"शिमला समझौते" पर भाजपा का बड़ा हमला : 'रणनीतिक चूक' का आरोप, कांग्रेस की नीति पर उठाए सवाल
कांग्रेस की कमजोर कूटनीतिक नीति का परिणाम
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते को कांग्रेस की कमजोर कूटनीतिक नीति का परिणाम करार देते हुए कहा है कि मजबूत स्थिति में होने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने कश्मीर जैसे मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने के बजाय द्विपक्षीय बातचीत को चुना था। भाजपा ने सोशल मीडिया एक्स पर गुरूवार को लिखा कि 1971 की लड़ाई में निर्णायक जीत के बाद, इसी दिन 1972 में भारत ने शिमला समझौता किया। 93000 से ज़्यादा पाकिस्तानी युद्ध-बंदियों और कब्ज़े में लिए गए इलाक़ों के साथ, भारत बातचीत में बहुत मज़बूत स्थिति में था। फिर भी, उस मज़बूत स्थिति का फ़ायदा उठाकर मुख्य मुद्दों, ख़ासकर कश्मीर का स्थायी समाधान निकालने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व ने सिर्फ़ द्विपक्षीय बातचीत पर आधारित रास्ता चुना।
भाजपा ने कहा कि शिमला समझौते के दौरान कांग्रेस की कमज़ोर कूटनीतिक नीति, आज़ाद भारत के सबसे बड़े रणनीतिक मौकों में से एक को गंवाने का मामला बनी हुई है। भारी फ़ायदे वाला वह पल दशकों तक बहस का विषय बना रहा कि क्या भारत ने बिना कोई स्थायी समाधान पाए ही बहुत कुछ छोड़ दिया। भाजपा ने कहा कि पाँच दशक से भी ज़्यादा समय बाद दो जुलाई और शिमला समझौता कूटनीति, बातचीत और पाकिस्तान की समस्या के समाधान को लेकर कांग्रेस की मंशा पर अहम सवाल खड़े करते हैं।

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