडल फिक्की की बैठक में संकेत दे चुके हैं कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इसके अलावा, लगभग सभी प्रमुख रेटिंग एजेंसियों की राय है कि मौजूदा वित्त वर्ष में कम से कम एक बार और रेपो दर घटाए जाएंगे।

कम मुद्रास्फीति के कारण लोगों के पास व्यय योग्य आय अधिक हो गई है। दूसरी तरफ, व्यक्तिगत आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपए करने और जीएसटी की दरों में कटौती से सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए यह जरूरी है कि लोग अधिक खर्च करें। इसलिए ब्याज दरों में कटौती जरूरी है। इससे निजी पूंजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा जो पिछले लंबे समय से सुस्त पड़ा है। मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था के सभी कारकों को देखते हुए संभावना है कि इस सप्ताह रेपो दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। 

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