दुनिया का पैदल चक्कर : 28 साल और 50 हजार किमी का सफर... 57 साल में मां के पास लौटे कार्ल बुशबी
एक सपना पूरा करने में लग गए जिंदगी के 28 साल
लंदन। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। ब्रिटेन के पूर्व सैनिक कार्ल बुशबी ने इस बात को हकीकत में बदल दिया। दुनिया भर की पैदल यात्रा करने का सपना लेकर 29 साल की उम्र में घर से निकले बुशबी 28 साल बाद 57 वर्ष की उम्र में वापस लौटे। इस दौरान उन्होंने चार महाद्वीपों और 30 देशों से गुजरते हुए करीब 50 हजार किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। सोमवार को उत्तरी इंग्लैंड के हल शहर स्थित अपने घर पहुंचने पर उनकी मां एंजेला ने उन्हें भावुक होकर गले लगा लिया। जिस घर से उन्होंने यह असाधारण सफर शुरू किया था, उसी घर में उनकी वापसी पर लोगों ने बैनर लगाकर स्वागत किया। इस पर लिखा था- 'घर वापसी पर स्वागत है बेटे।'
कार्ल बुशबी ने 1 नवंबर 1998 को चिली के पुंटा एरेनास से अपनी विश्व यात्रा शुरू की थी। उनका लक्ष्य बिना किसी वाहन, नाव या विमान का सहारा लिए पैदल चलते हुए अपने घर पहुंचना था। हालांकि, समुद्र और कुछ दुर्गम रास्तों को पार करने के लिए उन्हें तैराकी और विशेष परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। ऑक्सफोर्ड के पास स्थित रॉयल एयर फोर्स बेस से दक्षिण अमेरिका के लिए उड़ान भरने के बाद उन्होंने अपनी पैदल यात्रा शुरू की थी।
पिता के जन्मदिन कार्ड से मिला था सफर का विचार
इस अनोखे अभियान की शुरुआत के पीछे उनके पिता कीथ का एक जन्मदिन कार्ड था। 1990 के दशक के मध्य में उनके पिता ने कार्ड के जरिए बताया था कि उनकी स्पेशल फोर्स की टुकड़ी में इस बात पर चर्चा हुई थी कि क्या बेरिंग लैंड ब्रिज के रास्ते लंदन से न्यूयॉर्क तक पैदल पहुंचना संभव है। माना जाता है कि प्राचीन काल में समुद्र का जलस्तर कम होने पर इसी भूभाग के रास्ते इंसानों ने एशिया से अमेरिका की ओर प्रवास किया था। पिता की इसी बात ने बुशबी के मन में दुनिया को पैदल पार करने का विचार पैदा कर दिया।
शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह अभियान करीब पांच साल में पूरा हो जाएगा। बाद में उन्होंने अनुमान लगाया कि इसमें 12 साल से अधिक लग सकते हैं, लेकिन वास्तविकता में यह सफर 28 साल तक खिंच गया। जंगलों, रेगिस्तानों, बर्फीले इलाकों और समुद्री बाधाओं के साथ वीजा तथा सरकारी अनुमति की परेशानियों ने भी उनकी राह मुश्किल बनाई।
खतरनाक जंगल, बर्फीले समुद्र और ध्रुवीय भालू से सामना
बुशबी के लिए यह सफर किसी रोमांचक यात्रा से कम नहीं था। वर्ष 2001 में दक्षिण और मध्य अमेरिका के बीच स्थित डारिएन गैप को पार करना उनके सामने बड़ी चुनौती थी। यह इलाका घने जंगलों, वर्षावनों और पहाड़ों से भरा है, जहां सड़क तक नहीं है। यहां उन्हें संघर्ष और हिंसक हालात के बीच रास्ता बनाना पड़ा। पनामा में प्रतिबंधित सीमा क्षेत्र पार करने के आरोप में उन्हें 18 दिन जेल में भी रहना पड़ा।
वर्ष 2006 में उन्होंने अमेरिकी नागरिक दिमित्री कीफर के साथ करीब 90 किलोमीटर चौड़े बेरिंग स्ट्रेट को पार करने की कोशिश की। बर्फ के खिसकते टुकड़ों के बीच आगे बढ़ते समय दोनों की जान खतरे में पड़ गई और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हवाई मदद लेनी पड़ी। इसके बाद बुशबी ने दोबारा अभियान शुरू किया। इस दौरान उनका सामना ध्रुवीय भालू से हुआ। वे बर्फीले पानी में डूबने से बाल-बाल बचे। उनकी बर्फ पर चलने वाली स्लेज समुद्र में गिर गई, जिससे यात्रा का लगभग सारा सामान खो गया। रूस पहुंचने के बाद उन पर अवैध रूप से देश में प्रवेश करने का आरोप लगा और उन्हें जेल तथा देश से निकाले जाने की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
रूस में फंसे रहे करीब 10 साल
बुशबी की यात्रा में सबसे लंबी बाधाओं में से एक रूस में वीजा और सरकारी अनुमति की समस्याएं रहीं। मौसम भी उनके लिए बड़ी चुनौती था, क्योंकि बर्फीले इलाकों में साल के कुछ महीने ही पैदल चलना संभव था। इसके चलते रूस को पार करने में उन्हें करीब 10 साल लग गए। वर्ष 2012 में रूस ने उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में बुशबी ने अमेरिका के लॉस एंजिलिस से वाशिंगटन डीसी स्थित रूसी दूतावास तक पैदल यात्रा की। उनके इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार उन्हें जरूरी यात्रा दस्तावेज मिल गए और अभियान आगे बढ़ सका।
कैस्पियन सागर और इंग्लिश चैनल भी तैरकर पार किए
अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बुशबी ने केवल जमीन पर ही संघर्ष नहीं किया, बल्कि समुद्र भी पार किए। उन्होंने कैस्पियन सागर और इंग्लिश चैनल को तैरकर पार किया। बेरिंग स्ट्रेट में बर्फ के बीच से रास्ता बनाना भी उनके अभियान का सबसे जोखिम भरा हिस्सा रहा। चार महाद्वीपों और 30 देशों से गुजरते हुए उन्होंने करीब 50 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
28 साल पहले जब वह घर से निकले थे, तब उनके बाल काले थे और उम्र महज 29 साल थी। अब 57 साल की उम्र में उनके बाल सफेद हो चुके हैं और चेहरे पर लंबे संघर्ष की झलक साफ दिखाई देती है। सोमवार को मां से मुलाकात के दौरान भावुक माहौल ने उनके इस असाधारण सफर को यादगार बना दिया। एक ऐसा सपना, जिसे पूरा करने में उनकी जिंदगी के 28 साल लग गए, आखिरकार उन्हें उसी घर तक ले आया, जहां से उन्होंने दुनिया जीतने की ठानी थी।

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